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नसबंदी फेल हुई तो मिलेंगे 30 हजार
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुखदेव सिंह ने कहा कि किसी भी पुरुष व महिला द्वारा परिवार नियोजन के तहत करवाई नसबंदी के फेल होने पर क्षतिपूर्ति के लिए 90 दिन के भीतर अपना दावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तुत किया जा सकता है। नसबंदी के फेल होने पर क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत संबंधित व्यक्ति को बतौर 30 हजार रुपये जबकि जटिलता होने पर 50 हजार तथा नसबंदी के कारण मृत्यु होने पर दो लाख तक की राशि बतौर राहत प्रदान करने का प्रावधान है। इस तरह मामलों में नसबंदी फेल होने की दर बहुत कम रहती है। एडीएम शुक्रवार को यहां स्वास्थ्य विभाग की जिला गुणवत्ता आश्वासन समिति के तहत गठित परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति उपसमिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला गुणवत्ता आश्वासन समिति में सीएमओ को समिति का कन्वीनर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा समिति में प्रसूति, शिशु रोग विशेषज्ञों के अतिरिक्त एनेस्थेटिस्ट, सर्जन, जिला कार्यक्रम अधिकारी हेल्थ, मेट्रन, जिला न्यायवादी को भी शामिल किया गया है। एडीएम ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित तौर पर परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी के लिए प्रतिमाह शिविर लगाए जा रहे हैं तथा गत वर्ष मार्च 2017 तक इन परिवार नियोजन शिविरों में जिला ऊना में लगभग 2100 व्यक्तियों की नसबंदी की गई है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश दड़ोच, जिला कार्यक्रम अधिकारी हेल्थ डॉ. सुखदीप सिंह सिद्धु, जिला न्यायवादी अशोक धीमान, डॉ. एसके नंदा, सर्जन पीयूष नंदा, शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. विपन शर्मा, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सुमित दुबे, मेट्रन परमजीत, स्वास्थ्य शिक्षक गोपाल कृष्ण, कांता ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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ऊना। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुखदेव सिंह ने कहा कि किसी भी पुरुष व महिला द्वारा परिवार नियोजन के तहत करवाई नसबंदी के फेल होने पर क्षतिपूर्ति के लिए 90 दिन के भीतर अपना दावा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तुत किया जा सकता है। नसबंदी के फेल होने पर क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत संबंधित व्यक्ति को बतौर 30 हजार रुपये जबकि जटिलता होने पर 50 हजार तथा नसबंदी के कारण मृत्यु होने पर दो लाख तक की राशि बतौर राहत प्रदान करने का प्रावधान है। इस तरह मामलों में नसबंदी फेल होने की दर बहुत कम रहती है। एडीएम शुक्रवार को यहां स्वास्थ्य विभाग की जिला गुणवत्ता आश्वासन समिति के तहत गठित परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति उपसमिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला गुणवत्ता आश्वासन समिति में सीएमओ को समिति का कन्वीनर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा समिति में प्रसूति, शिशु रोग विशेषज्ञों के अतिरिक्त एनेस्थेटिस्ट, सर्जन, जिला कार्यक्रम अधिकारी हेल्थ, मेट्रन, जिला न्यायवादी को भी शामिल किया गया है। एडीएम ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित तौर पर परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी के लिए प्रतिमाह शिविर लगाए जा रहे हैं तथा गत वर्ष मार्च 2017 तक इन परिवार नियोजन शिविरों में जिला ऊना में लगभग 2100 व्यक्तियों की नसबंदी की गई है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रकाश दड़ोच, जिला कार्यक्रम अधिकारी हेल्थ डॉ. सुखदीप सिंह सिद्धु, जिला न्यायवादी अशोक धीमान, डॉ. एसके नंदा, सर्जन पीयूष नंदा, शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. विपन शर्मा, एनेस्थेटिस्ट डॉ. सुमित दुबे, मेट्रन परमजीत, स्वास्थ्य शिक्षक गोपाल कृष्ण, कांता ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।