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नैनो यूरिया की बजाय हिमफैड की 50 रुपये महंगी खाद खरीद रहे किसान
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ऊना। इफ्को की बोरी वाली यूरिया खाद जिले में एक बार फिर खत्म हो चुकी है। 28 जनवरी को हिमाचल के लिए इस खाद की करीब 60 हजार बोरियां की बड़ी खेप पहुंची थी। इस खेप से ही ऊना जिले में भी खाद पहुंचाई गई थी। लेकिन, अब दस दिन बाद ही जिले के अधिकतर गोदामों में यह यह खत्म हो चुकी है। बोरी वाली यूरिया खाद उपलब्ध न होने पर किसान इफ्को के नए उत्पाद नैनो यूरिया को भी तरजीह नहीं दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि नैनो यूरिया का इस्तेमाल एक लंबी जटिल प्रक्रिया साबित हो रही है। जिले के किसान नैनो यूरिया न लेकर हिमफैड की खाद महंगे दाम पर लेना उचित समझ रहे हैं।
नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल करीब 240 रुपये में उपलब्ध है। वहीं हिमफैड यूरिया खाद की एक बोरी 290 रुपये के आसपास पड़ती है। इसके बावजूद किसान इफको की बोरी वाली यूरिया न मिलने पर हिमफैड की खाद लेना पसंद कर रहे हैं। किसान मदन लाल का कहना है कि उन्होंने 300 कनाल भूमि में आलू लगाया है। इतनी जमीन के लिए बोरी वाली यूरिया का छिड़काव बेहद आसान है। वहीं नैनो यूरिया का पहले पानी में मिलाकर घोल तैयार करना पड़ता है और फिर इसे स्प्रे पंप में डालकर पूरे खेत में स्प्रे के लिए घूमना पड़ता है। कहा कि बोरी वाली यूरिया का एक स्थान से ही दूर तक छिड़काव किया जा सकता है। वहीं नैनो यूरिया की स्प्रे वहीं तक पहुंचती है जहां तक पंप की क्षमता है। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त मजदूरों को स्प्रे के लिए लगाना पड़ता है और इससे खर्च भी बढ़ता है और समय भी अधिक लगता है।
किसान विनोद कुमार ने अनुसार गेहूं व आलू समेत तमाम फसलें जब बड़ी हो जाती हैं तो उसमें स्प्रे करना एक मुश्किल प्रक्रिया है। बड़ी हो चुकी फसल में बोरी वाली यूरिया का छिड़काव ही एक सरल विकल्प है। बड़ी फसल में स्प्रे पंप लेकर घूमना आसान नहीं है। संवाद
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किसी भी दवाई के साथ करें छिड़काव
इफ्को के ऊना में तैनात बिक्री अधिकारी मोहित शर्मा ने बताया नैनो यूरिया खाद को अलग से छिड़काव करने के बजाय इसे किसी कीटनाशक या उर्वरक के साथ मिलाकर भी स्प्रे किया जा सकता है। गुजरात के एक किसान ने घास खत्म करने वाली दवाई में मिलाकर नैनो यूरिया का छिड़काव किया था, जोकि एक सफल प्रयोग साबित हुआ। एक स्प्रे पंप में किसी भी दवाई के साथ 50 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
अभी करना होगा 20 दिन का इंतजार
बताया जा रहा है कि बोरी वाली इफ्को की यूरिया के लिए अभी 20 दिन तक का इंतजार करना पड़ सकता है। बता दें कि इस समय आलू की फसल के लिए यूरिया खाद की मांग आ रही है। ऐसे समय में खाद का खत्म होना किसानों के लिए परेशानी की वजह बन रहा है। आने वाले दिनों में यह संकट गहरा सकता है।
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नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल करीब 240 रुपये में उपलब्ध है। वहीं हिमफैड यूरिया खाद की एक बोरी 290 रुपये के आसपास पड़ती है। इसके बावजूद किसान इफको की बोरी वाली यूरिया न मिलने पर हिमफैड की खाद लेना पसंद कर रहे हैं। किसान मदन लाल का कहना है कि उन्होंने 300 कनाल भूमि में आलू लगाया है। इतनी जमीन के लिए बोरी वाली यूरिया का छिड़काव बेहद आसान है। वहीं नैनो यूरिया का पहले पानी में मिलाकर घोल तैयार करना पड़ता है और फिर इसे स्प्रे पंप में डालकर पूरे खेत में स्प्रे के लिए घूमना पड़ता है। कहा कि बोरी वाली यूरिया का एक स्थान से ही दूर तक छिड़काव किया जा सकता है। वहीं नैनो यूरिया की स्प्रे वहीं तक पहुंचती है जहां तक पंप की क्षमता है। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त मजदूरों को स्प्रे के लिए लगाना पड़ता है और इससे खर्च भी बढ़ता है और समय भी अधिक लगता है।
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किसान विनोद कुमार ने अनुसार गेहूं व आलू समेत तमाम फसलें जब बड़ी हो जाती हैं तो उसमें स्प्रे करना एक मुश्किल प्रक्रिया है। बड़ी हो चुकी फसल में बोरी वाली यूरिया का छिड़काव ही एक सरल विकल्प है। बड़ी फसल में स्प्रे पंप लेकर घूमना आसान नहीं है। संवाद
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किसी भी दवाई के साथ करें छिड़काव
इफ्को के ऊना में तैनात बिक्री अधिकारी मोहित शर्मा ने बताया नैनो यूरिया खाद को अलग से छिड़काव करने के बजाय इसे किसी कीटनाशक या उर्वरक के साथ मिलाकर भी स्प्रे किया जा सकता है। गुजरात के एक किसान ने घास खत्म करने वाली दवाई में मिलाकर नैनो यूरिया का छिड़काव किया था, जोकि एक सफल प्रयोग साबित हुआ। एक स्प्रे पंप में किसी भी दवाई के साथ 50 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
अभी करना होगा 20 दिन का इंतजार
बताया जा रहा है कि बोरी वाली इफ्को की यूरिया के लिए अभी 20 दिन तक का इंतजार करना पड़ सकता है। बता दें कि इस समय आलू की फसल के लिए यूरिया खाद की मांग आ रही है। ऐसे समय में खाद का खत्म होना किसानों के लिए परेशानी की वजह बन रहा है। आने वाले दिनों में यह संकट गहरा सकता है।