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एसएमसी शिक्षकों ने की अनुबंध में लाने की मांग
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एसएअमर उजाला ब्यूरो
टाहलीवाल (ऊना)। जिला पीरियड बेसिस स्कूल टीचर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल गोंदपुर बनेहड़ा में एसएमसी यूनियन के जिला प्रधान अनबर खान, चंबा यूनियन के प्रधान सुरिंद्र कुमार और मंडी के सचिव एलसी मेहता की अगुवाई में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री को समस्याओं के बारे में भी अवगत करवाया। अध्यापक संघ ने कहा कि सरकार ने जिस तरह पंजाबी और उर्दू अध्यापकों को कॉंट्रेक्ट पॉलसी के तहत लाया है। उसी तरह एसएमसी अध्यापकों को भी इसमें लाया जाए। संघ ने कहा कि पंजाबी और उर्दू अध्यापक 2012 में पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए थे। उसी तरह 2012 में एसएमसी अध्यापक भी पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए हैं। जब सरकार ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों को कांट्रेक्ट पॉलिसी में कर दिया है तो सरकार एसएमसी अध्यापकों को भी इसी तर्ज पर पॉलिसी में लाए। अससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संघ ने बताया कि प्रदेश में 2630 एसएमसी शिक्षक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। सभी एसएमसी अध्यापक आरएंडपी नियमानुसार आरटीई के लिए जरूरी सभी शैक्षणिक योग्यता टेट आदि को पूरा करते हैं। साथ ही सभी एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा उपनिदेशकों की अनुमति पर उपमंडल अधिकारियों की अध्यक्षता में नियुक्त कमेेटी ने की है।
उन्होंने बताया कि एसएमसी अध्यापक 6 वर्षों से प्रदेश के स्कूलों में कम वेतन और बिना अवकाश के सेवाएं दे रहे हैं। कई स्कूल तो एसएमसी अध्यापकों के सहारे ही चल रहे हैं। लेकिन आज दिन तक इन शिक्षकों के लिए सरकार की ओर से कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी एसएमसी शिक्षकों को उनके ज्वाइनिंग तिथि से सेवाकाल को जोड़कर अनुबंध पॉलिसी के तहत लाया जाए। इससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। एसएमसी अध्यापकों की मांगों को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने सुना तथा कहा कि आपकी मांगों को बजट में पूरा करने का आश्वासन दिया।
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इस अवसर पर यूनियन के उपप्रधान नवदीप कुमार, महासचिव चंद्र मोहन, कैशियर प्रवेश कुमारी, एडवाइजर मोनिका द्विवेदी, पंकज कुमार, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, सुरिंद्र कुमार, मुकेश, सीमा, शिवानी, सरुचि, मोनिका, शमा, अंजना कुमारी, कंचन, आरती, अनामिका, कल्याणी समेत अन्य अध्यापक मौजूद रहे।
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टाहलीवाल (ऊना)। जिला पीरियड बेसिस स्कूल टीचर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल गोंदपुर बनेहड़ा में एसएमसी यूनियन के जिला प्रधान अनबर खान, चंबा यूनियन के प्रधान सुरिंद्र कुमार और मंडी के सचिव एलसी मेहता की अगुवाई में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री को समस्याओं के बारे में भी अवगत करवाया। अध्यापक संघ ने कहा कि सरकार ने जिस तरह पंजाबी और उर्दू अध्यापकों को कॉंट्रेक्ट पॉलसी के तहत लाया है। उसी तरह एसएमसी अध्यापकों को भी इसमें लाया जाए। संघ ने कहा कि पंजाबी और उर्दू अध्यापक 2012 में पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए थे। उसी तरह 2012 में एसएमसी अध्यापक भी पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए हैं। जब सरकार ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों को कांट्रेक्ट पॉलिसी में कर दिया है तो सरकार एसएमसी अध्यापकों को भी इसी तर्ज पर पॉलिसी में लाए। अससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संघ ने बताया कि प्रदेश में 2630 एसएमसी शिक्षक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। सभी एसएमसी अध्यापक आरएंडपी नियमानुसार आरटीई के लिए जरूरी सभी शैक्षणिक योग्यता टेट आदि को पूरा करते हैं। साथ ही सभी एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा उपनिदेशकों की अनुमति पर उपमंडल अधिकारियों की अध्यक्षता में नियुक्त कमेेटी ने की है।
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उन्होंने बताया कि एसएमसी अध्यापक 6 वर्षों से प्रदेश के स्कूलों में कम वेतन और बिना अवकाश के सेवाएं दे रहे हैं। कई स्कूल तो एसएमसी अध्यापकों के सहारे ही चल रहे हैं। लेकिन आज दिन तक इन शिक्षकों के लिए सरकार की ओर से कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी एसएमसी शिक्षकों को उनके ज्वाइनिंग तिथि से सेवाकाल को जोड़कर अनुबंध पॉलिसी के तहत लाया जाए। इससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। एसएमसी अध्यापकों की मांगों को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने सुना तथा कहा कि आपकी मांगों को बजट में पूरा करने का आश्वासन दिया।
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इस अवसर पर यूनियन के उपप्रधान नवदीप कुमार, महासचिव चंद्र मोहन, कैशियर प्रवेश कुमारी, एडवाइजर मोनिका द्विवेदी, पंकज कुमार, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, सुरिंद्र कुमार, मुकेश, सीमा, शिवानी, सरुचि, मोनिका, शमा, अंजना कुमारी, कंचन, आरती, अनामिका, कल्याणी समेत अन्य अध्यापक मौजूद रहे।