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Una News: निशुल्क मिलने वाली वर्दी के देने पड़ रहे 1500 रुपये, अभिभावकों पर बढ़ा बोझ
Thu, 25 Apr 2024 04:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 25 Apr 2024 04:14 AM IST
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निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों के वर्दी का रंग बदलने की व्यवस्था
अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही 600 से 900 रुपये के बीच मिल रही
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। नए सत्र में सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर वर्दी के रंगों में बदलाव किया गया है, जिससे एक विद्यार्थी के लिए वर्दी की खरीद पर अभिभावकों को 1400 से लेकर 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि सरकार की ओर से महज 600 रुपये की राशि दी जा रही है। प्रशासन द्वारा जारी निर्देश बच्चों के अभिभावकों पर भारी पड़ रहे हैं। वहीं, सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी 600 रुपये की राशि से भी वंचित हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के समस्त सरकारी स्कूलों में पहले पहली कक्षा से 12वीं तक एक समान निशुल्क वर्दी दी जाती थी। वर्तमान में वर्दी न देकर केवल पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सरकार द्वारा 600 रुपये की राशि दी जा रही है, जबकि बच्चों को दी जा रही 600 रुपये की राशि भी महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। वर्दी योजना में बदलाव अभिभावकों की जेबों पर डाका डालने के समान है। वहीं, इस योजना में सामान्य श्रेणी के लड़कों को वंचित रखा गया है। चाहे वह गरीब ही क्यों न हो, जिससे विद्यार्थियों में अपने आप में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।
सरकार उपलब्ध करवाए वर्दी या 1500 रुपये जारी करे : अभिभावक
अभिभावकों में विनोद शर्मा, नरिंद्र सैनी, अश्वनी कुमार, बलराम कुमार, संतोष देवी, नीलम कुमारी, सुरेश कुमारी का कहना है कि सरकार द्वारा वर्दी के चुनिंदा रंग दिए गए हैं, जबकि स्कूल प्रशासन द्वारा निर्धारित रंग अनुसार वर्दी की खरीद स्वयं करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर सरकार द्वारा स्वयं वर्दी उपलब्ध करवाई जाए, तो उन्हें काफी राहत मिलती। मात्र 600 रुपये की राशि देकर सरकार ने उन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही 600 रुपये से 900 रुपये में मिल रही है। अन्य सामान डालकर उन्हें 1500 या इससे अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। आज के समय में 600 रुपये में पूरी वर्दी बाजार में मिलना असंभव है। सरकार को पहले की तरह स्वयं वर्दी उपलब्ध करवानी चाहिए या राशि कम से कम 1500 रुपये दी जाए।
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सरकारी आदेशों अनुसार कक्षा एक से आठ तक वर्दी के लिए 600 रुपये प्रति बच्चा दिए जाते हैं। यदि सरकार निर्धारित राशि में बढ़ोतरी करती है, तो कार्यालय तुरंत इसे अमल में लेगा और राशि जारी की जाएगी।
देवेन्द्र चंदेल, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक।
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अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही 600 से 900 रुपये के बीच मिल रही
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। नए सत्र में सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तर्ज पर वर्दी के रंगों में बदलाव किया गया है, जिससे एक विद्यार्थी के लिए वर्दी की खरीद पर अभिभावकों को 1400 से लेकर 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि सरकार की ओर से महज 600 रुपये की राशि दी जा रही है। प्रशासन द्वारा जारी निर्देश बच्चों के अभिभावकों पर भारी पड़ रहे हैं। वहीं, सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी 600 रुपये की राशि से भी वंचित हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के समस्त सरकारी स्कूलों में पहले पहली कक्षा से 12वीं तक एक समान निशुल्क वर्दी दी जाती थी। वर्तमान में वर्दी न देकर केवल पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सरकार द्वारा 600 रुपये की राशि दी जा रही है, जबकि बच्चों को दी जा रही 600 रुपये की राशि भी महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। वर्दी योजना में बदलाव अभिभावकों की जेबों पर डाका डालने के समान है। वहीं, इस योजना में सामान्य श्रेणी के लड़कों को वंचित रखा गया है। चाहे वह गरीब ही क्यों न हो, जिससे विद्यार्थियों में अपने आप में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।
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सरकार उपलब्ध करवाए वर्दी या 1500 रुपये जारी करे : अभिभावक
अभिभावकों में विनोद शर्मा, नरिंद्र सैनी, अश्वनी कुमार, बलराम कुमार, संतोष देवी, नीलम कुमारी, सुरेश कुमारी का कहना है कि सरकार द्वारा वर्दी के चुनिंदा रंग दिए गए हैं, जबकि स्कूल प्रशासन द्वारा निर्धारित रंग अनुसार वर्दी की खरीद स्वयं करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर सरकार द्वारा स्वयं वर्दी उपलब्ध करवाई जाए, तो उन्हें काफी राहत मिलती। मात्र 600 रुपये की राशि देकर सरकार ने उन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही 600 रुपये से 900 रुपये में मिल रही है। अन्य सामान डालकर उन्हें 1500 या इससे अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। आज के समय में 600 रुपये में पूरी वर्दी बाजार में मिलना असंभव है। सरकार को पहले की तरह स्वयं वर्दी उपलब्ध करवानी चाहिए या राशि कम से कम 1500 रुपये दी जाए।
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सरकारी आदेशों अनुसार कक्षा एक से आठ तक वर्दी के लिए 600 रुपये प्रति बच्चा दिए जाते हैं। यदि सरकार निर्धारित राशि में बढ़ोतरी करती है, तो कार्यालय तुरंत इसे अमल में लेगा और राशि जारी की जाएगी।
देवेन्द्र चंदेल, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक।