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Una News: पशुपालकों को मुर्रा नस्ल के पालन के सिखाए जाएंगे तरीके

Wed, 12 Nov 2025 05:24 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Nov 2025 05:24 PM IST
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Livestock farmers will be taught how to rear the Murrah breed.
मुर्रा प्रजनन केंद्र में पशुपालकों का प्रशिक्षण शुरू
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25 किसान सीख रहे मुर्रा नस्ल को पालने के गुर
संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिला मुख्यालय के साथ लगते बरनोह में स्थापित मुर्रा भैंस प्रजनन केंद्र में पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। इसमें 25 पशुपालक हिस्सा लें रहे। पशुपालक इस शिविर में मुर्रा नस्ल को पालने के गुर सीखेंगे। यह शिविर 14 नवंबर तक जारी रहेगा।
जानकारी के अनुसार ऊना जिले के बरनोह में प्रदेश का पहला मुर्रा नस्ल प्रजनन एवं डेयरी फार्म केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है। प्रारंभिक चरण में इस केंद्र के संचालन के लिए नौ शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंसें उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट सेंटर से लाई गई हैं। अब इस केंद्र की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए पशुपालकों को दूध उत्पादन बढ़ाने के उपायों और मौसम के अनुसार इस नस्ल की खुराक संबंधी जानकारी दी जा रही है। शिविर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम दो बजे तक संचालित होगा। पशुपालन विभाग भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित करता रहेगा।
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बता दें कि मुर्रा भैंस प्रजनन केंद्र में इस नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले कटड़े तैयार किए जाएंगे तथा फार्म से प्राप्त वीर्य को संग्रहीत कर विभागीय सीमन केंद्रों के माध्यम से पूरे प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के लिए वितरित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के दौरान भैंसों की पीढ़ीवार उत्पादन क्षमता और चिकित्सीय जांच को प्राथमिकता दी गई है। भविष्य में फार्म में पशुओं की संख्या बढ़ाकर 50 तक करने का लक्ष्य है। मुर्रा नस्ल की भैंस औसतन 15 से 20 लीटर दूध प्रतिदिन देती है।
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बरनोह मुर्रा प्रजनन फार्म के सहायक निदेशक राकेश भट्टी ने बताया कि शिविर को पशुपालकों का अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। शुरुआत में 25 किसानों को प्रशिक्षित करना लक्ष्य था। आगामी दिनों में भी ऐसे शिविर लगाए जाएंगे।
फार्म का उद्देश्य शुद्ध नस्ल की भैंसों का प्रजनन करना है। इस परियोजना में जल्द पशुपालकों को भी इस नस्ल को पालन के लिए दिया जाएगा।
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