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Una News: गगरेट में लावारिस पशुओं की भरमार, आए दिन हो रहे हादसे<bha>;</bha> फसलें कर रहे तबाह

Sun, 29 Sep 2024 01:54 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sun, 29 Sep 2024 01:54 AM IST
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Gagret is full of abandoned animals, accidents are happening every day; crops are being destroyed
बंगाणा क्षेत्र में जगंली जानवरों ने खराब की मक्की की फसल। संवाद
बूढ़े होने व दूध न देने पर सड़कों पर छोड़े जा रहे पशु
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ट्रैक्टरों के प्रचलन के चलते किसानों ने बैलों से खेती करना छोड़ी

संवाद न्यूज एजेंसी

घनारी (ऊना)। गगरेट क्षेत्र के लगभग सभी मुख्य एवं संपर्क सड़क मार्गों पर इन दिनों लावारिस पशुओं की भरमार है। यह पशु किसानों की फसलों को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं। इसके साथ ही पशुओं की चपेट में आने से आए दिन छोटे और बड़े हादसे पेश आते हैं।
इन हादसों में कई लोग अंगहीन हो गए और कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। करीब दो माह पूर्व मवा कहोलां में पंजाब से दोपहिया वाहन पर सवार होकर गगरेट में माथा टेकने आते पति-पत्नी भी लावारिस गोवंश के साथ हुई दुर्घटना से मौत के आगोश में समा गए। क्षेत्र में इतनी अधिक संख्या में गोवंश के होने के पीछे, जहां क्षेत्रवासियों द्वारा अपने बूढ़े पशुओं को सड़कों पर छोड़ देना मुख्य कारण है। दूसरी ओर क्षेत्र का पंजाब के बॉर्डर के साथ सटा होना भी एक कारण है। वहां के लोग भी अकसर रात के अंधेरे में पशुओं को ट्रकों में लादकर पांवड़ा थप्पलां, आशा देवी मंदिर, सलोह बेरी तथा मरवाड़ी आदि बॉर्डर से सटे इलाकों में छोड़ते हुए देखे गए हैं। वहीं, आधुनिक खेती के चलते अब जुताई के लिए ट्रैक्टरों के प्रचलन से बैल किसानों के लिए बेकार हो गए हैं, जिससे सड़कों पर इनकी संख्या अधिक हो गई है।
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पशुओं को लावारिस छोड़ने पर जुर्माना भी कम
ग्राम पंचायत गणु मंदवाडा के पूर्व प्रधान बलविंदर सिंह ने बताया कि वैसे तो गगरेट क्षेत्र में करीब दर्जन भर से भी अधिक गौशालाएं हैं, लेकिन इनमें से मात्र एक दो गोशाला ही सफलतम चल रही हैं। इसके लिए उन्होंने पैसे की कमी और सरकार द्वारा गोशाला के संचालन के लिए प्रतिदिन का हिसाब से लेकर सख्त ऑडिट तक को कारण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले लोगों को किए जाने वाले जुर्माने की राशि को मात्र 500 से 1000 रुपये तक ही तय किया हुआ, जो कि नाकाफी है, क्योंकि ग्रामीण 500 या 1000 रुपये तो देने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन बिना दूध वाले पशु को अपने पास नहीं रखना चाहते।
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समाजसेवी संस्थाओं से गोशालाओं को चलाने का आग्रह
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल गुलेरिया ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गठित गोसेवा आयोग उनके विभाग के माध्यम से छह माह से ऊपर के तीस की मात्रा से अधिक पशुओं की गोशालाओं को 700 रुपए प्रति गोवंश प्रतिमाह अनुदान देता है। उनके क्षेत्र में सफलतम गोशाला अंबोआ की है। जहां 130 पशु हैं, जबकि चलेट, सलोह बेरी, बवेहड़ तथा नकडोह की गोशालाएं पिछले लम्बे अरसे से संचालन में नहीं हैं। उन्होंने कई समाजसेवी संस्थाओं से आग्रह भी किया है कि आगे आएं और इन चारों गोशालाओं को चलाएं।
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