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Una News: पहले से ज्यादा खर्चीला और दिखावटी हुआ चुनाव प्रचार
Sat, 23 May 2026 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 23 May 2026 12:06 AM IST
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बड़ूही (ऊना)। इस बार पंचायत चुनाव का माहौल पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। प्रधान, उपप्रधान, पंच और ब्लॉक समिति सदस्य के चुनाव अब किसी बड़े विधानसभा या लोकसभा चुनावों से कम नहीं दिखाई दे रहे। प्रत्याशी चुनाव प्रचार में आधुनिक तकनीक का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। जहां पहले पंचायत चुनाव में प्रचार घर-घर संपर्क और छोटी बैठकों तक ही सीमित रहता था, वहीं अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रयोग से चुनावी प्रचार पूरी तरह हाईटेक हो चुका है। फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर प्रत्याशियों की आकर्षक पोस्टें और एआई तकनीक से तैयार की गई प्रचार सामग्री लगातार वायरल हो रही है।
गांवों और बाजारों में बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर प्रचार सामग्री देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो किसी विधायक या सांसद का चुनाव चल रहा हो। बैनरों में कहीं सड़क, पानी और सफाई की बात हो रही है तो कहीं युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के हितों को प्राथमिकता देने के दावे किए जा रहे हैं ताकि मतदाता प्रभावित हो सकें। प्रत्याशी सुबह से देर शाम तक लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। गांवों में बैठकों, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क अभियानों का दौर लगातार जारी है। समर्थक भी अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत चुनाव प्रचार भले ही आधुनिक और भव्य हो गया हो लेकिन अंत में जीत उसी प्रत्याशी की होगी जिसने लोगों के बीच रहकर वास्तविक काम किया होगा।
गोपाल कृष्ण शर्मा निवासी टकारला ने कहा कि पहले पंचायत चुनाव बहुत सादगी से होते थे। प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से मिलते थे लेकिन अब सोशल मीडिया और बड़े-बड़े पोस्टरों का जमाना आ गया है। हालांकि जनता अब भी काम करने वाले व्यक्ति को ही महत्व देती है।
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पवन कुमार शर्मा निवासी टकारला का कहना है कि अब चुनाव प्रचार पहले से ज्यादा खर्चीला और दिखावटी हो गया है। गांवों में हर तरफ बैनर और डिजिटल पोस्टर नजर आ रहे हैं लेकिन असली पहचान तो प्रत्याशी के व्यवहार और काम से ही होती है।
टकारला निवासी अनुराग चौहान का कहना है कि सोशल मीडिया के कारण अब युवाओं की चुनावों में रुचि बढ़ी है। एआई से बने पोस्टर और वीडियो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं और प्रत्याशी अपनी बात तेजी से गांव-गांव तक पहुंचा पा रहे हैं।
बड़ूही निवासी देस राज का कहना है कि पंचायत चुनावों में तकनीक का इस्तेमाल अच्छी बात है लेकिन मतदाताओं को केवल प्रचार देखकर नहीं बल्कि प्रत्याशी के पुराने कार्यों को देखकर वोट देना चाहिए।
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गांवों और बाजारों में बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर प्रचार सामग्री देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो किसी विधायक या सांसद का चुनाव चल रहा हो। बैनरों में कहीं सड़क, पानी और सफाई की बात हो रही है तो कहीं युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के हितों को प्राथमिकता देने के दावे किए जा रहे हैं ताकि मतदाता प्रभावित हो सकें। प्रत्याशी सुबह से देर शाम तक लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। गांवों में बैठकों, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क अभियानों का दौर लगातार जारी है। समर्थक भी अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पंचायत चुनाव प्रचार भले ही आधुनिक और भव्य हो गया हो लेकिन अंत में जीत उसी प्रत्याशी की होगी जिसने लोगों के बीच रहकर वास्तविक काम किया होगा।
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गोपाल कृष्ण शर्मा निवासी टकारला ने कहा कि पहले पंचायत चुनाव बहुत सादगी से होते थे। प्रत्याशी घर-घर जाकर लोगों से मिलते थे लेकिन अब सोशल मीडिया और बड़े-बड़े पोस्टरों का जमाना आ गया है। हालांकि जनता अब भी काम करने वाले व्यक्ति को ही महत्व देती है।
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पवन कुमार शर्मा निवासी टकारला का कहना है कि अब चुनाव प्रचार पहले से ज्यादा खर्चीला और दिखावटी हो गया है। गांवों में हर तरफ बैनर और डिजिटल पोस्टर नजर आ रहे हैं लेकिन असली पहचान तो प्रत्याशी के व्यवहार और काम से ही होती है।
टकारला निवासी अनुराग चौहान का कहना है कि सोशल मीडिया के कारण अब युवाओं की चुनावों में रुचि बढ़ी है। एआई से बने पोस्टर और वीडियो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं और प्रत्याशी अपनी बात तेजी से गांव-गांव तक पहुंचा पा रहे हैं।
बड़ूही निवासी देस राज का कहना है कि पंचायत चुनावों में तकनीक का इस्तेमाल अच्छी बात है लेकिन मतदाताओं को केवल प्रचार देखकर नहीं बल्कि प्रत्याशी के पुराने कार्यों को देखकर वोट देना चाहिए।