फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   commision in medicine

अस्पतालों में चल रहा कमीशन का गोरखधंधा

Sat, 13 Feb 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना Updated Sat, 13 Feb 2016 11:51 PM IST
विज्ञापन
commision in medicine

भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टरों में से चिकित्सकों का एक तबका सवालों के घेरे में है। जिला के अस्पतालों में महंगी दवाइयों पर कमीशनखोरी का गोरखधंधा चल रहा है। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक कुछ चिकित्सक मरीजों को कमीशन के चक्कर में महंगी ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। इसकी वजह से आम आदमी की जेब ढीली हो रही है। चिंतपूर्णी अस्पताल में लाखों रुपये की सरकारी दवाओं की बेकद्री से भी ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जिला में यह गोरखधंधा लंबे अरसे से जारी है। इसके तहत चिकित्सक दवा कंपनियों से मोटी चांदी कूट रहे हैं। इसमें न केवल ब्रांडेड बल्कि लोकल ब्रांड की दवा कंपनियों का भी खेल चल रहा है। वहीं, सरकार के फरमान के बावजूद अधिकांश डॉक्टर मरीजों को सस्ती जेनरिक दवाई लिखने के बजाय महंगी ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। इस कथित मनमानी से आम मरीज परेशान और बेबस हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिला के अस्पतालों में विभाग की ओर से दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद चिकित्सक मरीजों को बाहरी स्टोरों से दवा खरीदने को मजबूर कर रहे हैं।

विज्ञापन


जिला में सभी चिकित्सकों को सरकार के तय निर्देशों के अनुसार दवाइयां लिखने के निर्देश हैं। अगर कहीं इस तरह की शिकायत सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

डॉ. एके गुप्ता, सीएमओ  

गिफ्ट से लेकर कैश तक का चलता है धंधा
नाम न छापने की शर्त पर जिला में कार्यरत दवा कंपनी के एक एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव) ने बताया कि अमूमन दवा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को सालाना उपहार तय होते हैं, लेकिन कई मर्तबा डॉक्टर कैश तक की डिमांड करते हैं। जिनकी आपूर्ति करना मजबूरी बन जाता है। हालांकि नामी कंपनियां कैश जैसे मामलों में न पड़कर तय गिफ्ट देती हैं। लेकिन लोकल ब्रांड के मामलों में बात कैश तक आती है। डॉक्टरों की 20 से लेकर 50 फीसदी तक कमीशन तय रहती है। यह दीगर है कि सभी डॉक्टर इस तरह की अनैतिक प्रैक्टिस में शामिल नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार बनाए ठोस नीति : मोर्चा
जिला में आम आदमी के सरोकारों से जुड़े संगठन जनहित मोर्चा के सलाहकार सरदार भाग सिंह का कहना है कि सरकार को इस बाबत कोई ठोस नीति बनाकर उसे अमल में लाना चाहिए। जहां तक डॉक्टरी पेशे का सवाल है यह पुण्य के कार्य से जुड़ा है। चिकित्सकों को इस तरह की अनैतिक प्रैक्टिस में शामिल नहीं होना चाहिए। इस पर कार्रवाई की जरूरत है। वहीं, प्रदेश भर में बतौर एमआर जुड़े हजारों युवाओं के लिए भी सरकार को नीति निर्धारित करनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed