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प्राचीन द्रोण शिव मंदिर शिवबाड़ी में आज सजेगा मेला
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गगरेट (ऊना)। देवभूमि हिमाचल के प्रवेश द्वार पर बसा प्राचीन द्रोण शिवमंदिर शिवबाड़ी में शनिवार को मेला सजेगा। कोरोना काल के बाद करीब दो साल बाद इस बार मेले का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा।
मंदिर के मुख्य पुजारी अजय शर्मा व अश्वनी शर्मा ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। उन्होंने मेले मे आने वाले शिव भक्तों से शांति बनाए रखने की अपील की है। बता दें कि शिवबाड़ी का शाब्दिक अर्थ ही शिवजी का वास है। यह धार्मिक स्थल होशियारपुर से चिंतपूर्णी मार्ग पर गगरेट से एक किलोमीटर की दूरी पर स्वां नदी के किनारे स्थित है। यहां भगवान शिव का प्राचीन एवं भव्य मंदिर है। शिव बाड़ी स्थल के चारों दिशाओं में चार कोनों पर चार श्मशान घाट तथा उनके साथ चार कुएं भी हैं।
शिवबाड़ी क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों से से परिपूर्ण एक जंगल है। इस जंगल की लकड़ी को केवल मुर्दा जलाने के लिए ही प्रयोग में लाया जाता है। अनंत काल से यही परंपरा निभाई जा रही है। इसके अलावा यह लकड़ी साधु-महात्माओं का धूना जलाने व यहां ही यज्ञ भंडारों में जलाने के काम आती है।
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मंदिर के मुख्य पुजारी अजय शर्मा व अश्वनी शर्मा ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। उन्होंने मेले मे आने वाले शिव भक्तों से शांति बनाए रखने की अपील की है। बता दें कि शिवबाड़ी का शाब्दिक अर्थ ही शिवजी का वास है। यह धार्मिक स्थल होशियारपुर से चिंतपूर्णी मार्ग पर गगरेट से एक किलोमीटर की दूरी पर स्वां नदी के किनारे स्थित है। यहां भगवान शिव का प्राचीन एवं भव्य मंदिर है। शिव बाड़ी स्थल के चारों दिशाओं में चार कोनों पर चार श्मशान घाट तथा उनके साथ चार कुएं भी हैं।
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शिवबाड़ी क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों से से परिपूर्ण एक जंगल है। इस जंगल की लकड़ी को केवल मुर्दा जलाने के लिए ही प्रयोग में लाया जाता है। अनंत काल से यही परंपरा निभाई जा रही है। इसके अलावा यह लकड़ी साधु-महात्माओं का धूना जलाने व यहां ही यज्ञ भंडारों में जलाने के काम आती है।
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