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Una News: फसलों की पैदावार बढ़ी, मंडी का दायरा नहीं
Mon, 23 Sep 2024 04:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 23 Sep 2024 04:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में शुमार ऊना के किसानों को आज भी फसलें बेचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। समय के हिसाब से किसानों ने तो फसलों की पैदावार बढ़ा दी, लेकिन सरकार ने मंडी का दायरा नहीं बढ़ाया।
वहीं, मंडी का विस्तार न होने से किसानों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसान जहां पहले दो से तीन महीने फसलों को तैयार करने में कड़ी मेहनत करता है, तो उसके बाद फसल को जिला की मंडी में न अच्छे दाम मिलते हैं और न पर्याप्त खरीदार।
जानकारी के अनुसार ऊना में सब्जी मंडी का निर्माण करीब 35 वर्ष पहले हुआ था। इसे किसानों के लिए बड़ी सौगात माना गया। उस समय खेती का रुझान कम था। ऐसे में जिले के किसानों के लिए बनी मंडी काफी थी, लेकिन अब कृषि लायक जमीन का दायरा कई गुना बढ़ा है। यहां तैयार होने वाली हर फसल का उत्पादन भी ज्यादा हो जाता है। इसके बावजूद ऊना सब्जी मंडी का भवन वही पुराना है।
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हालांकि जिला में संतोषगढ़, रामपुर और टकारला में नई मंडियां बनी हैं। इसके बावजूद ऊना की सब्जी मंडी पर किसानों की निर्भरता अधिक है। मुख्यतः यहां ऊना, हरोली और कुटलैहड़ क्षेत्र के किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यह आए दिन की बात है कि यहां किसानों को अपनी सब्जियां और फल रखने तक को जगह नहीं मिलती।
वहीं, खरीदार भी कई घंटे की मशक्कत के बाद नसीब होते हैं। किसान सुबह चार बजे मंडी में फसल लेकर पहुंचते हैं और आठ बजे तक बिक्री कर पाते हैं। वहीं, जिन किसानों की फसल नहीं बिकती, उनके लिए मंडी में फसल रखने को कोई स्थान भी नहीं है। उन्हें फसल के साथ वापस घर लौटना पड़ता है, जो कि हर किसान को शर्मिंदा करता है। इसके अलावा मंडी में वाहनों की आवाजाही सुबह के समय काफी रहती है। इस कारण काफी देर जाम में वाहन फंसे रहते हैं, जिससे परेशानी होती है। यह स्थिति लगभग प्रतिदिन की है।
ऊना सब्जी मंडी केवल छोटे किसानों के लिए कुछ हद तक लाभकारी है, लेकिन उन्हें भी फसल बेचने में मिन्नतें करने पड़ती हैं। अफसोस है कि किसानों के लिए फसल बिक्री के बेहतर विकल्प नहीं खोजे गए।
अमित कुमार, किसान
ऊना मंडी की हालत यह है कि किसान को फसल रखने को जगह नसीब नहीं होती। खरीदारों के लिए भी घूमने को जगह नहीं बचती। अगर एक किसान 50 किलो से ज्यादा फसल ले आए, तो उसे अच्छी कीमत पर बेचना मुसीबत बन जाता है।
सतीश कुमार, किसान
ऊना मंडी में वाहन पार्किंग से लेकर किसानों के रुकने और फसल सुरक्षित रखने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। जाम भी लग जाता है। किसान की फसलें न बिकें, तो रखे कहां। शाम को फसल न बिकने पर मंडी से लेकर लौटना बहुत शर्मिंदगी भरा होता है।
विनोद कुमार, किसान
ऊना सब्जी मंडी के लिए जगह बढ़नी चाहिए। जिले में कृषि करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, लेकिन आज भी बड़े किसानों को फसल लेकर पंजाब जाना पड़ता है। कुछ व्यापारी खेत से कम कीमत पर फसल उठाते हैं और किसान को मजबूरी में बेचनी पड़ती है।
सुनील कुमार, किसान
ऊना सब्जी मंडी के विस्तारीकरण को लेकर योजना पर काम चल रहा है। हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। वर्तमान में मंडी के विस्तारीकरण की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता है। उम्मीद है कि जल्द इस मामले में फैसला लिया जाएगा।
