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चीख पुकार से गूंज उठा बदोली, राजेश कुमार अमर रहे लगे

Tue, 24 May 2022 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 24 May 2022 11:39 PM IST
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Badoli echoed with screams, said Rajesh Kumar was immortal
बदोली में मृतक वन रक्षक राजेश कुमार के परिजनों को ढांढस बंधाते पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्र? - फोटो : Una
संवाद न्यूज एजेंसी
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ऊना। पर्यावरण बचाने के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वन रक्षक राजेश कुमार के शव के घर पहुंचते ही बदोली गांव चीख पुकार से गूूंज उठा। राजेश कुमार अमर रहे के नारे लगाकर ग्रामीणों और वनकर्मियों ने श्रद्धांजलि दी। राजेश के अंतिम दर्शन के लिए अपनों की आंखें तरसती रहीं। राजेश के जज्बे को घर पहुंचकर हर किसी ने सलाम किया। इससे पहले शव के हिमाचल सीमा पर पहुंचने पर मैहतपुर में अपने साथी राजेश को वन कर्मियों ने सलामी देकर आगे भेजा।
राजेश कुमार के बलिदान पर ढांढस बंधाने के लिए मंगलवार शाम को ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर उनके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। इस दौरान वन महकमे से अधिकारी और कर्मचारी अपने साथी को खोने के गम में बदोली पहुंचे और राजेश के व्यक्तित्व को याद किया। राजेश को याद करते हुए वन कर्मी अपने आंसू नहीं रोक पाए। राजेश के जज्बे को सलाम करते हुए कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इस विपदा की घड़ी में सरकार परिवार के साथ है। राजेश की क्षतिपूर्ति कभी नहीं की जा सकती है, लेकिन सरकार से पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की सिफारिश की जाएगी। कहा कि राजेश खुद तो चले गए, लेकिन उन्होंने शहादत देकर समाज को एक बहुत बड़ा संदेश दिया।
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वहीं, डीएफओ ऊना मृत्युंजय माधव ने कहा कि वन विभाग पूरी तरह राजेश के परिवार के साथ पूरी तरह खड़ा है। परिवार की हर समस्या के लिए विभाग तत्पर रहेगा। उन्होंने कहा कि राजेश कुमार ने पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा दी। इससे बड़ा बलिदान क्या हो सकता है। उन्होंने अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए शहादत दी है, जिसे विभाग कभी नहीं भूला सकता है। इस मौके पर जिप उपाध्यक्ष कृष्ण पाल शर्मा, जिला पंचायत अधिकारी श्रवण कश्यप और अन्य मौजूद रहे।
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पिता की मौत से बेसुध हुआ बेटा
नारी (ऊना)। वन रक्षक राजेश कुमार का 18 वर्षीय बेटा पिता के मौत के बाद बेसुध पड़ा है। राजेश की मौत की सूचना के बाद से ही बेटा किसी से बात नहीं कर रहा है। परिजन उसे सामान्य करने में लगे हुए हैं, लेकिन पिता की मौत से टूटे बेटे पर कोई असर नहीं दिख रहा है। लोग उसे ढांढस बंधाते रहे।
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