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Una News: मक्की की अगेती फसल पर फिरा पानी, आलू की बिजाई लटकी
Tue, 26 Aug 2025 08:14 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 26 Aug 2025 08:14 PM IST
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कोई तालाब जा डैम नही ...........ऊनाऊना के लाल सिंगी में आलककी बिजाई के लिए तैयार खेतों में खडा़
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खेतों में तोड़कर रखी फसल सड़ने और खड़ी फसल भी हो रही बर्बाद
क्षेत्र में मूसलाधार बारिश अब फसलों के लिए साबित हो रही जहर
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मौसम कृषि के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं है। एक ओर मक्की की अगेती फसल खेतों में सड़ रही है तो दूसरी और आलू की दो माह वाली फसल की बिजाई भी लटक गई। अगेती मक्की की तुड़ाई इस समय जोरों पर है, लेकिन बारिश ने किसानों को घर बैठने को मजबूर कर दिया। दूसरी ओर सितंबर की शुरुआत में होने वाली आलू की बिजाई 10 दिन देरी से हो पाएगी। वह भी तभी संभव है अगर आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है।
जानकारी के अनुसार अगेती मक्की की 80 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी है। किसानों ने अभी तुड़ाई आरंभ ही की थी, इस बीच बारिश शुरू हो गई। बारिश का यह दौर बीते दिनों से लगातार जारी है। अधिकतम दो दिन मौसम साफ रहने के बाद दोबारा बारिश होना लगभग नियमित है। इससे किसानों को मक्की की तुड़ाई करने का मौका ही नहीं मिल पा रहा। दूसरी ओर मक्की की पारंपरिक फसल भी मौसम की भेंट चढ़ गई। कुछेक इलाकों को छोड़कर सभी जगह फसल जलभराव और पानी के कटाव से बर्बाद हो चुकी है।
दूसरी ओर आलू की दो माह वाली फसल के लिए किसान बीज खरीद भी नहीं कर पाए। किसानों का कहना है कि इस समय जमीन से पानी रिसने लगा है। रेतीली जमीन तो एक सप्ताह मौसम साफ रहने पर भी बिजाई के लिए तैयार हो सकती है लेकिन मिट्टी वाली जमीन में कम से कम 15 दिन नमी सूखने में लगेंगे। किसानों ने कहा कि इस बार कई इलाकों में आलू की बिजाई ही नहीं हो पाएगी। नवंबर में सीधा गेहूं की बिजाई करनी पड़ेगी। बता दें कि ऊना में करीब 2000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की दो माह वाली फसल तैयार होती है। जबकि मक्की की अगेती और पारंपरिक खेती करीब 25000 हेक्टेयर में होती है।
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उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि मक्की की फसल को बारिश से काफी नुकसान हुआ है। वहीं पर्याप्त धूप नहीं मिलने से भी उत्पादन पर असर होना निश्चित है। कहा कि आलू की बिजाई के लिए उपयुक्त नमी जरूरी है। अत्यधिक नमी में बीज सड़ने लगता है। मौसम साफ होने और नमी कम होने का इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प है।
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क्षेत्र में मूसलाधार बारिश अब फसलों के लिए साबित हो रही जहर
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मौसम कृषि के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं है। एक ओर मक्की की अगेती फसल खेतों में सड़ रही है तो दूसरी और आलू की दो माह वाली फसल की बिजाई भी लटक गई। अगेती मक्की की तुड़ाई इस समय जोरों पर है, लेकिन बारिश ने किसानों को घर बैठने को मजबूर कर दिया। दूसरी ओर सितंबर की शुरुआत में होने वाली आलू की बिजाई 10 दिन देरी से हो पाएगी। वह भी तभी संभव है अगर आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है।
जानकारी के अनुसार अगेती मक्की की 80 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी है। किसानों ने अभी तुड़ाई आरंभ ही की थी, इस बीच बारिश शुरू हो गई। बारिश का यह दौर बीते दिनों से लगातार जारी है। अधिकतम दो दिन मौसम साफ रहने के बाद दोबारा बारिश होना लगभग नियमित है। इससे किसानों को मक्की की तुड़ाई करने का मौका ही नहीं मिल पा रहा। दूसरी ओर मक्की की पारंपरिक फसल भी मौसम की भेंट चढ़ गई। कुछेक इलाकों को छोड़कर सभी जगह फसल जलभराव और पानी के कटाव से बर्बाद हो चुकी है।
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दूसरी ओर आलू की दो माह वाली फसल के लिए किसान बीज खरीद भी नहीं कर पाए। किसानों का कहना है कि इस समय जमीन से पानी रिसने लगा है। रेतीली जमीन तो एक सप्ताह मौसम साफ रहने पर भी बिजाई के लिए तैयार हो सकती है लेकिन मिट्टी वाली जमीन में कम से कम 15 दिन नमी सूखने में लगेंगे। किसानों ने कहा कि इस बार कई इलाकों में आलू की बिजाई ही नहीं हो पाएगी। नवंबर में सीधा गेहूं की बिजाई करनी पड़ेगी। बता दें कि ऊना में करीब 2000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की दो माह वाली फसल तैयार होती है। जबकि मक्की की अगेती और पारंपरिक खेती करीब 25000 हेक्टेयर में होती है।
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उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि मक्की की फसल को बारिश से काफी नुकसान हुआ है। वहीं पर्याप्त धूप नहीं मिलने से भी उत्पादन पर असर होना निश्चित है। कहा कि आलू की बिजाई के लिए उपयुक्त नमी जरूरी है। अत्यधिक नमी में बीज सड़ने लगता है। मौसम साफ होने और नमी कम होने का इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प है।