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Una News: गुरु जी पढ़ा रहे स्वच्छता का पाठ, नलों के पास जमी शैवाल
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय दियोली वाड़ी में खतरे में बचपन
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। प्रार्थना सभा में हर सुबह जल ही जीवन है और स्वच्छता ही सेवा है .. का नारा बुलंद करवाने वाले अपने ही स्कूल में इन बातों का पालन करवाने में नाकाम नजर आ रहे हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय दियोली वाड़ी में अव्यवस्था इस कदर है कि विद्यालय परिसर में लगे पेयजल नलों पर काई (शैवाल) जम चुकी है और आसपास दूषित पानी खड़ा है। नन्हे विद्यार्थी इन्हीं नलों से पानी पीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल में नलों की नियमित सफाई नहीं होती, जिसके चलते उन पर मोटी काई जम गई है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। प्राथमिक और मिडल दोनों स्तरों का यह विद्यालय सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही का शिकार है। प्राइमरी में 50 और मिडल सेक्शन में 12 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था को लेकर न तो शिक्षक और न ही एसएमसी कमेटी कोई ठोस कदम उठाती दिख रही है।
विद्यालय की दीवारों पर भले ही स्वच्छता से जुड़े बड़े-बड़े स्लोगन लिखे हों, लेकिन वास्तविकता में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सरकार भले ही शिक्षा और स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, मगर धरातल पर तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है।
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प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज गुरनाम सिंह का कहना है कि नलों पर जमी शैवाल को साफ कर दिया गया है और स्कूल प्रबंधन सफाई व्यवस्था को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। प्रार्थना सभा में हर सुबह जल ही जीवन है और स्वच्छता ही सेवा है .. का नारा बुलंद करवाने वाले अपने ही स्कूल में इन बातों का पालन करवाने में नाकाम नजर आ रहे हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय दियोली वाड़ी में अव्यवस्था इस कदर है कि विद्यालय परिसर में लगे पेयजल नलों पर काई (शैवाल) जम चुकी है और आसपास दूषित पानी खड़ा है। नन्हे विद्यार्थी इन्हीं नलों से पानी पीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल में नलों की नियमित सफाई नहीं होती, जिसके चलते उन पर मोटी काई जम गई है। यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। प्राथमिक और मिडल दोनों स्तरों का यह विद्यालय सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाही का शिकार है। प्राइमरी में 50 और मिडल सेक्शन में 12 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था को लेकर न तो शिक्षक और न ही एसएमसी कमेटी कोई ठोस कदम उठाती दिख रही है।
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विद्यालय की दीवारों पर भले ही स्वच्छता से जुड़े बड़े-बड़े स्लोगन लिखे हों, लेकिन वास्तविकता में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। सरकार भले ही शिक्षा और स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, मगर धरातल पर तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती है।
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प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज गुरनाम सिंह का कहना है कि नलों पर जमी शैवाल को साफ कर दिया गया है और स्कूल प्रबंधन सफाई व्यवस्था को लेकर पूरी तरह गंभीर है।