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Una News: गगरेट हलके में जातिगत फैक्टर का नहीं चलता जादू
Sun, 21 Apr 2024 01:55 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 21 Apr 2024 01:55 AM IST
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राजपूत कैडर ज्यादा होने पर भी ब्राह्मण बने विधायक
2012 के बाद सीट अनारक्षित होने से बदले सियासी समीकरण
2017 और 2022 में नोटा दबाकर नकार चुकी है प्रत्याशियों को जनता
जसवीर ठाकुर
ऊना। गगरेट हलके में जातिगत फैक्टर का मतदाताओं पर कोई भी जादू नहीं चलता दिखा है। भले ही यहां पर राजपूत कैडर ज्यादा होने के चलते दो बार ब्राह्मण विधायक बने हैं, जबकि राजपूत कैडर का विधायक एक बार ही बना है। 2012 में पुनर्सीमन के बाद गगरेट विधानसभा क्षेत्र की सीट अनारक्षित होने के बाद सियासी समीकरण बदले हैं। पुनर्सीमन के बाद यहां पर भाजपा दो बार राजपूत समुदाय से प्रत्याशी उतार चुकी है, जिसमें एक बार ही भाजपा को जीत हासिल हुई है, जबकि कांग्रेस 2012 से लेकर 2022 तक तीन बार ब्राह्मण समुदाय से ही प्रत्याशी उतरती आई है। दसमें दो बार जीत हासिल हुई है और एक बार राकेश कालिया के रूप में हार दर्ज हुई है।
अब उपचुनावों में यह पहलू देखने लायक होगा कि जो 2022 में कांग्रेस के बागी निष्कासित विधायक चैतन्य शर्मा के रूप में चुनकर आया था और पाला बदलकर अब भाजपा की ओर से चुनावी मैदान में उतरे हैं, तो वहीं दूसरी ओर गगरेट में कांग्रेस हाईकमान भी टक्कर देने के लिए सशक्त और जिताऊ उम्मीदवार पर दांव खेलने जा रही है, ताकि इन उपचुनाव में बराबर की टक्कर हो सके, तो यह देखने लायक पहलू होगा कि इस बार के उपचुनाव में कांग्रेस किस समुदाय के प्रत्याशी को भाजपा के प्रत्याशी के मुकाबले में टक्कर देने के लिए चुनावी रण में उतरती है।
वर्तमान में गगरेट विधानसभा क्षेत्र में 84517 मतदाता पंजीकृत हैं। जहां पर 38 फ़ीसदी राजपूत समुदाय और 16 फ़ीसदी ब्राह्मण समुदाय के अलावा शेष अन्य समुदाय के मतदाता पंजीकृत हैं। अगर बात 2012 के बाद पुनर्सीमन की करें तो यहां पर 2012 में पहले खाता कांग्रेस के विधायक के रूप में राकेश कालिया ने ही खोला था और अपने प्रतिद्धंद्धी सुशील कुमार कालिया को जो भाजपा के उम्मीदवार थे, उन्हें परस्त किया था। इसके अलावा रमन कुमार जसवाल जो बतौर आजाद प्रत्याशी उतारे थे, वह तीसरे नंबर पर 5245 वोट लेकर आ रहे थे। बसपा के गुरबख्श राय ठाकुर और हिमाचल लोकहित पार्टी के नरेंद्र सिंह परमार 789 मत लेकर 5वें स्थान पर रहे थे।
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2017 के विधानसभा चुनाव में राजेश ठाकुर ने 33970 वोट लेकर जीत अर्जित कर भाजपा के खाते में सीट डाली थी, जबकि कांग्रेस के राकेश कालिया 24657 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। सुभाष शर्मा आजाद प्रत्याशी के रूप में 389 मत लेकर चौथे और लेखराज 260 मत लेकर बसपा की ओर से प्रत्याशी के रूप में पांचवें स्थान पर रहे हैं। इस दौरान यहां पर पहली बार 392 मतदाताओं ने नोटा दबाकर अपना एतराज जताते हुए उतारे गए उम्मीदवारों को नकारा था।
2022 के विस चुनावों में कांग्रेस के चैतन्य शर्मा ने 40767 मत प्राप्त करके रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करके नया कीर्तिमान स्थापित किया था और अपने प्रतिद्वंदी राजेश ठाकुर को जो भाजपा की ओर से प्रत्याशी थे। 25082 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी की मनोहर लाल 145 और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के विनोद डढवाल को 125 वोट प्राप्त हुए थे। इन चुनावों में भी 404 लोगों ने नोटा दबाकर उतारे गए प्रत्याशियों को नकारा है।
