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Una News: बलिदानी ओमप्रकाश का स्मारक एक साल से फाइलों में दफन
Fri, 28 Aug 2026 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 28 Aug 2026 12:07 AM IST
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नारी (ऊना)। देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले बड़साला गांव के बलिदानी ओमप्रकाश के सम्मान में बनने वाला स्मारक सरकारी फाइलों में उलझकर रह गया है। स्मारक निर्माण के लिए स्वीकृत 3,26,680 रुपये की राशि सितंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग को जारी कर दी गई लेकिन करीब एक साल बीतने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया।
बड़साला निवासी सिपाही ओमप्रकाश पुत्र रामदास सीआईएसएफ की दोयांग यूनिट, नागालैंड में तैनात थे। दो दिसंबर 1995 को ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में उन्होंने दो आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन दुश्मन की गोलियों का शिकार होकर स्वयं भी बलिदान हो गए। उनकी याद में उनकी यूनिट के अधिकारी हर वर्ष दिसंबर में गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हैं और उनके पिता को सम्मानित करते हैं।
वर्ष 2023 में बलिदानी के पिता रामदास और ग्रामीणों ने यूनिट के अधिकारियों के समक्ष गांव में ओमप्रकाश की स्मृति में स्मारक बनाने की मांग रखी थी। इसके बाद गृह मंत्रालय से प्राथमिक पाठशाला बड़साला में स्मारक निर्माण को स्वीकृति मिली। जिला प्रशासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभा ने 3,26,680 रुपये का एस्टीमेट तैयार किया। इसके बाद जिलाधीश ऊना की ओर से सचिव रेडक्रॉस सोसायटी ऊना को राशि जारी करने के निर्देश दिए गए और दो सितंबर 2025 को यह राशि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को उपलब्ध करवा दी गई।
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बलिदानी के पिता रामदास ने कहा कि एक वर्ष पहले स्मारक निर्माण की राशि विभाग को मिल चुकी है, इसके बावजूद अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के लिए शहादत देने वाले बेटे की स्मृति में बनने वाले स्मारक के निर्माण में इतनी देरी क्यों हो रही है।
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स्थानीय निवासी पूर्ण चंद ने कहा कि संबंधित ग्राम पंचायत या जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को मामले की जानकारी मिलने के बाद पड़ताल की गई। यदि वे जिला प्रशासन के कार्यालय में जाकर जानकारी नहीं लेते तो राशि के उपयोग में और देरी हो सकती थी।
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राजरानी ने कहा कि बलिदानी के स्मारक के लिए मंजूर राशि को एक साल तक खर्च न किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और विभाग को जल्द निर्माण शुरू करना चाहिए, ताकि बलिदानी के पिता और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके।
उधर, लोक निर्माण विभाग बंगाणा के अधीक्षक केहर सिंह ने बताया कि स्मारक निर्माण की राशि कार्यालय में पहुंच चुकी है। कुछ दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाकर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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बड़साला निवासी सिपाही ओमप्रकाश पुत्र रामदास सीआईएसएफ की दोयांग यूनिट, नागालैंड में तैनात थे। दो दिसंबर 1995 को ड्यूटी के दौरान आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में उन्होंने दो आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन दुश्मन की गोलियों का शिकार होकर स्वयं भी बलिदान हो गए। उनकी याद में उनकी यूनिट के अधिकारी हर वर्ष दिसंबर में गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि देते हैं और उनके पिता को सम्मानित करते हैं।
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वर्ष 2023 में बलिदानी के पिता रामदास और ग्रामीणों ने यूनिट के अधिकारियों के समक्ष गांव में ओमप्रकाश की स्मृति में स्मारक बनाने की मांग रखी थी। इसके बाद गृह मंत्रालय से प्राथमिक पाठशाला बड़साला में स्मारक निर्माण को स्वीकृति मिली। जिला प्रशासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभा ने 3,26,680 रुपये का एस्टीमेट तैयार किया। इसके बाद जिलाधीश ऊना की ओर से सचिव रेडक्रॉस सोसायटी ऊना को राशि जारी करने के निर्देश दिए गए और दो सितंबर 2025 को यह राशि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को उपलब्ध करवा दी गई।
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बलिदानी के पिता रामदास ने कहा कि एक वर्ष पहले स्मारक निर्माण की राशि विभाग को मिल चुकी है, इसके बावजूद अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के लिए शहादत देने वाले बेटे की स्मृति में बनने वाले स्मारक के निर्माण में इतनी देरी क्यों हो रही है।
स्थानीय निवासी पूर्ण चंद ने कहा कि संबंधित ग्राम पंचायत या जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को मामले की जानकारी मिलने के बाद पड़ताल की गई। यदि वे जिला प्रशासन के कार्यालय में जाकर जानकारी नहीं लेते तो राशि के उपयोग में और देरी हो सकती थी।
राजरानी ने कहा कि बलिदानी के स्मारक के लिए मंजूर राशि को एक साल तक खर्च न किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और विभाग को जल्द निर्माण शुरू करना चाहिए, ताकि बलिदानी के पिता और ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके।
उधर, लोक निर्माण विभाग बंगाणा के अधीक्षक केहर सिंह ने बताया कि स्मारक निर्माण की राशि कार्यालय में पहुंच चुकी है। कुछ दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाकर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।