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Una News: गोबिंदसागर झील में फिर खुला मछली का व्यापार
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गोबिंदसागर झील से निकली गई मछली ।स्रोत :विभाग
- फोटो : संवाद
पहले दिन 22 क्विंटल मछली निकाली
बरसात में डेढ़ माह तक बंद रखी गई थी प्रक्रिया
विशेषज्ञों और मछुआरों को इस सीजन में बंपर व्यापार की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा। डेढ़ माह के प्रतिबंध के बाद गोबिंदसागर झील में मछली का व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया। पहले ही दिन लगभग 22 क्विंटल मछली पकड़ी गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 30 क्विंटल रहा था। मत्स्य विभाग के अनुसार झील में पानी की अधिकता के कारण शुरुआती उत्पादन थोड़ा कम रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में बंपर व्यापार की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल है और जलस्तर भी बेहतर है, जिससे मछली उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है। गोबिंदसागर झील हिमाचल प्रदेश का प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्र है, जहां से हर वर्ष हजारों क्विंटल मछली प्राप्त होती है। कुटलैहड़ क्षेत्र के लठियाणी, रायपुर और बीहड़ू इलाकों ने भी मछली प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान बना ली है। यहां रोजाना सैकड़ों लोग ताजी मछली का स्वाद लेने पहुंचते हैं।
गोबिंदसागर झील लंबे समय से प्रदेश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्रों में शुमार है। यहां हर साल रोहू, कतला, मृगल और झींगा जैसी प्रजातियों की मछली पकड़ी जाती है। इस बार जलस्तर में वृद्धि और स्वच्छ जलवायु ने मछलियों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में 22 क्विंटल मछली पकड़ी गई है, यह बड़े उत्पादन का संकेत है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि पिछले वर्ष उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा था, लेकिन इस बार प्रकृति ने उनका साथ दिया है। बड़ी मात्रा में मछली पकड़ने से न केवल मछुआरों की आय बढ़ेगी, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। मछली व्यापार यहां के लोगों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है।
लठियाणी, रायपुर और बीहड़ू मछली के स्वाद की पहचान
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के लाठियाणी, रायपुर और बीहड़ू गांव अब मछली के स्वाद के लिए विशेष पहचान बना चुके हैं। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर ताजी और स्वादिष्ट मछली का लुत्फ उठाते हैं। केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। यहां की मछली का स्वाद इतना लोकप्रिय हो चुका है कि धीरे-धीरे यह एक स्थानीय ब्रांड के रूप में पहचाना जाने लगा है।
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बरसात में डेढ़ माह तक बंद रखी गई थी प्रक्रिया
विशेषज्ञों और मछुआरों को इस सीजन में बंपर व्यापार की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा। डेढ़ माह के प्रतिबंध के बाद गोबिंदसागर झील में मछली का व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया। पहले ही दिन लगभग 22 क्विंटल मछली पकड़ी गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 30 क्विंटल रहा था। मत्स्य विभाग के अनुसार झील में पानी की अधिकता के कारण शुरुआती उत्पादन थोड़ा कम रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में बंपर व्यापार की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल है और जलस्तर भी बेहतर है, जिससे मछली उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना है। गोबिंदसागर झील हिमाचल प्रदेश का प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्र है, जहां से हर वर्ष हजारों क्विंटल मछली प्राप्त होती है। कुटलैहड़ क्षेत्र के लठियाणी, रायपुर और बीहड़ू इलाकों ने भी मछली प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान बना ली है। यहां रोजाना सैकड़ों लोग ताजी मछली का स्वाद लेने पहुंचते हैं।
गोबिंदसागर झील लंबे समय से प्रदेश के प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्रों में शुमार है। यहां हर साल रोहू, कतला, मृगल और झींगा जैसी प्रजातियों की मछली पकड़ी जाती है। इस बार जलस्तर में वृद्धि और स्वच्छ जलवायु ने मछलियों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में 22 क्विंटल मछली पकड़ी गई है, यह बड़े उत्पादन का संकेत है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि पिछले वर्ष उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहा था, लेकिन इस बार प्रकृति ने उनका साथ दिया है। बड़ी मात्रा में मछली पकड़ने से न केवल मछुआरों की आय बढ़ेगी, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं को भी इसका लाभ मिलेगा। मछली व्यापार यहां के लोगों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है।
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लठियाणी, रायपुर और बीहड़ू मछली के स्वाद की पहचान
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के लाठियाणी, रायपुर और बीहड़ू गांव अब मछली के स्वाद के लिए विशेष पहचान बना चुके हैं। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर ताजी और स्वादिष्ट मछली का लुत्फ उठाते हैं। केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। यहां की मछली का स्वाद इतना लोकप्रिय हो चुका है कि धीरे-धीरे यह एक स्थानीय ब्रांड के रूप में पहचाना जाने लगा है।
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