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2012 के बाद सीट अनारक्षित होने से बदले सियासी समीकरण
2017 और 2022 में नोटा दबाकर नकार चुकी है प्रत्याशियों को जनता
जसवीर ठाकुर
ऊना। गगरेट हलके में जातिगत फैक्टर का मतदाताओं पर कोई भी जादू नहीं चलता दिखा है। भले ही यहां पर राजपूत कैडर ज्यादा होने के चलते दो बार ब्राह्मण विधायक बने हैं, जबकि राजपूत कैडर का विधायक एक बार ही बना है। 2012 में पुनर्सीमन के बाद गगरेट विधानसभा क्षेत्र की सीट अनारक्षित होने के बाद सियासी समीकरण बदले हैं। पुनर्सीमन के बाद यहां पर भाजपा दो बार राजपूत समुदाय से प्रत्याशी उतार चुकी है, जिसमें एक बार ही भाजपा को जीत हासिल हुई है, जबकि कांग्रेस 2012 से लेकर 2022 तक तीन बार ब्राह्मण समुदाय से ही प्रत्याशी उतरती आई है। दसमें दो बार जीत हासिल हुई है और एक बार राकेश कालिया के रूप में हार दर्ज हुई है।
अब उपचुनावों में यह पहलू देखने लायक होगा कि जो 2022 में कांग्रेस के बागी निष्कासित विधायक चैतन्य शर्मा के रूप में चुनकर आया था और पाला बदलकर अब भाजपा की ओर से चुनावी मैदान में उतरे हैं, तो वहीं दूसरी ओर गगरेट में कांग्रेस हाईकमान भी टक्कर देने के लिए सशक्त और जिताऊ उम्मीदवार पर दांव खेलने जा रही है, ताकि इन उपचुनाव में बराबर की टक्कर हो सके, तो यह देखने लायक पहलू होगा कि इस बार के उपचुनाव में कांग्रेस किस समुदाय के प्रत्याशी को भाजपा के प्रत्याशी के मुकाबले में टक्कर देने के लिए चुनावी रण में उतरती है।
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वर्तमान में गगरेट विधानसभा क्षेत्र में 84517 मतदाता पंजीकृत हैं। जहां पर 38 फ़ीसदी राजपूत समुदाय और 16 फ़ीसदी ब्राह्मण समुदाय के अलावा शेष अन्य समुदाय के मतदाता पंजीकृत हैं। अगर बात 2012 के बाद पुनर्सीमन की करें तो यहां पर 2012 में पहले खाता कांग्रेस के विधायक के रूप में राकेश कालिया ने ही खोला था और अपने प्रतिद्धंद्धी सुशील कुमार कालिया को जो भाजपा के उम्मीदवार थे, उन्हें परस्त किया था। इसके अलावा रमन कुमार जसवाल जो बतौर आजाद प्रत्याशी उतारे थे, वह तीसरे नंबर पर 5245 वोट लेकर आ रहे थे। बसपा के गुरबख्श राय ठाकुर और हिमाचल लोकहित पार्टी के नरेंद्र सिंह परमार 789 मत लेकर 5वें स्थान पर रहे थे।
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2017 के विधानसभा चुनाव में राजेश ठाकुर ने 33970 वोट लेकर जीत अर्जित कर भाजपा के खाते में सीट डाली थी, जबकि कांग्रेस के राकेश कालिया 24657 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे। सुभाष शर्मा आजाद प्रत्याशी के रूप में 389 मत लेकर चौथे और लेखराज 260 मत लेकर बसपा की ओर से प्रत्याशी के रूप में पांचवें स्थान पर रहे हैं। इस दौरान यहां पर पहली बार 392 मतदाताओं ने नोटा दबाकर अपना एतराज जताते हुए उतारे गए उम्मीदवारों को नकारा था।
2022 के विस चुनावों में कांग्रेस के चैतन्य शर्मा ने 40767 मत प्राप्त करके रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करके नया कीर्तिमान स्थापित किया था और अपने प्रतिद्वंदी राजेश ठाकुर को जो भाजपा की ओर से प्रत्याशी थे। 25082 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी की मनोहर लाल 145 और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के विनोद डढवाल को 125 वोट प्राप्त हुए थे। इन चुनावों में भी 404 लोगों ने नोटा दबाकर उतारे गए प्रत्याशियों को नकारा है।