फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   His own children are in private schools, but he is teaching others the lesson of admission in government schools

Una News: खुद के बच्चे निजी में, दूसरों को पढ़ा रहे सरकारी स्कूलों में दाखिले का पाठ

Tue, 25 Mar 2025 07:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 07:38 PM IST
विज्ञापन
His own children are in private schools, but he is teaching others the lesson of admission in government schools
अभिभावक बोले- पहले सरकारी शिक्षकों को समझनी होगी अपनी भूमिका
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से अध्यापक अभिभावकों को घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह पहल इस बात को लेकर है कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिल सकती है और शिक्षा का स्तर ऊंचा हो सकता है। लेकिन, दिलचस्प तथ्य यह है कि कई अध्यापक खुद अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब अध्यापक खुद सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं भेज रहे हैं तो उनका विश्वास कैसे किया जा सकता है। क्या अध्यापकों को अपनी योग्यता पर विश्वास नहीं है। सरकार सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है। अध्यापक रखती है और अध्यापक को सरकारी खजाने से तनख्वाह दी जाती है लेकिन अध्यापकों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इस स्थिति में समाज के प्रमुख लोगों का मानना है कि अध्यापकों को अपनी भूमिका को समझते हुए पहले अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवाना चाहिए ताकि वे समाज में अच्छा उदाहरण प्रस्तुत कर सकें।
अंब अध्यापक यूनियन के प्रधान जगदेव सिंह का कहना है कि यह सच है कि कुछ अध्यापकों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। अगर सरकार ऐसा कानून लाती है कि हर कर्मचारी का बच्चा सरकारी स्कूल में पड़ेगा तो हम तैयार हैं।
विज्ञापन


बड़ूही स्कूल के मुख्य अध्यापक संजय धीमान का कहना है कि यह बात सच है कि हमारे बड़ूही स्कूल के कुछ अध्यापकों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं और जो गलत है। लोगों को प्रेरित करने से पहले हमें खुद को जागृत होना बहुत जरूरी है ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या को बढ़ा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिक्षा विभाग उच्चतर ऊना के उपनिदेशक अनिल कुमार का कहना है कि ऐसा नहीं है कि हर सरकारी अध्यापक के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। कुछ एक अध्यापकों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते होंगे। उनको भी हम कहना चाहते हैं कि अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं ताकि समाज में एक अच्छा संदेश जा सके और स्कूलों में बच्चों की संख्या को बढ़ाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed