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संतों की शरण मिलना आसान नहीं: चैतन्य प्रभु
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:20 PM IST
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ऊना। जिले के चौकीमन्यार में चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में कथा ब्यास प्रकाश चैतन्य प्रभु ने अपने प्रवचनों से संगत को निहाल कर दिया। धार्मिक कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हाजिरी भरी। कथा वाचक प्रकाश चैतन्य ने कथा के सार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि संतों की संगति में रहने से मनुष्य को भगवान की कृपा मिलती है। उन्होंने कहा कि संतों की शरण मिलना आसान नहीं है। जिन्होंने जीवन में अच्छे कर्म किए होते हैं, उसे ही संतों की शरण मिलती है। उन्होंने कहा कि संत के चरणों में बैठने से जो आनंद मिलता है, वह कहीं भी प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि सुख की प्राप्ति निष्ठा, अर्पण, समर्पण और सतगुरु की वाणी को मानने से होती है। उन्होंने कहा कि संत गुलाब के फूल की तरह होते हैं, जिन पर कोई गंध असर नहीं कर सकती और गुलाब की तरह संत सुगंध ही बिखेरते हैं। उन्होंने कहा कि साधु की सरलता उसके हृदय में भक्ति और भक्ति की महक हर जगह दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि संतों में वह ताकत है कि उनके संपर्क में आने से लोहा भी पारस बन जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी संपत्ति मानवीय काया है, जिसे प्राप्त करने के लिए मनुष्य को बड़ी साधना करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का समय एक समान नहीं रहता है। जिस प्रकार मनुष्य के रंग, रूप, सेहत और आकार में भिन्नता आती है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य का समय भी बदलता रहता है। धरती में हर आने वाली चीज अपने समय के अनुसार बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि मन पर काबू करना ही एक शक्ति है।
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