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Una News: आलू की बिजाई के लिए कई किसानों ने खेतों से बैंगन की फसल उखाड़ी
Sat, 24 Aug 2024 03:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:00 AM IST
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ऊना। जिले में आलू की बिजाई के लिए तैयारियां जोरों पर है। किसानों ने खेतों को पूरी तरह तैयार कर लिया है। कई किसानों ने बैंगन की फसल को हटाकर अब आलू के लिए खेत तैयार किए हैं।
इन दिनों बैंगन की पैदावार में कमी आई है, जिसे देखते हुए किसानों ने आलू की बिजाई के लिए बैंगन के पौधे उखाड़ना बेहतर विकल्प समझा है। किसानों ने यह फैसला ऐसे समय में लिया, जब बैंगन को अच्छे भाव मिल रहे हैं। हालांकि कम पैदावार इसकी मुख्य वजह हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार आलू की बिजाई 25 अगस्त के बाद से शुरू हो जाएगी। इस फसल को किसानों की आर्थिकी मजबूत करने वाली माना जाता है। इसी लिहाज से किसान जितना संभव हो पाए, आलू की फसल उगाते हैं। हालांकि कुछ साल पहले हरी सब्जियां उगाने वाले किसान इससे परहेज करते थे, लेकिन अब किसानों की सोच बदली है और आलू की फसल को पहले से और अधिक तरजीह मिल रही है। इस समय बैंगन की फसल को 20 से 25 रुपये प्रतिकिलो तक कीमत मिल रही है। इसके बावजूद किसानों ने बैंगन की फसल को खेतों से हटा दिया है।
किसान विजय कुमार, रविंद्र सिंह, सुरेंद्र सैनी, अरविंद कुमार, रामपाल ने कहा कि बैंगन की पैदावार अब कम होने लगी है। बारिश होने के बाद इसमें सड़न भी अधिक हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक महंगे मिलते हैं। इससे बेहतर है कि नई फसल का रुख किया जाए, क्योंकि बैंगन पर खर्च काफी आता है और अपनी लागत बड़ी मुश्किल से वापस आई है। ऐसे में अगर लंबे समय तक इस फसल को रखेंगे तो खर्च और बढ़ेगा। बता दें कि मई माह में उगाए जाने वाले बैंगन के पौधे नवंबर माह तक हरे-भरे रह सकते हैं।
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कोट्स
आलू जिला की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। किसान इसके लिए तैयारी करने लगे हैं। इस फसल को अगर अच्छे भाव मिलें तो किसानों की आर्थिकी में बहुत सुधार आता है। यही वजह है कि किसानों में यह काफी लोकप्रिय है। जिले में करीब 25,000 हेक्टेयर भूमि में इस फसल को तैयार किया जाता है और सबसे पहले ऊना का आलू मंडियों में पहुंचता है।
डाॅ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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इन दिनों बैंगन की पैदावार में कमी आई है, जिसे देखते हुए किसानों ने आलू की बिजाई के लिए बैंगन के पौधे उखाड़ना बेहतर विकल्प समझा है। किसानों ने यह फैसला ऐसे समय में लिया, जब बैंगन को अच्छे भाव मिल रहे हैं। हालांकि कम पैदावार इसकी मुख्य वजह हो सकती हैं। जानकारी के अनुसार आलू की बिजाई 25 अगस्त के बाद से शुरू हो जाएगी। इस फसल को किसानों की आर्थिकी मजबूत करने वाली माना जाता है। इसी लिहाज से किसान जितना संभव हो पाए, आलू की फसल उगाते हैं। हालांकि कुछ साल पहले हरी सब्जियां उगाने वाले किसान इससे परहेज करते थे, लेकिन अब किसानों की सोच बदली है और आलू की फसल को पहले से और अधिक तरजीह मिल रही है। इस समय बैंगन की फसल को 20 से 25 रुपये प्रतिकिलो तक कीमत मिल रही है। इसके बावजूद किसानों ने बैंगन की फसल को खेतों से हटा दिया है।
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किसान विजय कुमार, रविंद्र सिंह, सुरेंद्र सैनी, अरविंद कुमार, रामपाल ने कहा कि बैंगन की पैदावार अब कम होने लगी है। बारिश होने के बाद इसमें सड़न भी अधिक हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक महंगे मिलते हैं। इससे बेहतर है कि नई फसल का रुख किया जाए, क्योंकि बैंगन पर खर्च काफी आता है और अपनी लागत बड़ी मुश्किल से वापस आई है। ऐसे में अगर लंबे समय तक इस फसल को रखेंगे तो खर्च और बढ़ेगा। बता दें कि मई माह में उगाए जाने वाले बैंगन के पौधे नवंबर माह तक हरे-भरे रह सकते हैं।
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आलू जिला की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। किसान इसके लिए तैयारी करने लगे हैं। इस फसल को अगर अच्छे भाव मिलें तो किसानों की आर्थिकी में बहुत सुधार आता है। यही वजह है कि किसानों में यह काफी लोकप्रिय है। जिले में करीब 25,000 हेक्टेयर भूमि में इस फसल को तैयार किया जाता है और सबसे पहले ऊना का आलू मंडियों में पहुंचता है।
डाॅ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग