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Una News: गोबिंद सागर झील के घाटों पर आस्था का अद्भुत संगम, लोगों ने प्रवाहित किए बेड़े
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वातावरण में भजन, शंखनाद और जयकारों की गूंज सुनाई दी
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। गोबिंद सागर झील के पावन तटों पर वीरवार को पारंपरिक बेड़ा छोड़ने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। लठियाणी, धवेड़ा, कोडरा, मंदली, बीहड़ू और कोलका घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने पहले पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की और फिर आस्था के साथ अपने बेड़े झील में प्रवाहित किए। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर एक प्रतीकात्मक यात्रा है। जब सैकड़ों बेड़े एक साथ झील में उतारे गए तो मानो आस्था लहरों पर तैरने लगी। पूरे वातावरण में भजन, शंखनाद और जयकारों की गूंज सुनाई दी। आयोजन को सफल बनाने में स्वयंसेवी संस्थाओं ने अहम भूमिका निभाई। घाटों पर सुरक्षा और सफाई की विशेष व्यवस्था रही। लठियाणी घाट पर पहुंचीं 65 वर्षीय सुमित्रा देवी ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से इस आयोजन में शामिल हो रही हैं और इसे आत्मिक शांति का स्रोत मानती हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। गोबिंद सागर झील के पावन तटों पर वीरवार को पारंपरिक बेड़ा छोड़ने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। लठियाणी, धवेड़ा, कोडरा, मंदली, बीहड़ू और कोलका घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने पहले पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की और फिर आस्था के साथ अपने बेड़े झील में प्रवाहित किए। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर एक प्रतीकात्मक यात्रा है। जब सैकड़ों बेड़े एक साथ झील में उतारे गए तो मानो आस्था लहरों पर तैरने लगी। पूरे वातावरण में भजन, शंखनाद और जयकारों की गूंज सुनाई दी। आयोजन को सफल बनाने में स्वयंसेवी संस्थाओं ने अहम भूमिका निभाई। घाटों पर सुरक्षा और सफाई की विशेष व्यवस्था रही। लठियाणी घाट पर पहुंचीं 65 वर्षीय सुमित्रा देवी ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से इस आयोजन में शामिल हो रही हैं और इसे आत्मिक शांति का स्रोत मानती हैं।