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चिंतपूर्णी मंदिर के लिए मात्र 110 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण लटका
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प्रसाद योजना के तहत प्रस्तावित चिंतपूर्णी मंदिर का प्रारूप। -संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लटक गई है। कोर्ट से स्टे लगने के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया रुक गई है। अब मात्र 110 मीटर भूमि का अधिग्रहण होना बाकी रह गया है, जबकि अन्य सारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
बाकायदा रजिस्ट्री करवाकर मुआवजा राशि भी दे दी गई है। प्रसाद योजना के तहत चिंतपूर्णी मंदिर का विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण होना है। योजना में करीब 45 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इसके लिए चिंतपूर्णी मंदिर के साथ लगती दुकानों का अधिग्रहण किया गया है। कुल 1,696 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण होना था। इसमें से 1,586 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण हो चुका है।
इस भूमि की एवज में 6.97 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जारी की जा चुकी है। वहीं, 110 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण लटक गया है। इस भूमि पर छह पार्टियों की हिस्सेदारी को लेकर विवाद है। ऐसे में वे कोर्ट चले गए, जहां अब स्टे लग गया है। इस वजह से अधिग्रहण प्रक्रिया भी रुक गई है।
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हालांकि प्रशासन कानूनी तौर पर ही इस बाधा को भी पूरा पाने का प्रयास कर रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टियों का जमीन देने पर कोई विवाद नहीं है।
भूमि के शेयर को लेकर छह पार्टियों का आपस में विवाद है। बता दें कि प्रसाद योजना के तहत यह कार्य कई सालों से लटका हुआ है। कुछ माह पहले एक त्रुटि को सुधारने के बाद भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई। अब 110 वर्ग भूमि का अधिग्रहण को लेकर विवाद पैदा हो गया है।
मामला सुलझाने का पूरा प्रयास
110 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण बचा हुआ है। इस भूमि को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन है और स्टे लगा हुआ है। अदालत में 14 जुलाई को सुनवाई है। इसमें अदालत के समक्ष प्रार्थना की जाएगी कि मुआवजा राशि अदालत में जमा करवा दी जाए। मामला सुलझाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
-राघव शर्मा, उपायुक्त ऊना
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ऊना। प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लटक गई है। कोर्ट से स्टे लगने के कारण अधिग्रहण प्रक्रिया रुक गई है। अब मात्र 110 मीटर भूमि का अधिग्रहण होना बाकी रह गया है, जबकि अन्य सारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
बाकायदा रजिस्ट्री करवाकर मुआवजा राशि भी दे दी गई है। प्रसाद योजना के तहत चिंतपूर्णी मंदिर का विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण होना है। योजना में करीब 45 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इसके लिए चिंतपूर्णी मंदिर के साथ लगती दुकानों का अधिग्रहण किया गया है। कुल 1,696 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण होना था। इसमें से 1,586 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण हो चुका है।
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इस भूमि की एवज में 6.97 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जारी की जा चुकी है। वहीं, 110 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण लटक गया है। इस भूमि पर छह पार्टियों की हिस्सेदारी को लेकर विवाद है। ऐसे में वे कोर्ट चले गए, जहां अब स्टे लग गया है। इस वजह से अधिग्रहण प्रक्रिया भी रुक गई है।
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हालांकि प्रशासन कानूनी तौर पर ही इस बाधा को भी पूरा पाने का प्रयास कर रहा है। बताया जा रहा है कि पार्टियों का जमीन देने पर कोई विवाद नहीं है।
भूमि के शेयर को लेकर छह पार्टियों का आपस में विवाद है। बता दें कि प्रसाद योजना के तहत यह कार्य कई सालों से लटका हुआ है। कुछ माह पहले एक त्रुटि को सुधारने के बाद भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई। अब 110 वर्ग भूमि का अधिग्रहण को लेकर विवाद पैदा हो गया है।
मामला सुलझाने का पूरा प्रयास
110 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण बचा हुआ है। इस भूमि को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन है और स्टे लगा हुआ है। अदालत में 14 जुलाई को सुनवाई है। इसमें अदालत के समक्ष प्रार्थना की जाएगी कि मुआवजा राशि अदालत में जमा करवा दी जाए। मामला सुलझाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
-राघव शर्मा, उपायुक्त ऊना