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संतोषगढ़ में भगवान विश्वकर्मा की जय-जय कार
Updated Sat, 21 Oct 2017 05:26 PM IST
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संतोषगढ़ (ऊना)। स्थानीय विश्वकर्मा मंदिर में 69वें सालाना महोत्सव के दूसरे दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में मान परिवार के युवा सदस्यों ने हस्तकला से तैयार की भगवान की झांकियां एवं तकनीकी प्रदर्शनी लगाई।
कथावाचकों ने मंदिर में श्रद्धालुओं को भगवान विश्वकर्मा की कथाओं का रसपान कराया। मंदिर में देर रात तक धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। बिलासपुर के धलेट के कथावाचक भगत गुरुदेव ने कहा कि देवी-देवताओं के लिए भी भगवान विश्वकर्मा ने अपनी शिल्प कला के जरिए कई वस्तुओं का निर्माण करते थे। इसके चलते उन्हें देव शिल्पी भी कहा जाता था।
विज्ञान के युग में भी भगवान विश्वकर्मा की ओर से बनाए गए नियमों का ही पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की दयादृष्टि से ही संसार का संचालन हो रहा है।
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कथावाचकों ने मंदिर में श्रद्धालुओं को भगवान विश्वकर्मा की कथाओं का रसपान कराया। मंदिर में देर रात तक धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। बिलासपुर के धलेट के कथावाचक भगत गुरुदेव ने कहा कि देवी-देवताओं के लिए भी भगवान विश्वकर्मा ने अपनी शिल्प कला के जरिए कई वस्तुओं का निर्माण करते थे। इसके चलते उन्हें देव शिल्पी भी कहा जाता था।
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विज्ञान के युग में भी भगवान विश्वकर्मा की ओर से बनाए गए नियमों का ही पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की दयादृष्टि से ही संसार का संचालन हो रहा है।
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