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Una News: कुठेडा जसवाला में रिहायशी क्षेत्र में बना डाला डेयरी फार्म
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खुले में छोड़ा जा रहा पशुओं का मलमूत्र और गंदा बदबूदार पानी
क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को विवश
क्षेत्र में गंदे पानी से बदबू फैलने से सांस लेना हुआ मुश्किल
पीड़ितों ने उपायुक्त को सौंपी शिकायत, जनहित में मांगी जल्द उचित कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना जिले के गगरेट विधानसभा क्षेत्र के कुठेडा जसवाला गांव में रिहायशी इलाके के बीच नियमों को ताक पर रखकर डेयरी फार्म स्थापित कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के माध्यम से निजी काम के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर पानी की निकासी भी बनाई गई है। फार्म से निकलने वाले मलमूत्र और गंदा पानी खुले में बहाया जा रहा है, जिससे बदबूदार माहौल में लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी निर्मला देवी, स्नेह लता, पूनम, राकेश सहित पीड़ित परिवारों ने उपायुक्त ऊना जतिन लाल को शिकायत सौंपी और चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान जल्द न हुआ तो वे आत्मदाह के लिए विवश होंगे। पीड़ितों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे बीमार हैं और घर की महिलाएं मानसिक प्रताड़ना झेल रही हैं, जबकि पंचायत, पुलिस, खंड विकास अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घरेलू पेयजल और बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल व्यावसायिक डेयरी के लिए हो रहा है और जब भी अधिकारी आते हैं तो केवल खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि शिकायत पर रिपोर्ट मांगी गई है और रिहायशी इलाके में गैरकानूनी तरीके से डेयरी फार्म संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को विवश
क्षेत्र में गंदे पानी से बदबू फैलने से सांस लेना हुआ मुश्किल
पीड़ितों ने उपायुक्त को सौंपी शिकायत, जनहित में मांगी जल्द उचित कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना जिले के गगरेट विधानसभा क्षेत्र के कुठेडा जसवाला गांव में रिहायशी इलाके के बीच नियमों को ताक पर रखकर डेयरी फार्म स्थापित कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के माध्यम से निजी काम के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर पानी की निकासी भी बनाई गई है। फार्म से निकलने वाले मलमूत्र और गंदा पानी खुले में बहाया जा रहा है, जिससे बदबूदार माहौल में लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी निर्मला देवी, स्नेह लता, पूनम, राकेश सहित पीड़ित परिवारों ने उपायुक्त ऊना जतिन लाल को शिकायत सौंपी और चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान जल्द न हुआ तो वे आत्मदाह के लिए विवश होंगे। पीड़ितों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे बीमार हैं और घर की महिलाएं मानसिक प्रताड़ना झेल रही हैं, जबकि पंचायत, पुलिस, खंड विकास अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घरेलू पेयजल और बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल व्यावसायिक डेयरी के लिए हो रहा है और जब भी अधिकारी आते हैं तो केवल खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि शिकायत पर रिपोर्ट मांगी गई है और रिहायशी इलाके में गैरकानूनी तरीके से डेयरी फार्म संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।