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Solan News: ज्वार के लड्डू-बिस्कुट से महिलाओं ने खोले कमाई के नए रास्ते
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सोलन के मालरोड लगाए स्टॉल में काम करती स्वयं सहायता समूह की महिला। संवाद
- फोटो : बांदा-बहराइच राजमार्ग पर हादसे में क्षतिग्रस्त वैन।
महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ने मेलों और मालरोड स्टॉल से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ाया कदम
महिलाएं प्रदेश के मेलों में जाकर लगा रहीं स्टॉल, तेजी से बढ़ रही डिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश भर के मेलों में अब सोलन जिले में बन रहे ज्वार के लड्डू और बिस्कुट की खासी मांग देखी जा रही है। शहर के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने प्रदेश के मेलों में स्टॉल लगाना शुरू किया है, जिससे उनकी कमाई में तेजी आई है और वे आत्मनिर्भर बनकर अपने घर चला रही हैं। शहर के वार्ड नंबर 3 की स्वयं सहायता समूह लक्ष्मी की प्रधान आशा रानी ने बताया कि वह मालरोड पर हर शुक्रवार और शनिवार को स्टॉल लगाती हैं। स्टॉल में घर में बनाए गए ज्वार के लड्डू, बिस्कुट के अलावा सरसों का साग और मक्की की रोटी भी बिकती है। लड्डू और बिस्कुट घर पर तैयार किए जाते हैं, जबकि साग और मक्की की रोटी स्टॉल पर ही बनाई जाती हैं। समूह में आसपास के क्षेत्र की 10 और महिलाएं भी जुड़ी हैं। जिन्हें उत्पाद बनाने का अनुभव नहीं है, उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है। सभी महिलाएं मिलकर काम करती हैं और आजीविका कमाती हैं। स्टॉल से दो दिनों में लगभग तीन हजार रुपये की कमाई होती है, इसके अलावा ऑनलाइन ऑर्डर भी आते हैं। आने वाले समय में स्टॉल पर कप-केक और ब्रेड भी बेचे जाएंगे और इनकी तैयारी के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इससे अन्य महिलाएं भी इस पहल से जुड़कर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगी।
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महिलाएं प्रदेश के मेलों में जाकर लगा रहीं स्टॉल, तेजी से बढ़ रही डिमांड
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश भर के मेलों में अब सोलन जिले में बन रहे ज्वार के लड्डू और बिस्कुट की खासी मांग देखी जा रही है। शहर के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने प्रदेश के मेलों में स्टॉल लगाना शुरू किया है, जिससे उनकी कमाई में तेजी आई है और वे आत्मनिर्भर बनकर अपने घर चला रही हैं। शहर के वार्ड नंबर 3 की स्वयं सहायता समूह लक्ष्मी की प्रधान आशा रानी ने बताया कि वह मालरोड पर हर शुक्रवार और शनिवार को स्टॉल लगाती हैं। स्टॉल में घर में बनाए गए ज्वार के लड्डू, बिस्कुट के अलावा सरसों का साग और मक्की की रोटी भी बिकती है। लड्डू और बिस्कुट घर पर तैयार किए जाते हैं, जबकि साग और मक्की की रोटी स्टॉल पर ही बनाई जाती हैं। समूह में आसपास के क्षेत्र की 10 और महिलाएं भी जुड़ी हैं। जिन्हें उत्पाद बनाने का अनुभव नहीं है, उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है। सभी महिलाएं मिलकर काम करती हैं और आजीविका कमाती हैं। स्टॉल से दो दिनों में लगभग तीन हजार रुपये की कमाई होती है, इसके अलावा ऑनलाइन ऑर्डर भी आते हैं। आने वाले समय में स्टॉल पर कप-केक और ब्रेड भी बेचे जाएंगे और इनकी तैयारी के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इससे अन्य महिलाएं भी इस पहल से जुड़कर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगी।