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मुसीबत में फंसे लोगों का हाथ थाम रहे ऊना के लविश
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सतीश शर्मा
नारी (ऊना)। कठिन हालात में अकसर लोग पहले अपनी और परिवार की सुरक्षा को तरजीह देते हैं, लेकिन हमारे आसपास कुछ ऐसे नेकदिल लोग भी हैं जो लोगों को मुश्किल में देखकर उनका हाथ थाम लेते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है जिला ऊना के लविश कपिला। वह साल 2016 से जन कल्याण के कार्य में जुटे हैं।
लविश कपिला अस्पतालों में अभी तक सैकड़ों लोगों को रक्त मुहैया करवाकर उनकी जान बचा चुके हैं। उन्हें किसी भी समय रक्त की जरूरत के बारे में सूचना मिले तो उनके साथ जुड़े करीब 10 नौजवान बिना समय गंवाए इकट्ठा होकर सहायता के लिए पहुंच जाते हैं।
लविश के कुछ साथियों रमन दड़ोच, विकास कुमार, आशीष कुमार और सुरेश महेंद्र ने बताया कि उन्होंने जिला और प्रदेश के अलावा पीजीआई चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में भी जाकर भी रक्तदान किया।
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नवयुवक रविंद्र दडोच ने बताया कि लविश के नेतृत्व में उन्होंने जिले में करीब 150 गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में राशन पहुंचाया है। कोरोना काल में उन्होंने प्रयास किया कि कोई भी भूखा न रहे। वह जिले में 40 परिवारों को नियमित रूप से राशन दे रहे हैं।
अगर उन्हें किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सूचना मिले तो वहां पहुंचकर जांच पड़ताल कर उसकी आवश्यकता को पूरा किया जाता है। लविश लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों तथा करीब 60 मानसिक रोगियों का इलाज करवा चुके हैं।
लविश का कहना है कि बचपन से उनके माता-पिता ने दूसरों के काम आने की नसीहत दी। माता-पिता की वह बात उसके दिल में घर कर गई। फरवरी 2022 में उन्होंने और उनकी सहयोगी संस्थाओं ने उत्तर भारत के विभिन्न स्थानों पर 1600 जगह पर शिविर लगाए।
एक दिन में एक लाख यूनिट रक्तदान करने का रिकॉर्ड बनाया। लविश ने बताया कि उनके कार्यों के लिए नौ मार्च 2022 को हिमाचल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
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नारी (ऊना)। कठिन हालात में अकसर लोग पहले अपनी और परिवार की सुरक्षा को तरजीह देते हैं, लेकिन हमारे आसपास कुछ ऐसे नेकदिल लोग भी हैं जो लोगों को मुश्किल में देखकर उनका हाथ थाम लेते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है जिला ऊना के लविश कपिला। वह साल 2016 से जन कल्याण के कार्य में जुटे हैं।
लविश कपिला अस्पतालों में अभी तक सैकड़ों लोगों को रक्त मुहैया करवाकर उनकी जान बचा चुके हैं। उन्हें किसी भी समय रक्त की जरूरत के बारे में सूचना मिले तो उनके साथ जुड़े करीब 10 नौजवान बिना समय गंवाए इकट्ठा होकर सहायता के लिए पहुंच जाते हैं।
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लविश के कुछ साथियों रमन दड़ोच, विकास कुमार, आशीष कुमार और सुरेश महेंद्र ने बताया कि उन्होंने जिला और प्रदेश के अलावा पीजीआई चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में भी जाकर भी रक्तदान किया।
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नवयुवक रविंद्र दडोच ने बताया कि लविश के नेतृत्व में उन्होंने जिले में करीब 150 गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में राशन पहुंचाया है। कोरोना काल में उन्होंने प्रयास किया कि कोई भी भूखा न रहे। वह जिले में 40 परिवारों को नियमित रूप से राशन दे रहे हैं।
अगर उन्हें किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सूचना मिले तो वहां पहुंचकर जांच पड़ताल कर उसकी आवश्यकता को पूरा किया जाता है। लविश लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों तथा करीब 60 मानसिक रोगियों का इलाज करवा चुके हैं।
लविश का कहना है कि बचपन से उनके माता-पिता ने दूसरों के काम आने की नसीहत दी। माता-पिता की वह बात उसके दिल में घर कर गई। फरवरी 2022 में उन्होंने और उनकी सहयोगी संस्थाओं ने उत्तर भारत के विभिन्न स्थानों पर 1600 जगह पर शिविर लगाए।
एक दिन में एक लाख यूनिट रक्तदान करने का रिकॉर्ड बनाया। लविश ने बताया कि उनके कार्यों के लिए नौ मार्च 2022 को हिमाचल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।