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ऑनलाइन पढ़ाई से घटी विद्यार्थियों की लिखने की क्षमता
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ोलन मालरोड पर कन्या विद्यालय में पढ़ाई करते हुए। संवाद
- फोटो : SOLAN
सोलन। कोरोना काल में लगी ऑनलाइन कक्षाओं ने विद्यार्थियों की लिखने और बोलने की क्षमता कम कर दी है। इस बाधा से लिखने के लिए विद्यार्थियों को काफी समय लग रहा है। इसी के साथ हिंदी पढ़ने में बच्चे हिचकिचाने लगे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं में लिखने का काम कम होने से कई स्कूलों के विद्यार्थियों में ऐसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। हालांकि अध्यापक इस बात को समझते हुए विद्यार्थियों को लिखने और बोलने की प्रेक्टिस करवाने में जुटे हैं।
कोरोना काल के बीच ऑनलाइन कक्षाओं ने विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान तो दिया लेकिन स्कूल खुलने से अब विद्यार्थियों को खासी परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। बैठने के लिए बच्चों दिक्कतें आ रही है। अध्यापकों के अनुसार छात्र लिखने और किसी चीज को पढ़ने से ज्यादा उसे सुनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। विद्यार्थी सरकार के स्कूल खोलने के निर्णय से खुश हैं।
रोजाना स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ने लगी है। वर्तमान में दसवीं से 12वीं कक्षा तक ही स्कूल खुले हैं। इस दौरान अध्यापक ऑनलाइन कक्षाओं की फीडबैक ले रहे हैं जिसमें विद्यार्थी कई समस्याओं से अवगत करवा रहे हैं। मैनुअल कक्षाओं की पढ़ाई को ही बेहतर बता रहे हैं।
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विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूलों में कक्षाओं को लगाने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और अन्य छात्रों के साथ बैठने से बहुत सी बातें पता लगती है। उनका कहना है कि मैनुअल कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड से लिखने से लिखने की स्पीड तेज होती है लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं ने काफी चीजों में बाधा पैदा की।
ऑनलाइन कक्षाओं से मिला छुटकारा
देवठी स्कूल के वाणिज्य संकाय के अध्यापक यशवंत चौहान ने बताया कि कोरोना में सभी विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं में लिखने के लिए कहा जाता था। मैनुअल कक्षाओं की तरह ही लिखित होम वर्क दिया गया। अब स्कूल खुलने से विद्यार्थी ओर एक्टिव हुए हैं और उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं से छुटकारा मिला है। विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता बढ़ी है।
जीपीएस धारआंजी स्कूल के अध्यापक तपेंद्र सिंह कंवर ने बताया कि एक लंबी अवधि के बाद खुले स्कूलों में विद्यार्थियों में कई परेशानी देखी जा रही है। छात्र कई चीजें भूल चुकें हैं। अधिक समय तक छात्र बैठ नहीं पा रहे हैं। इसी के साथ हिंदी का पैरा पढ़ने में छात्र अधिक समय लगाने लगे हैं।
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कोरोना काल के बीच ऑनलाइन कक्षाओं ने विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान तो दिया लेकिन स्कूल खुलने से अब विद्यार्थियों को खासी परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। बैठने के लिए बच्चों दिक्कतें आ रही है। अध्यापकों के अनुसार छात्र लिखने और किसी चीज को पढ़ने से ज्यादा उसे सुनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। विद्यार्थी सरकार के स्कूल खोलने के निर्णय से खुश हैं।
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रोजाना स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ने लगी है। वर्तमान में दसवीं से 12वीं कक्षा तक ही स्कूल खुले हैं। इस दौरान अध्यापक ऑनलाइन कक्षाओं की फीडबैक ले रहे हैं जिसमें विद्यार्थी कई समस्याओं से अवगत करवा रहे हैं। मैनुअल कक्षाओं की पढ़ाई को ही बेहतर बता रहे हैं।
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विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूलों में कक्षाओं को लगाने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और अन्य छात्रों के साथ बैठने से बहुत सी बातें पता लगती है। उनका कहना है कि मैनुअल कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड से लिखने से लिखने की स्पीड तेज होती है लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं ने काफी चीजों में बाधा पैदा की।
ऑनलाइन कक्षाओं से मिला छुटकारा
देवठी स्कूल के वाणिज्य संकाय के अध्यापक यशवंत चौहान ने बताया कि कोरोना में सभी विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं में लिखने के लिए कहा जाता था। मैनुअल कक्षाओं की तरह ही लिखित होम वर्क दिया गया। अब स्कूल खुलने से विद्यार्थी ओर एक्टिव हुए हैं और उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं से छुटकारा मिला है। विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता बढ़ी है।
जीपीएस धारआंजी स्कूल के अध्यापक तपेंद्र सिंह कंवर ने बताया कि एक लंबी अवधि के बाद खुले स्कूलों में विद्यार्थियों में कई परेशानी देखी जा रही है। छात्र कई चीजें भूल चुकें हैं। अधिक समय तक छात्र बैठ नहीं पा रहे हैं। इसी के साथ हिंदी का पैरा पढ़ने में छात्र अधिक समय लगाने लगे हैं।