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Una News: लाखों खर्च, खंडहर में तबदील हो रहा वन विहार अलोह
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15 साल से किसी ने नहीं ली सुध, रखरखाव न होने से लावारिस हालत में
रेस्ट फॉर ए व्हाइल का लक्ष्य मात्र दीवार तक सीमित
मां चिंतपूर्णी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को मिल सकती थी सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
मुबारिकपुर (ऊना)। उपमंडल अंब के चिंतपूर्णी क्षेत्र में मुबारिकपुर से भरवाईं-चिंतपूर्णी मुख्य सड़क के किनारे बनाए गए वन विहार अलोह खंडहर में तबदील हो गया है। मुख्य सड़क के किनारे लाखों खर्च कर इस वन विहार का शिलान्यास 15 वर्ष पूर्व 19 जनवरी 2010 में तत्कालीन सरकार ने किया था। इसका लक्ष्य देवभूमि के देवस्थलों में आने वाले पर्यटकों के लिए रेस्ट फॉर ए व्हाइल (कुछ पल विश्राम) रखा गया था। क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों जगमोहन ठाकुर, मनजीत केशव, अमित ठाकुर, समाजसेवी सुखविंदर सिंह का कहना है कि वन विहार अलोह की सुध न लेना चिंतनीय है। वर्तमान में लाखों खर्च करने के बाद भी वन विहार अलोह लावारिस संपत्ति बनी हुई है। सालों से इसके भीतर झाड़ियों का साम्राज्य है। पेयजल सुविधा के लिए लगाया गया पंप, टंकियां, शौचालय बद से बदतर हो चुके हैं। निशान ही शेष हैं। वन विहार के परिसर में बनाए गए शौचालय पूरी तरह टूटी फूटी हालत में हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भावी प्रोजेक्टों की योजना का शिलान्यास व उद्घाटन करने की सबको जल्दबाजी रहती है लेकिन तैयार होने के बाद भविष्य में उसका रखरखाव रामभरोसे छोड़ दिया जाता है।
बाक्स
चिंतपूर्णी के पूर्व विधायक बलवीर चौधरी का कहना है कि वन विहार को चिंतपूर्णी आने वाले यात्रियों को कुछ पल विश्राम के उद्देश्य से बनाया गया था। वर्तमान सरकार की तरफ से इसके सुधार को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
वन विभाग रेंजर ऑॅफिसर भरवाईं पूर्ण सिंह ने कहा कि अभी तक इसके सुधार के लिए सरकार से कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
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रेस्ट फॉर ए व्हाइल का लक्ष्य मात्र दीवार तक सीमित
मां चिंतपूर्णी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को मिल सकती थी सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
मुबारिकपुर (ऊना)। उपमंडल अंब के चिंतपूर्णी क्षेत्र में मुबारिकपुर से भरवाईं-चिंतपूर्णी मुख्य सड़क के किनारे बनाए गए वन विहार अलोह खंडहर में तबदील हो गया है। मुख्य सड़क के किनारे लाखों खर्च कर इस वन विहार का शिलान्यास 15 वर्ष पूर्व 19 जनवरी 2010 में तत्कालीन सरकार ने किया था। इसका लक्ष्य देवभूमि के देवस्थलों में आने वाले पर्यटकों के लिए रेस्ट फॉर ए व्हाइल (कुछ पल विश्राम) रखा गया था। क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों जगमोहन ठाकुर, मनजीत केशव, अमित ठाकुर, समाजसेवी सुखविंदर सिंह का कहना है कि वन विहार अलोह की सुध न लेना चिंतनीय है। वर्तमान में लाखों खर्च करने के बाद भी वन विहार अलोह लावारिस संपत्ति बनी हुई है। सालों से इसके भीतर झाड़ियों का साम्राज्य है। पेयजल सुविधा के लिए लगाया गया पंप, टंकियां, शौचालय बद से बदतर हो चुके हैं। निशान ही शेष हैं। वन विहार के परिसर में बनाए गए शौचालय पूरी तरह टूटी फूटी हालत में हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भावी प्रोजेक्टों की योजना का शिलान्यास व उद्घाटन करने की सबको जल्दबाजी रहती है लेकिन तैयार होने के बाद भविष्य में उसका रखरखाव रामभरोसे छोड़ दिया जाता है।
बाक्स
चिंतपूर्णी के पूर्व विधायक बलवीर चौधरी का कहना है कि वन विहार को चिंतपूर्णी आने वाले यात्रियों को कुछ पल विश्राम के उद्देश्य से बनाया गया था। वर्तमान सरकार की तरफ से इसके सुधार को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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वन विभाग रेंजर ऑॅफिसर भरवाईं पूर्ण सिंह ने कहा कि अभी तक इसके सुधार के लिए सरकार से कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। फिलहाल कुछ भी नहीं कहा जा सकता।