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Solan News: चीड़ की पत्तियों से महिलाओं ने तलाशी स्वरोजगार की राह
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धर्मपुर कॉलेज में चीड़ के उत्पादों की सजाई गई प्रदर्शनी। स्रोत: संगठन
धर्मपुर काॅलेज में किया प्रदर्शनी का आयोजन, हुनर देख कसौली कोर्ट के जज भी हुए कायल
चीड़ की पत्तियों से लालटेन, चपाती बॉक्स समेत डेढ़ दर्जन प्रोडक्ट किए तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के जरिये अपनी आजीविका का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों जिन्हें अक्सर जंगलों में आग का कारण माना जाता है, उसे धर्मपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कमाई का जरिया बना लिया है। धर्मपुर कॉलेज में आयोजित एक दिवसीय जागरूकता एवं कौशल विकास शिविर में महिलाओं के इस हुनर को देख हर कोई दंग रह गया। स्वयं सहायता समूह की सदस्य निशा, पूजा, अदिति और नेहा ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए बताया कि वे सातों दिन इन उत्पादों को तैयार करती हैं। महिलाओं ने चीड़ की पत्तियों से आकर्षक लालटेन और स्टोरेज बॉक्स, चपाती बॉक्स और पेन स्टैंड,ज्वेलरी बॉक्स,भगवान कृष्ण की पालकी और सुंदर झूले तैयार किए हैं। इन उत्पादों को प्रदेश सरकार की हिम ईरा मार्ट योजना के तहत बाजार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। इस अवसर पर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. सुनीता गोयल सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
हुनर को छुपाएं नहीं, उसे आजादी दें
शिविर में मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे कसौली कोर्ट के न्यायाधीश अशोक कुमार ने महिलाओं के उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा, अपने हुनर को छुपाएं नहीं, बल्कि उसे उड़ान दें। समाज को अपनी प्रतिभा दिखाएं और पाइन नीडल्स जैसे स्थानीय संसाधनों से वैल्यू-एडेड उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनें।
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चीड़ की पत्तियों से लालटेन, चपाती बॉक्स समेत डेढ़ दर्जन प्रोडक्ट किए तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के जरिये अपनी आजीविका का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों जिन्हें अक्सर जंगलों में आग का कारण माना जाता है, उसे धर्मपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कमाई का जरिया बना लिया है। धर्मपुर कॉलेज में आयोजित एक दिवसीय जागरूकता एवं कौशल विकास शिविर में महिलाओं के इस हुनर को देख हर कोई दंग रह गया। स्वयं सहायता समूह की सदस्य निशा, पूजा, अदिति और नेहा ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए बताया कि वे सातों दिन इन उत्पादों को तैयार करती हैं। महिलाओं ने चीड़ की पत्तियों से आकर्षक लालटेन और स्टोरेज बॉक्स, चपाती बॉक्स और पेन स्टैंड,ज्वेलरी बॉक्स,भगवान कृष्ण की पालकी और सुंदर झूले तैयार किए हैं। इन उत्पादों को प्रदेश सरकार की हिम ईरा मार्ट योजना के तहत बाजार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। इस अवसर पर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. सुनीता गोयल सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
हुनर को छुपाएं नहीं, उसे आजादी दें
शिविर में मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे कसौली कोर्ट के न्यायाधीश अशोक कुमार ने महिलाओं के उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा, अपने हुनर को छुपाएं नहीं, बल्कि उसे उड़ान दें। समाज को अपनी प्रतिभा दिखाएं और पाइन नीडल्स जैसे स्थानीय संसाधनों से वैल्यू-एडेड उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनें।
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