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कानून की अज्ञानता कोई बहाना नहीं : नेहा शर्मा
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रामपुर में विधिक साक्षरता शिविर में किया जागरूक
नागरिकों को मुफ्त कानूनी अधिकारों के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। राजकीय माध्यमिक पाठशाला रामपुर में उप-मंडलीय विधिक सेवा समिति ऊना की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सिविल जज-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा शर्मा की अध्यक्षता में विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया और विधिक अधिकारों तथा योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, महिला एवं बाल अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, आपदा पीड़ितों के लिए कानूनी प्रावधान और विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
नेहा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कानून की अज्ञानता कोई बहाना नहीं है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखें। हर व्यक्ति अपने आप में एक जज होता है, क्योंकि सही और गलत का निर्णय सबसे पहले व्यक्ति स्वयं करता है। यदि व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ ले, तो वह न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी न्यायपूर्ण निर्णय ले सकता है। शिविर में विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित कानूनों पर चर्चा की गई।
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नागरिकों को मुफ्त कानूनी अधिकारों के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। राजकीय माध्यमिक पाठशाला रामपुर में उप-मंडलीय विधिक सेवा समिति ऊना की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सिविल जज-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा शर्मा की अध्यक्षता में विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया और विधिक अधिकारों तथा योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, महिला एवं बाल अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, आपदा पीड़ितों के लिए कानूनी प्रावधान और विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
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नेहा शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि कानून की अज्ञानता कोई बहाना नहीं है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखें। हर व्यक्ति अपने आप में एक जज होता है, क्योंकि सही और गलत का निर्णय सबसे पहले व्यक्ति स्वयं करता है। यदि व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ ले, तो वह न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी न्यायपूर्ण निर्णय ले सकता है। शिविर में विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित कानूनों पर चर्चा की गई।
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