भूपिंद्र सिंह ठाकुर, सचिव, एपीएमसी, ऊना
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ऊना। प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में शुमार ऊना के किसानों को आज भी फसलें बेचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। समय के हिसाब से किसानों ने तो फसलों की पैदावार बढ़ा दी, लेकिन सरकार ने मंडी का दायरा नहीं बढ़ाया।
वहीं, मंडी का विस्तार न होने से किसानों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसान जहां पहले दो से तीन महीने फसलों को तैयार करने में कड़ी मेहनत करता है, तो उसके बाद फसल को जिला की मंडी में न अच्छे दाम मिलते हैं और न पर्याप्त खरीदार।
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जानकारी के अनुसार ऊना में सब्जी मंडी का निर्माण करीब 35 वर्ष पहले हुआ था। इसे किसानों के लिए बड़ी सौगात माना गया। उस समय खेती का रुझान कम था। ऐसे में जिले के किसानों के लिए बनी मंडी काफी थी, लेकिन अब कृषि लायक जमीन का दायरा कई गुना बढ़ा है। यहां तैयार होने वाली हर फसल का उत्पादन भी ज्यादा हो जाता है। इसके बावजूद ऊना सब्जी मंडी का भवन वही पुराना है।
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हालांकि जिला में संतोषगढ़, रामपुर और टकारला में नई मंडियां बनी हैं। इसके बावजूद ऊना की सब्जी मंडी पर किसानों की निर्भरता अधिक है। मुख्यतः यहां ऊना, हरोली और कुटलैहड़ क्षेत्र के किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यह आए दिन की बात है कि यहां किसानों को अपनी सब्जियां और फल रखने तक को जगह नहीं मिलती।
वहीं, खरीदार भी कई घंटे की मशक्कत के बाद नसीब होते हैं। किसान सुबह चार बजे मंडी में फसल लेकर पहुंचते हैं और आठ बजे तक बिक्री कर पाते हैं। वहीं, जिन किसानों की फसल नहीं बिकती, उनके लिए मंडी में फसल रखने को कोई स्थान भी नहीं है। उन्हें फसल के साथ वापस घर लौटना पड़ता है, जो कि हर किसान को शर्मिंदा करता है। इसके अलावा मंडी में वाहनों की आवाजाही सुबह के समय काफी रहती है। इस कारण काफी देर जाम में वाहन फंसे रहते हैं, जिससे परेशानी होती है। यह स्थिति लगभग प्रतिदिन की है।
ऊना सब्जी मंडी केवल छोटे किसानों के लिए कुछ हद तक लाभकारी है, लेकिन उन्हें भी फसल बेचने में मिन्नतें करने पड़ती हैं। अफसोस है कि किसानों के लिए फसल बिक्री के बेहतर विकल्प नहीं खोजे गए।
अमित कुमार, किसान
ऊना मंडी की हालत यह है कि किसान को फसल रखने को जगह नसीब नहीं होती। खरीदारों के लिए भी घूमने को जगह नहीं बचती। अगर एक किसान 50 किलो से ज्यादा फसल ले आए, तो उसे अच्छी कीमत पर बेचना मुसीबत बन जाता है।
सतीश कुमार, किसान
ऊना मंडी में वाहन पार्किंग से लेकर किसानों के रुकने और फसल सुरक्षित रखने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। जाम भी लग जाता है। किसान की फसलें न बिकें, तो रखे कहां। शाम को फसल न बिकने पर मंडी से लेकर लौटना बहुत शर्मिंदगी भरा होता है।
विनोद कुमार, किसान
ऊना सब्जी मंडी के लिए जगह बढ़नी चाहिए। जिले में कृषि करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, लेकिन आज भी बड़े किसानों को फसल लेकर पंजाब जाना पड़ता है। कुछ व्यापारी खेत से कम कीमत पर फसल उठाते हैं और किसान को मजबूरी में बेचनी पड़ती है।
सुनील कुमार, किसान
ऊना सब्जी मंडी के विस्तारीकरण को लेकर योजना पर काम चल रहा है। हालांकि अभी इस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। वर्तमान में मंडी के विस्तारीकरण की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता है। उम्मीद है कि जल्द इस मामले में फैसला लिया जाएगा।
भूपिंद्र सिंह ठाकुर, सचिव, एपीएमसी, ऊना