{"_id":"6815fe5d37d7b63b1e0a2435","slug":"fire-destroyed-wheat-crop-in-1000-kanal-land-strong-winds-turned-it-into-ghee-una-news-c-93-1-ssml1048-152926-2025-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: आग ने बर्बाद की 1000 कनाल भूमि में गेहूं की फसल, तेज हवाओं ने किया घी का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: आग ने बर्बाद की 1000 कनाल भूमि में गेहूं की फसल, तेज हवाओं ने किया घी का काम
विज्ञापन
खराब मौसम के खलल से गेहूं की कटाई प्रभावित
सरकार के खरीद केंद्रों में भी बेहद कम मात्रा में पहुंचा गेहूं
जिले में लगातार तीसरे दिन मौसम खराब, गेहूं की कटाई अंतिम चरण में
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में गेहूं की कटाई अंतिम चरण में है। लगातार खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान जल्दबाजी में फसल समेट रहे हैं। इस बार खड़ी फसल में आग की घटनाओं ने भी कहर बरपाया है। करीब 1000 कनाल भूमि पर तैयार गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। आग की घटनाओं के समय तेज हवाओं ने घी का काम किया। इससे आग तेजी से भड़की। इन घटनाओं में विद्युत बोर्ड की लापरवाही भी सामने आई। अधिकतर घटनाएं विद्युत तारों में स्पार्किंग से हुईं। वहीं, वीरवार से खराब चल रहे मौसम ने किसानों को चिंता में डाला हुआ है। लोग किसी तरह थ्रेशिंग कर फसल को घर पहुंचाने की जुगत में लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले के हरोली, ऊना, अंब और गगरेट क्षेत्र में सबसे अधिक गेहूं की फसल आग की चपेट में आई। हरोली के पंडोगा, घालूवाल, टाहलीवाल, बंगाणा के टक्का, बसाल, अंब के नंदपुर, टकारला, कुनेरन, गोंदपुर बनेहड़ा, गगरेट सहित अन्य इलाकों में आग की घटनाएं हुई हैं। करीब 200 किसानों को नुकसान हुआ है। पंडोगा में करीब 300 कनाल, कुनेरन, गोंदपुर बनेहड़ा व कैलाशनगर में 250 कनाल, गगरेट में 300 कनाल, टक्का में करीब 80 कनाल भूमि पर खड़ी फसल को आग ने तबाह कर दिया। अन्य इलाकों में 10 से 30 कनाल भूमि पर आग से फसल को नुकसान पहुंचा है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को नुकसान का आकलन बनाकर दिया है लेकिन किसानों को राहत मिलती है या नहीं, स्थिति स्पष्ट नहीं है।
गेहूं की फसल को दूसरी मार मौसम की रही। कटाई का सीजन बैसाखी यानी 13 अप्रैल के आसपास शुरू होना था। खराब मौसम के कारण एक सप्ताह देरी से 20 अप्रैल के आसपास कटाई शुरू हुई। उस समय तक फसल आवश्यकता से अधिक पक गई। कटाई के दौरान फसल के दाने झड़कर गिरने लगे। इसका असर पैदावार पर हुआ। किसानों को कटाई के लिए एक सप्ताह का समय मिला। उसके बाद दोबारा मौसम बिगड़ना शुरू हो गया। तेज हवाओं के बीच थ्रेशिंग करवाई गई। तूड़ी का नुकसान अलग से हुआ। वर्तमान में भी यही स्थिति बनी हुई है और किसान तूड़ी छोड़, फसल के दाने समेटना बेहतर मान रहे।
विज्ञापन
मशीन से कटाई की ओर किसानों का रुख
गेहूं की कटाई की मजदूरी प्रति कनाल 1000 रुपये के आसपास पहुंचने से किसानों का रुख अब मशीन से कटाई की ओर बढ़ा है। आधे दाम और कम समय के भीतर कटाई करवाई गई। बड़े खेतों में कंबाइन मशीन और छोटों में हैंड रीपर, मिनी रीपर, ट्रैक्टर-चालित रीपर का इस्तेमाल किया गया।
अभी तक 17 किसानों ने बेची 1020 क्विंटल फसल
जिले में एपीएमसी की ओर से बनाए गए दो खरीद केंद्रों में फसल की आमद बेहद कम हुई है। वीरवार तक 1024 क्विंटल फसल बेची जा चुकी है। यह फसल 17 किसानों ने बेची। एपीएमसी सचिव भूपेंद्र सिंह का कहना है कि अभी किसानों का ध्यान फसल की थ्रेशिंग कर उसे घर लेकर जाने पर है। आने वाले दिनों में आमद बढ़ सकती है। कई किसान निजी व्यापारियों को भी फसल बेच रहे हैं। जबकि कइयों ने कुछ माह रुककर फसल बेचने की योजना तैयार की।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं की फसल को मौसम और आग ने प्रभावित किया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा अवश्य करवाएं ताकि फसल को नुकसान जैसी स्थिति में उसकी भरपाई हो सके।
