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Una News: बिना पासपोर्ट विभोर पहुंचे साइबेरिया से मेहमान
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मार्च 25 तक करेंगे विभोर की सतलुज झील में अठखेलियां
रूस में झीलें जमने से हिमाचल के जलाशयों का करते हैं रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। बिना पासपोर्ट हजारों किलोमीटर का सफर तय करके विदेशी मेहमान हिमाचल और पंजाब के जलाशयों में पहुंच गए हैं। विभोर के पंजगाटडा की सतलुज झील में साइबेरिया के परिंदे इन दिनों नीले पानी में अठखेलियां करते दिखाई दे रहे हैं। अभी तक दो से तीन प्रजातियों के परिंदे ही सतलुज झील पर पहुंचे हैं। आने वाले कुछ दिनों में कुछ और प्रजातियों के परिंदों के भी पहुंचने की उम्मीद है। साइबेरिया, रूस, इंडो तिब्बत बॉर्डर पर झीलों के पानी के जम जाने के कारण ये विदेशी परिंदे भारत की झीलों का रुख करते हैं। खासतौर पर हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में स्थित झीलों का पानी जमता नहीं है। इसके चलते इन विदेशी मेहमानों को जलाशयों पर अठखेलियां करने का काफी समय मिल जाता है। सर्दियों का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश की तमाम झीलें इन विदेशी मेहमानों से गुलजार हो जाती हैं। मार्च, अप्रैल में जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू होता है, यह विदेशी मेहमान अपने वतन लौट जाते हैं। इस प्रकार से इन विदेशी मेहमानों का विदेशी धरती से भारत में आवागमन का यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चल रहा है। विभौर की सतलुज झील पर अभी तक साइबेरिया के परिंदे ही पहुंचे हैं। इनमें गैडवाल डक शामिल है। इनमें हिमाचल और पंजाब में परिंदों की विभिन्न प्रजातियों पर काम करने वाले वर्ल्ड वाचर प्रभात भट्टी के अनुसार साइबेरिया के परिंदों का हिमाचल तथा पंजाब में आना शुरू हो चुका है। फरवरी-मार्च के अंत तक पूरी तरह से हिमाचल तथा पंजाब की झीलों पर इन विदेशी परिंदों का कब्जा होगा, जो मार्च के अंत तक रहेगा। इसके बाद सभी विदेशी मेहमान अपने वतन लौट जाएंगे।
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रूस में झीलें जमने से हिमाचल के जलाशयों का करते हैं रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। बिना पासपोर्ट हजारों किलोमीटर का सफर तय करके विदेशी मेहमान हिमाचल और पंजाब के जलाशयों में पहुंच गए हैं। विभोर के पंजगाटडा की सतलुज झील में साइबेरिया के परिंदे इन दिनों नीले पानी में अठखेलियां करते दिखाई दे रहे हैं। अभी तक दो से तीन प्रजातियों के परिंदे ही सतलुज झील पर पहुंचे हैं। आने वाले कुछ दिनों में कुछ और प्रजातियों के परिंदों के भी पहुंचने की उम्मीद है। साइबेरिया, रूस, इंडो तिब्बत बॉर्डर पर झीलों के पानी के जम जाने के कारण ये विदेशी परिंदे भारत की झीलों का रुख करते हैं। खासतौर पर हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में स्थित झीलों का पानी जमता नहीं है। इसके चलते इन विदेशी मेहमानों को जलाशयों पर अठखेलियां करने का काफी समय मिल जाता है। सर्दियों का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश की तमाम झीलें इन विदेशी मेहमानों से गुलजार हो जाती हैं। मार्च, अप्रैल में जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू होता है, यह विदेशी मेहमान अपने वतन लौट जाते हैं। इस प्रकार से इन विदेशी मेहमानों का विदेशी धरती से भारत में आवागमन का यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चल रहा है। विभौर की सतलुज झील पर अभी तक साइबेरिया के परिंदे ही पहुंचे हैं। इनमें गैडवाल डक शामिल है। इनमें हिमाचल और पंजाब में परिंदों की विभिन्न प्रजातियों पर काम करने वाले वर्ल्ड वाचर प्रभात भट्टी के अनुसार साइबेरिया के परिंदों का हिमाचल तथा पंजाब में आना शुरू हो चुका है। फरवरी-मार्च के अंत तक पूरी तरह से हिमाचल तथा पंजाब की झीलों पर इन विदेशी परिंदों का कब्जा होगा, जो मार्च के अंत तक रहेगा। इसके बाद सभी विदेशी मेहमान अपने वतन लौट जाएंगे।