फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   A guru is recognized not by awards, but by the success of their disciples.

Una News: पुरस्कारों से नहीं, शिष्यों की सफलता से मिलती है गुरुओं को पहचान

Sat, 05 Sep 2026 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sat, 05 Sep 2026 12:46 AM IST
विज्ञापन
A guru is recognized not by awards, but by the success of their disciples.
ऊना।
विज्ञापन

शिक्षक की पहचान केवल उसके पद या पुरस्कारों से नहीं होती। असली पहचान विद्यार्थियों की सफलता से होती है। जिले के ऐसे ही कुछ शिक्षक भी हैं, जो सम्मान और सुर्खियों से दूर विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में जुटे हैं। किसी ने विदेश में मिला बेहतर कॅरिअर छोड़कर युवाओं को तराशने का फैसला किया तो किसी ने दशकों की सेवा के बावजूद पुरस्कार के लिए कभी आवेदन तक नहीं किया।
.............
जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क में दे रहे कोचिंग
अंब निवासी डॉ. सुनील रियात ने विदेशों में कॅरिअर बनाने के अवसरों के बावजूद अपने देश लौटकर युवाओं के भविष्य को दिशा देने का रास्ता चुना। उन्होंने थाईलैंड में एक वर्ष तक बॉक्सिंग कोचिंग दी जबकि दुबई में लगातार तीन साल शारीरिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया। स्वदेश लौटने के बाद खालसा कॉलेज माहिलपुर में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को पढ़ाया और पंजाब विश्वविद्यालय की बॉक्सिंग टीम के कोच के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2017 में हिमाचल के नगरोटा बगवां कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुए। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन के खेल विभाग में संयुक्त निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में डॉ. रियात अंब और दौलतपुर क्षेत्र के करीब 50 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क बॉक्सिंग और शारीरिक शिक्षा की कोचिंग दे रहे हैं।
विज्ञापन


शिष्यों की सफलता ही डॉ. गुरदीप का सम्मान
गगरेट विधानसभा क्षेत्र के नकड़ोह निवासी और घनारी स्कूल में गणित प्रवक्ता डॉ. गुरदीप सिंह के लिए शिक्षक होना नौकरी नहीं बल्कि विद्यार्थियों की जिंदगी को सही दिशा देने का संकल्प है। उन्होंने गणित के सवालों के साथ विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाया। उनके मार्गदर्शन में शिक्षा हासिल करने वाले कई विद्यार्थी आज देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं। डॉ. गुरदीप सिंह के लिए यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
विज्ञापन
विज्ञापन


34 साल की सेवा में पुरस्कार के लिए नहीं दिया आवेदन
हरोली विधानसभा क्षेत्र के प्राथमिक पाठशाला ललड़ी के मुख्याध्यापक सर्वजीत सिंह राणा ने 34 वर्ष के सेवाकाल में कभी किसी पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं किया। उनका काम उन्हें क्षेत्र में एक आदर्श शिक्षक की पहचान दिलाता है। स्कूल में 303 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह की प्रार्थना सभा हारमोनियम और तबले के साथ होती है। हर साल विद्यालय के तीन से चार विद्यार्थियों का जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए चयन होता है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को स्कूल समय से 40 मिनट पहले बुलाकर अतिरिक्त तैयारी करवाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

---
विश्व कुमार ने निशुल्क कोचिंग से तैयार किए डॉक्टर और सैनिक
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बदोली के विज्ञान अध्यापक विश्व कुमार भी चुपचाप विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में जुटे हैं। करीब 22 वर्ष से अध्यापन कर रहे विश्व कुमार शाम के समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं। उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए विद्यार्थियों में 10 ने एमबीबीएस, 16 ने सेना और करीब 20 ने अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। सुबह आठ बजे स्कूल पहुंचकर वह विद्यार्थियों को बैडमिंटन की तैयारी करवाते हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी जिला स्तर तक विजेता रहे हैं। छुट्टी वाले दिन क्रिकेट के इच्छुक बच्चों को भी निशुल्क कोचिंग देते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर तीन विद्यार्थियों की कंप्यूटर विषय की फीस भी वह स्वयं भर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed