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Una News: ब्रह्महोती, विभोर में बैसाखी पर सैकड़ों लोगों ने लगाई डुबकी
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बैसाखी पर्व पर ब्रह्महोती में डुबकी लगाते हुए लोग।संवाद
हिंदू नव वर्ष मनाते हैं तीर्थ स्थलों पर : महेश
हिमाचल और पंजाब के लोगों ने मिलकर मनाया बैसाखी पर्व
स्नान के बाद लोगों ने ब्रह्महोती में ब्रह्मजी का लिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। बैसाखी पर्व पर रविवार को हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के धार्मिक और रमणीक स्थल ब्रह्महोती और पंजाब के नंगल से सटे ऐतिहासिक कस्बे विभोर साहिब के पंजगाटडा में हिमाचल और पंजाब के कई क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों ने डुबकी लगाई। सवेरे से ही लोग ब्रह्महोती और पंजगाटडा में आना शुरू हो गए थे। लोगों के आने का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। दर्जनों अस्थायी दुकानें लगाकर कारोबार करने वाले लोग भी मौजूद थे। बच्चों के अनेक प्रकार के खिलौनों से लेकर घरेलू सामान की खरीदारी लोगों को करते देखा गया। लोग इस पर्व को मनोरंजन के साथ-साथ आस्था से जोड़कर भी मनाते हैं। ब्रह्महोती के महंत महेश गिरी ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार नव संवत के शुरू होने के उपरांत वैशाख पर्व को वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। अंग्रेजों का नया साल होटल, क्लब और आधी रात को अश्लील नृत्य आदि से शुरू होता है, वहीं सनातन संस्कृति में नए वर्ष की शुरुआत तीर्थों पर जाकर स्नान, ध्यान, जप, तप और दान-पुण्य से होती है। लोग इस दिन सर्वप्रथम स्नान आदि करने के बाद भगवान की आराधना करते हैं और ज्ञान, दान पुण्य, हवन यज्ञ आदि करके सर्व मंगल कामना करते हैं। हिमाचल और पंजाब के बहुत सारे लोगों ने सतलुज दरिया तो सैकड़ों की संख्या में लोगों ने ब्रह्महोती में डुबकी लगाई और सृष्टि रचयिता भगवान ब्रह्मजी का आशीर्वाद लिया। हर वर्ष की ही तरह इस वर्ष भी ब्रह्ममोती में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग से स्नान की व्यवस्था की गई थी। इस बार लोगों में खरीदारी करने को लेकर कोई खास उत्साह नहीं देखा गया। इसका कारण महंगाई की मार माना जा रहा है। मिट्टी से बने बर्तनों की बात हो अथवा घर के अन्य सामान को खरीदने में इस बार लोगों ने थोड़ी कंजूसी बरती है। अनेक लोगों को निजी वाहनों में आकर स्नान आदि करके बिना कुछ खरीदारी किए ही घरों को लौटते देखा गया।
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हिमाचल और पंजाब के लोगों ने मिलकर मनाया बैसाखी पर्व
स्नान के बाद लोगों ने ब्रह्महोती में ब्रह्मजी का लिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। बैसाखी पर्व पर रविवार को हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के धार्मिक और रमणीक स्थल ब्रह्महोती और पंजाब के नंगल से सटे ऐतिहासिक कस्बे विभोर साहिब के पंजगाटडा में हिमाचल और पंजाब के कई क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों ने डुबकी लगाई। सवेरे से ही लोग ब्रह्महोती और पंजगाटडा में आना शुरू हो गए थे। लोगों के आने का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। दर्जनों अस्थायी दुकानें लगाकर कारोबार करने वाले लोग भी मौजूद थे। बच्चों के अनेक प्रकार के खिलौनों से लेकर घरेलू सामान की खरीदारी लोगों को करते देखा गया। लोग इस पर्व को मनोरंजन के साथ-साथ आस्था से जोड़कर भी मनाते हैं। ब्रह्महोती के महंत महेश गिरी ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार नव संवत के शुरू होने के उपरांत वैशाख पर्व को वर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। अंग्रेजों का नया साल होटल, क्लब और आधी रात को अश्लील नृत्य आदि से शुरू होता है, वहीं सनातन संस्कृति में नए वर्ष की शुरुआत तीर्थों पर जाकर स्नान, ध्यान, जप, तप और दान-पुण्य से होती है। लोग इस दिन सर्वप्रथम स्नान आदि करने के बाद भगवान की आराधना करते हैं और ज्ञान, दान पुण्य, हवन यज्ञ आदि करके सर्व मंगल कामना करते हैं। हिमाचल और पंजाब के बहुत सारे लोगों ने सतलुज दरिया तो सैकड़ों की संख्या में लोगों ने ब्रह्महोती में डुबकी लगाई और सृष्टि रचयिता भगवान ब्रह्मजी का आशीर्वाद लिया। हर वर्ष की ही तरह इस वर्ष भी ब्रह्ममोती में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग से स्नान की व्यवस्था की गई थी। इस बार लोगों में खरीदारी करने को लेकर कोई खास उत्साह नहीं देखा गया। इसका कारण महंगाई की मार माना जा रहा है। मिट्टी से बने बर्तनों की बात हो अथवा घर के अन्य सामान को खरीदने में इस बार लोगों ने थोड़ी कंजूसी बरती है। अनेक लोगों को निजी वाहनों में आकर स्नान आदि करके बिना कुछ खरीदारी किए ही घरों को लौटते देखा गया।