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Kargil Vijay Diwas : सूबेदार मेजर संजय कुमार बोले- दोबारा कारगिल हो तो मिनटों में घुटनों पर होगा पाकिस्तान

Sat, 26 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 26 Jul 2025 05:00 AM IST
सार

Kargil Vijay Diwas 2025 : कारगिल युद्ध के हीरो, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार ने अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। विस्तार से पढ़ें पूरा साक्षात्कार...

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Special conversation with Kargil war hero Param Vir Chakra winner Subedar Major Sanjay Kumar
कारगिल विजय दिवस/ परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

कारगिल युद्ध के हीरो, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार आज भी देश सेवा के उसी जज्बे के साथ सक्रिय हैं, जैसे 26 साल पहले दुर्गम मश्कोह घाटी की पहाड़ियों पर थे। ऑपरेशन विजय के दौरान प्वाइंट 4875 पर दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले जांबाज का कहना है कि अब भारत की सेना पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर है। अगर आज दोबारा कारगिल जैसा युद्ध हुआ, तो पाकिस्तान को मिनटों में घुटनों पर ला सकते हैं। फरवरी 2026 में रिटायर होने जा रहे संजय कुमार पुणे स्थित नेशनल डिफेंस अकादमी में युवाओं को देश सेवा के लिए तैयार कर रहे हैं।   खास बातचीत में उन्होंने न अनुभव साझा किए। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के मुख्य अंश।

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कारगिल युद्ध को 26 साल हो गए। उस वक्त और अब की सेना में क्या फर्क देखते हैं?
फर्क बहुत बड़ा है। कारगिल के समय हमारे पास जज्बा था। हालांकि, संसाधन सीमित थे। उस समय सोचते थे कि कैसे और किस तरह से आगे बढ़ें, दुश्मन पर स्ट्राइक करें। आज सोचने की जरूरत नहीं है। अब सेना के पास वो सब कुछ है जो एक निर्णायक युद्ध के लिए जरूरी होता है।
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आज फिर कारगिल जैसी स्थिति बने तो क्या भारत वैसी ही विजय दोहरा पाएगा?
बिल्कुल, बल्कि उससे कहीं ज्यादा मजबूती से। अगर आज दोबारा कारगिल हो तो पाकिस्तान मिनटों में घुटनों पर होगा। पुलवामा के बाद हमने देखा कि हमारी सेना ने 10 दिन में जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया कि वह संभल नहीं पाया।
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आप फरवरी 2026 में रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद की क्या योजना है?
एक सैनिक कभी रिटायर नहीं होता, सिर्फ नाम से होता है। देश की सेवा जारी रखूंगा। एक्स-सर्विसमेन भी एक मोर्चे पर लड़ते हैं, समाज की समस्याओं को लेकर। देश प्रेम से जीने का वादा खुद से किया है और युवाओं को भी यही सीख दूंगा।

आज के युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
युवाओं के हाथ में देश का भविष्य है। अगर हम उन्हें मानसिक रूप से तैयार करें, तो देश कभी असुरक्षित नहीं होगा। उन्हें अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति का पाठ पढ़ाना जरूरी है। पुणे की नेशनल डिफेंस अकादमी में युवाओं को यही सिखा रहा हूं, देश से बड़ा कुछ नहीं।
 

आपने जिस तरह की बहादुरी दिखाई, वो पल आज भी याद आते होंगे?
चार जुलाई 1999 का दिन मेरे लिए सबसे अहम है। प्वाइंट 4875 पर भारी फायरिंग हो रही थी, हमारी यूनिट आगे नहीं बढ़ पा रही थी। मैंने तय किया कि रुकना नहीं है। तीन घुसपैठियों को ढेर किया, खुद भी गंभीर रूप से घायल हुआ, लेकिन पीछे नहीं हटा। दुश्मन की यूनिवर्सल मशीन गन उठाकर मैंने पीछे हटते हुए पाक सैनिकों को भी मारा। वो पल सिर्फ युद्ध नहीं, देश के लिए जीने- मरने का संकल्प था।

अपने परिवार को लेकर कुछ बताइए?
माता-पिता हैं, पत्नी हैं और दो बच्चे। बेटा कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर चुका है, बेटी स्नातक के बाद क्रिमिनोलॉजी में एमए करेगी। मेरा परिवार ही मेरी ताकत है। जब मैं कारगिल में लहूलुहान होकर भी लड़ रहा था, तो मन में सिर्फ देश नहीं, अपने परिवार की छवि भी थी।  

क्या कभी उस दिन का अफसोस होता है जब गोली लगने से घायल हो गए?
वो मेरे जीवन का गौरवशाली दिन था। उस दिन मैंने सिर्फ दुश्मन नहीं, डर को भी हराया। घायल होकर भी पीछे नहीं हटा, मेरा खून देश की मिट्टी के काम आया। 
 
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