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भारी बारिश का असर : मंडी में दाम दोगुने, खरीदारी आधी
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कारोबार
बरसात से टूटा सब्ज़ी सप्लाई का पहिया, कीमतों में आग
स्थानीय स्तर पर तैयार मौसमी सब्ज़ियां भी खेतों में नष्ट
पंजाब में आई बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में सड़कों के बंद होने से बाहरी सप्लाई चरमराई
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं और हरी सब्ज़ियां खरीदना अब आम जनता के लिए किसी लक्ज़री से कम नहीं रह गया। दो-तीन किलो सब्ज़ी खरीदने वाले लोग अब मुश्किल से आधा किलो लेकर लौट रहे हैं। इस समय मंडी में मटर 240 रुपये किलो, गोभी 160 रुपये किलो, शिमला मिर्च 120 रुपये किलो, रामतोरी और घीया 80 रुपये किलो, मीटर फली और करेला 60 रुपये किलो, जबकि कद्दू 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। खेतों में तैयार स्थानीय मौसमी सब्ज़ियां भी बारिश से नष्ट हो गई हैं। पंजाब में आई बाढ़ और पहाड़ी सड़कों के बंद होने से बाहरी सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। पहले जहां ज़्यादातर घरों में सब्ज़ियां स्थानीय स्तर पर तैयार हो जाती थीं, इस बार लोगों को महंगे दामों पर बाज़ार से खरीदनी पड़ रही हैं। ग्राहक कम मात्रा में खरीद रहे हैं तो दुकानदारों को भी सब्ज़ियां न बिकने पर खराब होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडियों से सब्ज़ी लाना बेहद मुश्किल हो गया है। रास्ते बंद हैं और पंजाब से गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पा रहीं। हिमाचल के ऊपरी इलाकों से भी सप्लाई रुक गई है। थोड़ी-बहुत स्थानीय सब्ज़ी ही मंडी तक आ रही है। मजबूरी में महंगे दामों पर बेचना पड़ रहा है, जिस पर ग्राहक गुस्सा निकालते हैं, लेकिन हम भी लाचार हैं। -सब्ज़ी विक्रेता राहुल सिंह
पहले रोज़ाना 30–35 किलो सब्ज़ियां आराम से बिक जाती थीं। अब मुश्किल से 10–15 किलो ही बिक रही हैं। बिक्री आधी हो जाने से मुनाफे की जगह घाटा उठाना पड़ रहा है। महंगाई के कारण ग्राहक किलो के बजाय आधा किलो ही ले जा रहे हैं।- बड़ूही के दुकानदार सुखदेब सिंह
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महंगाई ने घर का चूल्हा तक ठंडा कर दिया है। पहले 200 रुपये में हफ्तेभर का काम चल जाता था, अब 500 रुपये भी कम पड़ रहे हैं। मजबूरी में सब्ज़ियां कम लेनी पड़ रही हैं। कई बार तो सब्ज़ी खाने का मन ही नहीं करता, कमाई कम है और खर्च ज्यादा। -चौकीमन्यार निवासी अनीता कुमारी
बच्चों की पसंद की सब्ज़ियां खरीदना तो दूर, अब तो केवल ज़रूरत भर का ही सामान ले पा रहे हैं। इनकम कम है और खर्च बढ़ रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। -बड़ूही की गृहणी रेणु बाला
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बरसात से टूटा सब्ज़ी सप्लाई का पहिया, कीमतों में आग
स्थानीय स्तर पर तैयार मौसमी सब्ज़ियां भी खेतों में नष्ट
पंजाब में आई बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में सड़कों के बंद होने से बाहरी सप्लाई चरमराई
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सब्ज़ियों के दाम आसमान छू रहे हैं और हरी सब्ज़ियां खरीदना अब आम जनता के लिए किसी लक्ज़री से कम नहीं रह गया। दो-तीन किलो सब्ज़ी खरीदने वाले लोग अब मुश्किल से आधा किलो लेकर लौट रहे हैं। इस समय मंडी में मटर 240 रुपये किलो, गोभी 160 रुपये किलो, शिमला मिर्च 120 रुपये किलो, रामतोरी और घीया 80 रुपये किलो, मीटर फली और करेला 60 रुपये किलो, जबकि कद्दू 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। खेतों में तैयार स्थानीय मौसमी सब्ज़ियां भी बारिश से नष्ट हो गई हैं। पंजाब में आई बाढ़ और पहाड़ी सड़कों के बंद होने से बाहरी सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। पहले जहां ज़्यादातर घरों में सब्ज़ियां स्थानीय स्तर पर तैयार हो जाती थीं, इस बार लोगों को महंगे दामों पर बाज़ार से खरीदनी पड़ रही हैं। ग्राहक कम मात्रा में खरीद रहे हैं तो दुकानदारों को भी सब्ज़ियां न बिकने पर खराब होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडियों से सब्ज़ी लाना बेहद मुश्किल हो गया है। रास्ते बंद हैं और पंजाब से गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पा रहीं। हिमाचल के ऊपरी इलाकों से भी सप्लाई रुक गई है। थोड़ी-बहुत स्थानीय सब्ज़ी ही मंडी तक आ रही है। मजबूरी में महंगे दामों पर बेचना पड़ रहा है, जिस पर ग्राहक गुस्सा निकालते हैं, लेकिन हम भी लाचार हैं। -सब्ज़ी विक्रेता राहुल सिंह
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पहले रोज़ाना 30–35 किलो सब्ज़ियां आराम से बिक जाती थीं। अब मुश्किल से 10–15 किलो ही बिक रही हैं। बिक्री आधी हो जाने से मुनाफे की जगह घाटा उठाना पड़ रहा है। महंगाई के कारण ग्राहक किलो के बजाय आधा किलो ही ले जा रहे हैं।- बड़ूही के दुकानदार सुखदेब सिंह
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महंगाई ने घर का चूल्हा तक ठंडा कर दिया है। पहले 200 रुपये में हफ्तेभर का काम चल जाता था, अब 500 रुपये भी कम पड़ रहे हैं। मजबूरी में सब्ज़ियां कम लेनी पड़ रही हैं। कई बार तो सब्ज़ी खाने का मन ही नहीं करता, कमाई कम है और खर्च ज्यादा। -चौकीमन्यार निवासी अनीता कुमारी
बच्चों की पसंद की सब्ज़ियां खरीदना तो दूर, अब तो केवल ज़रूरत भर का ही सामान ले पा रहे हैं। इनकम कम है और खर्च बढ़ रहा है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, वरना हालात और बिगड़ेंगे। -बड़ूही की गृहणी रेणु बाला