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Una News: नौनिहालों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने जांचे स्कूली वाहन, दी सख्त हिदायत
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हरोली पुलिस स्कूली वाहनों की जांच करते हुए।स्रोत स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। पुलिस थाना हरोली की टीम ने शनिवार सुबह क्षेत्र के कई स्थानों पर नाकाबंदी कर स्कूली वाहनों की जांच की। नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर ड्राइवरों और बस मालिकों को कानूनी जानकारी से अवगत करवाया और स्कूली बच्चों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी।
डीएसपी हरोली मोहन रावत ने बताया कि स्कूल बसों का संचालन करने वाले ड्राइवरों के पास स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उन्हें भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए।
ओवरस्पीड, शराब पीकर गाड़ी चलाने और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने वालों को नहीं रखा जाना चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) लगा होना चाहिए ताकि बसें निर्धारित गति सीमा के भीतर ही चलें। बस की खिड़कियों पर क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए और बस में फर्स्ट एड बॉक्स और फायर सेफ्टी यंत्र भी होना चाहिए। स्कूल बस में एक पुरुष और एक महिला परिचालक-सहायक का होना अनिवार्य है।
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स्कूल बसों में आपातकालीन निकास द्वार, अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा किट, सीट बेल्ट, अग्नि पहचान अलार्म प्रणाली आदि होने चाहिए। डीएसपी हरोली मोहन रावत ने बताया कि समय-समय पर उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर स्कूली बसों की सुरक्षा व्यवस्था जांची जाती है, ताकि नौनिहालों व स्कूली बच्चों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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ऊना। पुलिस थाना हरोली की टीम ने शनिवार सुबह क्षेत्र के कई स्थानों पर नाकाबंदी कर स्कूली वाहनों की जांच की। नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर ड्राइवरों और बस मालिकों को कानूनी जानकारी से अवगत करवाया और स्कूली बच्चों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी।
डीएसपी हरोली मोहन रावत ने बताया कि स्कूल बसों का संचालन करने वाले ड्राइवरों के पास स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उन्हें भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए।
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ओवरस्पीड, शराब पीकर गाड़ी चलाने और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने वालों को नहीं रखा जाना चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) लगा होना चाहिए ताकि बसें निर्धारित गति सीमा के भीतर ही चलें। बस की खिड़कियों पर क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए और बस में फर्स्ट एड बॉक्स और फायर सेफ्टी यंत्र भी होना चाहिए। स्कूल बस में एक पुरुष और एक महिला परिचालक-सहायक का होना अनिवार्य है।
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स्कूल बसों में आपातकालीन निकास द्वार, अग्निशामक यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा किट, सीट बेल्ट, अग्नि पहचान अलार्म प्रणाली आदि होने चाहिए। डीएसपी हरोली मोहन रावत ने बताया कि समय-समय पर उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर स्कूली बसों की सुरक्षा व्यवस्था जांची जाती है, ताकि नौनिहालों व स्कूली बच्चों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।