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Una News: भारी बारिश से किसान परेशान, मक्की और आलू की फसल पर दोहरी मार
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खेतो में ख़डी मक्का की फसल पूरी तरह बर्बाद। संवाद
धूप न खिलने से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
किसानों ने आलू की बुवाई के लिए बीज की कर रखी थी पहले से खरीद
मौसम खराब रहने से बुवाई नहीं हो पाई शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। लगातार भारी बरसात से किसानों की मक्की की फसल बर्बाद हो रही है। खेतों में खड़ी मक्की सड़ गई, जबकि काटकर रखे दाने नमी के कारण काले पड़ गए। धूप न निकलने से मेहनत पर पानी फिर गया है। आलू की बुवाई भी रुक गई है, बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि पिछले साल सूखा और इस साल बरसात ने खेती चौपट कर दी। अब वे सरकार से फसल का मुआवजा, बीज व खाद पर राहत और मदद की उम्मीद कर रहे हैं। चक्क के रहने वाले किसान राजेश कुमार ने बताया कि हमने मक्की खेतों से निकाल तो ली थी, लेकिन लगातार नमी और धूप न निकलने से सारे दाने काले पड़ गए हैं। किसान अश्वनी कुमार ने बताया कि खेतों में खड़ी मक्की पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इतनी मेहनत और खर्च करने के बाद भी हमें कुछ हाथ नहीं आया। आलू की बुवाई भी रुक गई है। टकारला से किसान निर्मल सिंह का कहना है कि हमने आलू के बीज पहले ही मंगवा लिए थे, लेकिन मौसम साफ न होने से खेत तैयार नहीं हो पा रहे। बीज खराब होने का डर भी बना हुआ है। दियाडा से किसान श्याम सुंदर बताते है कि पिछले साल सूखे ने परेशान किया था, इस साल बरसात ने सब चौपट कर दिया। सरकार को चाहिए कि किसानों की फसल का उचित मुआवजा दे और बीज व खाद पर राहत प्रदान करे।
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किसानों ने आलू की बुवाई के लिए बीज की कर रखी थी पहले से खरीद
मौसम खराब रहने से बुवाई नहीं हो पाई शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। लगातार भारी बरसात से किसानों की मक्की की फसल बर्बाद हो रही है। खेतों में खड़ी मक्की सड़ गई, जबकि काटकर रखे दाने नमी के कारण काले पड़ गए। धूप न निकलने से मेहनत पर पानी फिर गया है। आलू की बुवाई भी रुक गई है, बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि पिछले साल सूखा और इस साल बरसात ने खेती चौपट कर दी। अब वे सरकार से फसल का मुआवजा, बीज व खाद पर राहत और मदद की उम्मीद कर रहे हैं। चक्क के रहने वाले किसान राजेश कुमार ने बताया कि हमने मक्की खेतों से निकाल तो ली थी, लेकिन लगातार नमी और धूप न निकलने से सारे दाने काले पड़ गए हैं। किसान अश्वनी कुमार ने बताया कि खेतों में खड़ी मक्की पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इतनी मेहनत और खर्च करने के बाद भी हमें कुछ हाथ नहीं आया। आलू की बुवाई भी रुक गई है। टकारला से किसान निर्मल सिंह का कहना है कि हमने आलू के बीज पहले ही मंगवा लिए थे, लेकिन मौसम साफ न होने से खेत तैयार नहीं हो पा रहे। बीज खराब होने का डर भी बना हुआ है। दियाडा से किसान श्याम सुंदर बताते है कि पिछले साल सूखे ने परेशान किया था, इस साल बरसात ने सब चौपट कर दिया। सरकार को चाहिए कि किसानों की फसल का उचित मुआवजा दे और बीज व खाद पर राहत प्रदान करे।