विज्ञापन
सरकार के खरीद केंद्रों में भी बेहद कम मात्रा में पहुंचा गेहूं
जिले में लगातार तीसरे दिन मौसम खराब, गेहूं की कटाई अंतिम चरण में
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में गेहूं की कटाई अंतिम चरण में है। लगातार खराब मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान जल्दबाजी में फसल समेट रहे हैं। इस बार खड़ी फसल में आग की घटनाओं ने भी कहर बरपाया है। करीब 1000 कनाल भूमि पर तैयार गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। आग की घटनाओं के समय तेज हवाओं ने घी का काम किया। इससे आग तेजी से भड़की। इन घटनाओं में विद्युत बोर्ड की लापरवाही भी सामने आई। अधिकतर घटनाएं विद्युत तारों में स्पार्किंग से हुईं। वहीं, वीरवार से खराब चल रहे मौसम ने किसानों को चिंता में डाला हुआ है। लोग किसी तरह थ्रेशिंग कर फसल को घर पहुंचाने की जुगत में लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले के हरोली, ऊना, अंब और गगरेट क्षेत्र में सबसे अधिक गेहूं की फसल आग की चपेट में आई। हरोली के पंडोगा, घालूवाल, टाहलीवाल, बंगाणा के टक्का, बसाल, अंब के नंदपुर, टकारला, कुनेरन, गोंदपुर बनेहड़ा, गगरेट सहित अन्य इलाकों में आग की घटनाएं हुई हैं। करीब 200 किसानों को नुकसान हुआ है। पंडोगा में करीब 300 कनाल, कुनेरन, गोंदपुर बनेहड़ा व कैलाशनगर में 250 कनाल, गगरेट में 300 कनाल, टक्का में करीब 80 कनाल भूमि पर खड़ी फसल को आग ने तबाह कर दिया। अन्य इलाकों में 10 से 30 कनाल भूमि पर आग से फसल को नुकसान पहुंचा है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को नुकसान का आकलन बनाकर दिया है लेकिन किसानों को राहत मिलती है या नहीं, स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन
गेहूं की फसल को दूसरी मार मौसम की रही। कटाई का सीजन बैसाखी यानी 13 अप्रैल के आसपास शुरू होना था। खराब मौसम के कारण एक सप्ताह देरी से 20 अप्रैल के आसपास कटाई शुरू हुई। उस समय तक फसल आवश्यकता से अधिक पक गई। कटाई के दौरान फसल के दाने झड़कर गिरने लगे। इसका असर पैदावार पर हुआ। किसानों को कटाई के लिए एक सप्ताह का समय मिला। उसके बाद दोबारा मौसम बिगड़ना शुरू हो गया। तेज हवाओं के बीच थ्रेशिंग करवाई गई। तूड़ी का नुकसान अलग से हुआ। वर्तमान में भी यही स्थिति बनी हुई है और किसान तूड़ी छोड़, फसल के दाने समेटना बेहतर मान रहे।
विज्ञापन
मशीन से कटाई की ओर किसानों का रुख
गेहूं की कटाई की मजदूरी प्रति कनाल 1000 रुपये के आसपास पहुंचने से किसानों का रुख अब मशीन से कटाई की ओर बढ़ा है। आधे दाम और कम समय के भीतर कटाई करवाई गई। बड़े खेतों में कंबाइन मशीन और छोटों में हैंड रीपर, मिनी रीपर, ट्रैक्टर-चालित रीपर का इस्तेमाल किया गया।
अभी तक 17 किसानों ने बेची 1020 क्विंटल फसल
जिले में एपीएमसी की ओर से बनाए गए दो खरीद केंद्रों में फसल की आमद बेहद कम हुई है। वीरवार तक 1024 क्विंटल फसल बेची जा चुकी है। यह फसल 17 किसानों ने बेची। एपीएमसी सचिव भूपेंद्र सिंह का कहना है कि अभी किसानों का ध्यान फसल की थ्रेशिंग कर उसे घर लेकर जाने पर है। आने वाले दिनों में आमद बढ़ सकती है। कई किसान निजी व्यापारियों को भी फसल बेच रहे हैं। जबकि कइयों ने कुछ माह रुककर फसल बेचने की योजना तैयार की।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि गेहूं की फसल को मौसम और आग ने प्रभावित किया है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा अवश्य करवाएं ताकि फसल को नुकसान जैसी स्थिति में उसकी भरपाई हो सके।