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Una News: बारिश से खेतों में लौटने लगी हरियाली
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गैर सिंचित इलाकों में खराब हो रही फसल भी दोबारा होगी हरी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक लौटा दी। गेहूं और आलू की फसल के लिए यह बारिश वरदान मानी जा रही है। विशेषकर गैर सिंचित इलाकों में फसलें प्रभावित होने लगी थी। बारिश के बाद दोबारा खेत हरे भरे होने की आस जगी है। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल उगाई गई है। जबकि, आलू की फसल 10000 हेक्टेयर जमीन पर तैयार हो रही। इसमें सबसे अधिक फसल गैर सिंचित इलाकों में ही तैयार होती है। मात्र 35 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा से फसलें तैयार होती हैं। गैर सिंचित इलाकों में इस समय गेहूं की फसल तैयार हो रही लेकिन बारिश न होने पर गेहूं की पौध में वृद्धि नहीं हो रही थी। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। वहीं, सिंचाई की कमी के कारण फसलों पर कीटनाशकों और अन्य दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा था। इस बीच मंगलवार शाम को हुई बारिश ने लोगों के चेहरे पर रौनक ला दी। इसके साथ ही आलू की गुड़ाई प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
गैर सिंचित इलाकों फसल को लेकर जद्दोजहद
जिले के गैर सिंचित इलाकों में इस सीजन में फसल को तैयार करने के लिए किसानों की जद्दोजहद जारी है। फसल की बिजाई के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। इसके बाद जनवरी में बारिश हुई तो फसल बच पाई। उसके बाद भी किसानों को बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। किसानों का कहना है कि अगर खाने लायक फसल बच जाए तो उनके लिए काफी होगा।
गेहूं और आलू की फसल के लिए बारिश होना किसी वरदान से कम नहीं। गैर सिंचित इलाकों में अब अच्छे तरीके से फसलें वृद्धि करेंगी। खाद और जरूरी दवाओं के छिड़काव का यह उपयुक्त समय है। फसल के शुरुआती समय में बारिश देरी से हुई। इससे फसल प्रभावित हुई है। बची हुई फसल के लिए भी समय-समय पर सिंचाई मिलना बेहद जरूरी है।
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कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक लौटा दी। गेहूं और आलू की फसल के लिए यह बारिश वरदान मानी जा रही है। विशेषकर गैर सिंचित इलाकों में फसलें प्रभावित होने लगी थी। बारिश के बाद दोबारा खेत हरे भरे होने की आस जगी है। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल उगाई गई है। जबकि, आलू की फसल 10000 हेक्टेयर जमीन पर तैयार हो रही। इसमें सबसे अधिक फसल गैर सिंचित इलाकों में ही तैयार होती है। मात्र 35 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा से फसलें तैयार होती हैं। गैर सिंचित इलाकों में इस समय गेहूं की फसल तैयार हो रही लेकिन बारिश न होने पर गेहूं की पौध में वृद्धि नहीं हो रही थी। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। वहीं, सिंचाई की कमी के कारण फसलों पर कीटनाशकों और अन्य दवाओं का छिड़काव नहीं हो रहा था। इस बीच मंगलवार शाम को हुई बारिश ने लोगों के चेहरे पर रौनक ला दी। इसके साथ ही आलू की गुड़ाई प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
गैर सिंचित इलाकों फसल को लेकर जद्दोजहद
जिले के गैर सिंचित इलाकों में इस सीजन में फसल को तैयार करने के लिए किसानों की जद्दोजहद जारी है। फसल की बिजाई के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। इसके बाद जनवरी में बारिश हुई तो फसल बच पाई। उसके बाद भी किसानों को बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। किसानों का कहना है कि अगर खाने लायक फसल बच जाए तो उनके लिए काफी होगा।
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गेहूं और आलू की फसल के लिए बारिश होना किसी वरदान से कम नहीं। गैर सिंचित इलाकों में अब अच्छे तरीके से फसलें वृद्धि करेंगी। खाद और जरूरी दवाओं के छिड़काव का यह उपयुक्त समय है। फसल के शुरुआती समय में बारिश देरी से हुई। इससे फसल प्रभावित हुई है। बची हुई फसल के लिए भी समय-समय पर सिंचाई मिलना बेहद जरूरी है।
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कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग