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गगरेट में रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे जंगली जीव
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भोजन और पानी के लिए रिहायशी इलाकों में घुस रहे तेंदुए जैसे जीव
अवैध कटान और खनन ने खत्म किए जानवरों के भोजन से जुड़े प्रकृतिक संसाधन
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों के जंगलों से निकलकर जंगली जीव अब रिहायशी इलाकों का रुख करने लगे हैं। इससे आम लोगों मे दहशत है। पिछले सप्ताह एक तेंदुआ और दो पायथन गगरेट क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में देखे गए हैं। हालांकि तेंदुआ तो अक्सर गगरेट के ऊपरी रिहायशी इलाकों में अपनी दस्तक देता रहा है, जिस कारण लोगों को अपने बच्चों व मवेशियों की चिंता सताती रहती है। सर्दियां शुरू होते ही एक बार फिर तेंदुए की रिहायशी इलाकों में दस्तक शुरू हो गई है। वहीं बंदर भी फसलों को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
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क्यों शहरों का रुख कर रहे वन्य जीव
वन्य जीवों को रिहायशी क्षेत्रों में आने का एक मुख्य कारण वनों का हो रहा अवैध कटान है। शिवालिक की पहाड़ियों में सिमटते जंगल वन्य जीवों को रिहायशी इलाकों में आने पर मजबूर कर रहे हैं। वहीं बेतरतीब खनन भी वन्य जीवों को खदेड़ता हुआ रिहायशी इलाकों में घुसने को मजबूर कर रहा है। हालांकि सरकार अवैध कटान और अवैध खनन के खिलाफ करवाई करती रहती है लेकिन माफिया कोई नई राह निकाल कर अपने कार्य को अंजाम देकर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है। पहले जंगलों में वन्य जीवों के लिए पीने के जल के स्रोत तालाब व बाबड़ियां के होने से जल की कोई कमी नहीं होती थी लेकिन खनन, अवैध कटान से अब जंगलों में जल की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
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क्या कहते हैं पर्यावरण प्रेमी
क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों तरसेम लाल, राजेंद्र पिंटु, अरविंद, मनु ठाकुर, विकास, संजीव, संजय, अश्विनी, संजीव आदि के अनुसार वन्य जीव भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। रिहायशी इलाकों में वन्य जीवों को भोजन भी आसानी से प्राप्त हो जाता है। वहीं धार्मिक पर्यटक भी सड़क के किनारे भोजन इत्यादि फेंक कर वन्य जीवों को भोजन मुहैया करवाते हैं। इससे वन्य जीव जंगलों में जाने की बजाय लोगों पर ही निर्भर हो गए हैं।
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डीएफओ ऊना मृत्युंजय माधव ने कहा कि लोग बचा हुआ खाने का सामान घरों के बाहर फेंक देते हैं। इससे वन्य जीव भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लोगों को चाहिए कि भोजन व अन्य खाद्यान्न पदार्थ बाहर न फेंके। इससे वन्य जीवों के रिहायशी इलाकों में घुसने से बचा जा सकता है।
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अवैध कटान और खनन ने खत्म किए जानवरों के भोजन से जुड़े प्रकृतिक संसाधन
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। क्षेत्र में शिवालिक पहाड़ियों के जंगलों से निकलकर जंगली जीव अब रिहायशी इलाकों का रुख करने लगे हैं। इससे आम लोगों मे दहशत है। पिछले सप्ताह एक तेंदुआ और दो पायथन गगरेट क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में देखे गए हैं। हालांकि तेंदुआ तो अक्सर गगरेट के ऊपरी रिहायशी इलाकों में अपनी दस्तक देता रहा है, जिस कारण लोगों को अपने बच्चों व मवेशियों की चिंता सताती रहती है। सर्दियां शुरू होते ही एक बार फिर तेंदुए की रिहायशी इलाकों में दस्तक शुरू हो गई है। वहीं बंदर भी फसलों को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
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क्यों शहरों का रुख कर रहे वन्य जीव
वन्य जीवों को रिहायशी क्षेत्रों में आने का एक मुख्य कारण वनों का हो रहा अवैध कटान है। शिवालिक की पहाड़ियों में सिमटते जंगल वन्य जीवों को रिहायशी इलाकों में आने पर मजबूर कर रहे हैं। वहीं बेतरतीब खनन भी वन्य जीवों को खदेड़ता हुआ रिहायशी इलाकों में घुसने को मजबूर कर रहा है। हालांकि सरकार अवैध कटान और अवैध खनन के खिलाफ करवाई करती रहती है लेकिन माफिया कोई नई राह निकाल कर अपने कार्य को अंजाम देकर प्रकृति से खिलवाड़ कर रहा है। पहले जंगलों में वन्य जीवों के लिए पीने के जल के स्रोत तालाब व बाबड़ियां के होने से जल की कोई कमी नहीं होती थी लेकिन खनन, अवैध कटान से अब जंगलों में जल की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
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क्या कहते हैं पर्यावरण प्रेमी
क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों तरसेम लाल, राजेंद्र पिंटु, अरविंद, मनु ठाकुर, विकास, संजीव, संजय, अश्विनी, संजीव आदि के अनुसार वन्य जीव भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं। रिहायशी इलाकों में वन्य जीवों को भोजन भी आसानी से प्राप्त हो जाता है। वहीं धार्मिक पर्यटक भी सड़क के किनारे भोजन इत्यादि फेंक कर वन्य जीवों को भोजन मुहैया करवाते हैं। इससे वन्य जीव जंगलों में जाने की बजाय लोगों पर ही निर्भर हो गए हैं।
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डीएफओ ऊना मृत्युंजय माधव ने कहा कि लोग बचा हुआ खाने का सामान घरों के बाहर फेंक देते हैं। इससे वन्य जीव भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लोगों को चाहिए कि भोजन व अन्य खाद्यान्न पदार्थ बाहर न फेंके। इससे वन्य जीवों के रिहायशी इलाकों में घुसने से बचा जा सकता है।