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Una News: चुनाव को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
Fri, 17 Apr 2026 06:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 17 Apr 2026 06:53 AM IST
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गगरेट/ऊना। न्यू विशाल हिमाचल ट्रांसपोर्ट सोसायटी के चुनावों को लेकर एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। एडिशनल रजिस्ट्रार कॉर्पोरेट सोसायटी ऊना द्वारा 17 अक्तूबर 2025 को सोसायटी के चुनाव संपन्न करवाए गए थे। चुनाव प्रक्रिया के बाद नियमानुसार एक माह की अवधि आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए निर्धारित की गई थी ताकि चुनाव से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता या पात्रता संबंधी विवादों की निष्पक्ष जांच की जा सके।
इसी अवधि के भीतर विजयी सदस्यों संजय कुमार, विनय कुमार तथा पराजित उम्मीदवार राजकुमार और शशि पाल ने 14 नवंबर 2025 को चार अलग-अलग वार्डों से संबंधित आपत्तियां लिखित रूप में सभा ऊना कार्यालय में दर्ज करवाईं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कुछ उम्मीदवारों की पात्रता संदिग्ध होने के बावजूद उन्हें चुनाव मैदान में उतरने की अनुमति दे दी गई।
सूत्रों के अनुसार विभाग ने चार में से दो मामलों पर तो तत्परता दिखाते हुए एक माह के भीतर ही निर्णय लेकर कार्रवाई कर दी लेकिन शेष दो मामलों को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और निष्पक्षता व पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करती है।
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विशेष रूप से वार्ड नंबर 4 से निर्वाचित सदस्य सतीश कुमार (पुत्र जगदेव सिंह, अंबोटा) तथा वार्ड नंबर एक से निर्वाचित सदस्य पवन कुमार (पुत्र चिंतराम, मवा सिंधिया) के खिलाफ सोसायटी एक्ट के तहत गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। आरोप है कि ये दोनों सदस्य सोसायटी के नियमों के अनुसार चुनाव लड़ने के पात्र नहीं थे, इसके बावजूद विभाग ने बिना आवश्यक जांच-पड़ताल किए उन्हें चुनाव में भाग लेने की अनुमति दे दी। इस संबंध में सोसायटी के पूर्व सदस्य भजन लाल ने कहा कि जब अन्य मामलों में विभाग ने समय रहते निर्णय लिया तो इन दो मामलों को लगातार लंबित रखना समझ से परे है।
गौरतलब है कि न्यू विशाल हिमाचल ट्रांसपोर्ट सोसायटी प्रदेश की एक महत्वपूर्ण संस्था है, जो हर वर्ष करोड़ों रुपये का कारोबार करती है। ऐसे में यदि इसके संचालन में शामिल व्यक्तियों की पात्रता ही विवादों के घेरे में हो तो यह न केवल सोसायटी की साख को प्रभावित करता है बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विभाग की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली के चलते यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों और सोसायटी से जुड़े सदस्यों ने विभाग से मांग की है कि दोनों लंबित मामलों पर जल्द से जल्द निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।
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इसी अवधि के भीतर विजयी सदस्यों संजय कुमार, विनय कुमार तथा पराजित उम्मीदवार राजकुमार और शशि पाल ने 14 नवंबर 2025 को चार अलग-अलग वार्डों से संबंधित आपत्तियां लिखित रूप में सभा ऊना कार्यालय में दर्ज करवाईं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कुछ उम्मीदवारों की पात्रता संदिग्ध होने के बावजूद उन्हें चुनाव मैदान में उतरने की अनुमति दे दी गई।
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सूत्रों के अनुसार विभाग ने चार में से दो मामलों पर तो तत्परता दिखाते हुए एक माह के भीतर ही निर्णय लेकर कार्रवाई कर दी लेकिन शेष दो मामलों को लेकर अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और निष्पक्षता व पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करती है।
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विशेष रूप से वार्ड नंबर 4 से निर्वाचित सदस्य सतीश कुमार (पुत्र जगदेव सिंह, अंबोटा) तथा वार्ड नंबर एक से निर्वाचित सदस्य पवन कुमार (पुत्र चिंतराम, मवा सिंधिया) के खिलाफ सोसायटी एक्ट के तहत गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। आरोप है कि ये दोनों सदस्य सोसायटी के नियमों के अनुसार चुनाव लड़ने के पात्र नहीं थे, इसके बावजूद विभाग ने बिना आवश्यक जांच-पड़ताल किए उन्हें चुनाव में भाग लेने की अनुमति दे दी। इस संबंध में सोसायटी के पूर्व सदस्य भजन लाल ने कहा कि जब अन्य मामलों में विभाग ने समय रहते निर्णय लिया तो इन दो मामलों को लगातार लंबित रखना समझ से परे है।
गौरतलब है कि न्यू विशाल हिमाचल ट्रांसपोर्ट सोसायटी प्रदेश की एक महत्वपूर्ण संस्था है, जो हर वर्ष करोड़ों रुपये का कारोबार करती है। ऐसे में यदि इसके संचालन में शामिल व्यक्तियों की पात्रता ही विवादों के घेरे में हो तो यह न केवल सोसायटी की साख को प्रभावित करता है बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विभाग की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली के चलते यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों और सोसायटी से जुड़े सदस्यों ने विभाग से मांग की है कि दोनों लंबित मामलों पर जल्द से जल्द निष्पक्ष निर्णय लिया जाए।