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जिला में औषधीय पौधों की खेती से जुड़ रहे किसान

Thu, 17 Jun 2021 10:48 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 10:48 PM IST
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Farmers joining the cultivation of medicinal plants in the district, Aloe vera, Tulsi and Ashwagandha are being cultivated on 50 hectares of land, Ayurveda department is giving subsidy for the cultivation of medicinal plants
ऊना। जिला में किसान औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं। इन पौधों की खेती के लिए आयुर्वेद विभाग की तरफ से किसानों को जागरूक करने के साथ सबसिडी प्रदान की जा रही है। कोरोना काल के पहले जिला में करीब चार हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती होती थी। वर्तमान समय में करीब 50 हेक्टेयर भूमि पर औषधीय पौधों की खेती शुरू हो गई है। कोरोना काल में बढ़ी औषधीय पौधों की मांग को देखते हुए जिला में भी किसानों ने औषधीय पौधों की खेती करना शुरू की दी है। जिला में एलोवेरा, तुलसी, अश्वगंधा, सर्पगंध, शतावर व स्टीविया की खेती की जा रही है। इसके अलावा औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद विभाग पौध तैयार करने के लिए किसानों की नर्सरी करने में मदद कर रहा है। पौध तैयार होने पर उन्हें बेचने के लिए किसानों की मदद की जा रही है। इस संबंध में राज्य औषधीय पौध बोर्ड के जिला ऊना के नोडल अधिकारी डॉ. नरेश ने बताया कि औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जा रहा है। औषधीय पौधों की खेती के लिए किसान भी रुचि दिखा रहे हैं। औषधीय पौधों को लगाने के लिए आयुर्वेद विभाग शतावर व सर्पगंध के लिए 50 प्रतिशत सबसिडी प्रदान कर रहा है। इसके अलावा अश्वगंधा, तुलसी व स्टीविया की पौध लगाने पर 30 प्रतिशत सबसिडी मिलती है।
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कोरोना काल में बढ़े तुलसी और अश्वगंधा के दाम
आयुर्वेद विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोरोना काल से पूर्व तुलसी पत्ते की बाजार में कीमत 60 से 80 रुपये प्रति किलो थी। कोरोना काल के दौरान तुलसी पत्तों की कीमत 700 से 800 रुपये प्रति किलो भी रही। वर्तमान समय में 400 से 500 रुपये प्रति किलो तुलसी पत्ता बिक रहा है। वहीं अश्वगंधा की जड़ भी 250 से 300 रुपये प्रति किलो चल रही है जबकि कोरोना से पूर्व इसके दाम 100 से 200 रुपये प्रति किलो रहेे।
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घनारी में 40 कनाल भूमि पर एलोवेरा की खेती
जिला के घनारी तहसील के तहत घनारी गांव में रजनीश पराशर ने 40 कनाल भूमि पर एलोवेरा की खेती की है। उनका एलोवेरा का उत्पाद पूरी तरह से तैयार है। आयुर्वेद विभाग की तरफ से रजनीश पराशर की मदद की गई है। निजी कंपनियां एलोवेरा की पौध खरीदने के लिए संपर्क कर रही हैं।
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बेहड़ जसवां में तुलसी, अश्वगंधा की पौध तैयार
अंब उपमंडल के तहत बेहड़ जसवां क्षेत्र में रेवा सूद तुलसी, अश्वगंधा की पौध तैयार कर रही हैं। इसके लिए आयुर्वेद विभाग विभाग औषधीय पौधों को तैयार करने के लिए मदद कर रहा है। इसके अलावा सबसिडी भी मुहैया करवाई जा रही है।
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