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सरहदी गांवों में निजी नलकूपों का पानी नहीं पीते लोग

Tue, 24 Jul 2018 10:34 PM IST
Updated Tue, 24 Jul 2018 10:34 PM IST
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सरहदी गांवों में निजी नलकूपों का पानी नहीं पीते लोग

एसडी शर्मा

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मैहतपुर (ऊना)। पंजाब के सरहदी गांवों बीनेवाल तथा मलूकपुर गांव के लोग घरों में लगे नलकूपों का पानी नहीं पीते। वजह साफ है कि उनके निजी नलकूपों का पानी जहरीला हो चुका है। इंसान तो क्या मवेशियों को भी नलकूपों का पानी नहीं दिया जा रहा है। दूषित पानी से लोग कैंसर जैसी घातक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इस पानी का प्रयोग कपड़े धोने, साफ सफाई के लिए इस्तेमाल करने लायक रह गया है।

मंगलवार को अमर उजाला ने बीनेवाल तथा मलूकपुर गांवों का दौरा किया। यहां ज्यादातर घरों में लोगों ने आरओ लगा रखे हैं। वे उसी का पानी प्रयोग करते हैं। सूत्रों ने बताया कि इस समय बीनेवाल, मलूकपुर, पूना, मजारा को आईपीएच की सनोली स्कीम से पेयजल सप्लाई हो रहा है। लोग पीने के लिए इसी पर निर्भर हैं। निजी नलकूलों का पानी पीने लायक नहीं रहा है। बीनेवाल गांव निवासी राजीव ने बताया कि उनके आस-पड़ोस के आधा दर्जन से ज्यादा लोग अजौली से पानी पीने को लाते हैं। अभी तक उनके घरों तक पेयजल सप्लाई का बंदोबस्त नहीं हो सका है। पंजाब की जमीन पर लगे हिमाचली लोगों के नलकूलों के पानी से सिंचित होने वाली फसलें नष्ट हो जाती हैं। यहां पर फसलें ही नहीं, लोग भी कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
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क्या कहते हैं लोग
बीनेवाल के बक्शीश सिंह, सतोख सिंह, मलूकपुर से सुरेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, सुरेंद्र, सर्वजीत सिंह, उपप्रधान तरसेम सिंह गुरबचन सिंह ने बताया कि उनकी ज्यादातर जमीन पंजाब में है। उनके खेतों में पंजाब में चल रही केमिकल फैक्ट्ररी का केमिकल युक्त जहरीला पानी जमीन के काफी नीचे तक समा चुका है। जहां पर भी वह नलकूल लगाते हैं, पानी जहरीला निकलता है। जो पीने लायक तो है ही नहीं, सिंचाई के काम भी आता।
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निजी नलकूलों का पानी दूषित
मलूकपुर के उपप्रधान तरसेम सिंह ने 1992 में घर में नलकूप बोर करवाया था। पांच छह साल तक पानी का प्रयोग किया, अब सालों से इसके पानी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसी गांव के सुरेंद्र सिंह ने सन् 2000 में हैंडपंप लगवाया था। चार साल बाद ही पानी पीने लायक नहीं रहा। एक और घर में 1993-94 में हैंडपंप लगाया था। करीब 12-13 साल से इसका इस्तेमाल बंद है। जोगिंद्र सिंह पुत्र करतार सिंह का कहना है कि उनकी टांग इसी जहरीले पानी की वजह से काटनी पड़ी। सिंचाई करते वक्त कस्सी का घाव हो गया, यही जहरीली पानी घाव पर लगता रहा। उससे कैंसर बन गया। अब वह बैसाखी के सहारे चलने को मजबूर हैं।

लोगों ने जताया आभार
बीनेवाल, पूना, मलूकपुर के ग्रामीणों ने कहा कि जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने मामला उजागर किया है। लोग अभी भी इसे लेकर पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं। हालात को न सुधारा गया तो निकट भविष्य में हालात और खराब हो जाएंगे।


क्या कहता है आईपीएच
आईपीएच विभाग के एसडीओ पीके चढड ने कहा कि बीनेवाल, मलूकपुर, मजारा गांवों को जो विभाग का पानी सनोली से सप्लाई हो रहा है, उसमें कोई खोट नहीं है। हर सप्ताह पेयजल की जांच होती है। विभाग इसके लिए पूरी तरह से जागरूक है।

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