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Una News: एचपीएसएलए का संघर्ष रंग लाया, पत्र जारी होने से शिक्षकों को राहत
Tue, 24 Feb 2026 12:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 24 Feb 2026 12:14 AM IST
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ऊना। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ (एचपीएसएलए) ऊना के जिला अध्यक्ष शशि सैनी और महासचिव संजीव कुमार की अगुवाई में चलाए गए संघर्ष का असर रंग लाया है।
सीबीएसई ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ योजना को लेकर उठी आशंकाओं के बीच प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 को जारी संशोधित अधिसूचना ने प्रवक्ता वर्ग को बड़ी राहत प्रदान की है। संघ ने प्रारंभ से ही स्पष्ट किया था कि वह सीबीएसई प्रणाली के विरोध में नहीं है बल्कि उसे लागू करने पर आपत्ति है।
अलग सीबीएसई उप-कैडर बनाने, कार्यरत शिक्षकों से पुनः परीक्षा लेने तथा वरिष्ठता समाप्त करने जैसे प्रस्तावों का जिला अध्यक्ष शशि सैनी और महासचिव संजीव कुमार सहित ऊना इकाई ने खुलकर विरोध किया था। उन्होंने इसे शिक्षकों के आत्मसम्मान और वर्षों की सेवा पर प्रश्नचिह्न लगाने जैसा बताया था।
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लगातार ज्ञापन, बैठकों और संवाद की प्रक्रिया के बाद सरकार ने अधिसूचना में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद सीबीएसई विद्यालयों में जाने वाले शिक्षकों का अपने मूल कैडर में लियन (अधिकार) सुरक्षित रखा जाएगा।
उनकी वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तें अप्रभावित रहेंगी तथा पदोन्नति के समय उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार सीबीएसई या गैर-सीबीएसई विद्यालयों में नियुक्ति संभव होगी। जिला अध्यक्ष शशि सैनी और महासचिव संजीव कुमार ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के संवेदनशील हस्तक्षेप से ही यह संशोधित पत्र जारी हो पाया, जिससे प्रवक्ता वर्ग की चिंताएं दूर हुईं और विश्वास बहाल हुआ।
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सीबीएसई ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ योजना को लेकर उठी आशंकाओं के बीच प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा 22 फरवरी 2026 को जारी संशोधित अधिसूचना ने प्रवक्ता वर्ग को बड़ी राहत प्रदान की है। संघ ने प्रारंभ से ही स्पष्ट किया था कि वह सीबीएसई प्रणाली के विरोध में नहीं है बल्कि उसे लागू करने पर आपत्ति है।
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अलग सीबीएसई उप-कैडर बनाने, कार्यरत शिक्षकों से पुनः परीक्षा लेने तथा वरिष्ठता समाप्त करने जैसे प्रस्तावों का जिला अध्यक्ष शशि सैनी और महासचिव संजीव कुमार सहित ऊना इकाई ने खुलकर विरोध किया था। उन्होंने इसे शिक्षकों के आत्मसम्मान और वर्षों की सेवा पर प्रश्नचिह्न लगाने जैसा बताया था।
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लगातार ज्ञापन, बैठकों और संवाद की प्रक्रिया के बाद सरकार ने अधिसूचना में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद सीबीएसई विद्यालयों में जाने वाले शिक्षकों का अपने मूल कैडर में लियन (अधिकार) सुरक्षित रखा जाएगा।
उनकी वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा शर्तें अप्रभावित रहेंगी तथा पदोन्नति के समय उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार सीबीएसई या गैर-सीबीएसई विद्यालयों में नियुक्ति संभव होगी। जिला अध्यक्ष शशि सैनी और महासचिव संजीव कुमार ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के संवेदनशील हस्तक्षेप से ही यह संशोधित पत्र जारी हो पाया, जिससे प्रवक्ता वर्ग की चिंताएं दूर हुईं और विश्वास बहाल हुआ।