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Solan News: पहाड़ी व्यंजनों को महिलाएं दूसरे राज्यों में भी कर रहीं लोकप्रिय
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मेलों में लगा रहीं स्टॉल
मालरोड पर लगे स्टॉल में सिड्डू और मालपुड़े लोग कर रहे पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर के मालरोड पर स्टॉल लगाकर पहाड़ी व्यंजन परोसने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पाद अब बाहरी राज्यों में भी पहचान बना रहे हैं। दिल्ली, जयपुर सहित देश के अन्य राज्यों में आयोजित मेलों में इन महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। यहां तैयार किए जा रहे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
अब तक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दिल्ली और जयपुर में स्टॉल लगाकर पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लोगों को चखा चुकी हैं। खासतौर पर मालपुड़े और सिड्डू को लोगों ने काफी सराहा। इसके अलावा घर में तैयार अचार, जैम, घी और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की भी अच्छी मांग रही है। अब अन्य राज्यों से भी इन महिलाओं को बुलावा मिल रहा है।
सोलन के मालरोड पर हर शुक्रवार और शनिवार को स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्टॉल लगाकर व्यंजन परोसती हैं। इनमें मालपुड़े, सिड्डू, मक्की की रोटी और सरसों का साग प्रमुख हैं। इन्हें खरीदने के लिए लोग खास तौर पर पहुंचते हैं। शहर से सटी पड़ग पंचायत की सरस्वती स्वयं सहायता समूह की ओर से मालरोड पर नियमित रूप से स्टॉल लगाया जाता है। स्टॉल संचालक ऊषा ने बताया कि समूह लंबे समय से मालरोड सहित अन्य स्थानों पर खाद्य पदार्थ बेच रहा है। इस पहल से करीब एक दर्जन स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं, जिनमें लगभग 130 महिलाएं शामिल हैं। सभी महिलाएं जिले के पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी आजीविका भी सुदृढ़ कर रही हैं।
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मालरोड पर सरस्वती समूह के साथ रोशनी और एकता स्वयं सहायता समूह ने भी अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। सभी समूह अलग-अलग पारंपरिक व्यंजन और खाद्य उत्पाद बेच रहे हैं। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है और स्थानीय व्यंजनों को भी नई पहचान मिल रही है।
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मालरोड पर लगे स्टॉल में सिड्डू और मालपुड़े लोग कर रहे पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शहर के मालरोड पर स्टॉल लगाकर पहाड़ी व्यंजन परोसने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पाद अब बाहरी राज्यों में भी पहचान बना रहे हैं। दिल्ली, जयपुर सहित देश के अन्य राज्यों में आयोजित मेलों में इन महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। यहां तैयार किए जा रहे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
अब तक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दिल्ली और जयपुर में स्टॉल लगाकर पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लोगों को चखा चुकी हैं। खासतौर पर मालपुड़े और सिड्डू को लोगों ने काफी सराहा। इसके अलावा घर में तैयार अचार, जैम, घी और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की भी अच्छी मांग रही है। अब अन्य राज्यों से भी इन महिलाओं को बुलावा मिल रहा है।
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सोलन के मालरोड पर हर शुक्रवार और शनिवार को स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्टॉल लगाकर व्यंजन परोसती हैं। इनमें मालपुड़े, सिड्डू, मक्की की रोटी और सरसों का साग प्रमुख हैं। इन्हें खरीदने के लिए लोग खास तौर पर पहुंचते हैं। शहर से सटी पड़ग पंचायत की सरस्वती स्वयं सहायता समूह की ओर से मालरोड पर नियमित रूप से स्टॉल लगाया जाता है। स्टॉल संचालक ऊषा ने बताया कि समूह लंबे समय से मालरोड सहित अन्य स्थानों पर खाद्य पदार्थ बेच रहा है। इस पहल से करीब एक दर्जन स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं, जिनमें लगभग 130 महिलाएं शामिल हैं। सभी महिलाएं जिले के पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी आजीविका भी सुदृढ़ कर रही हैं।
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मालरोड पर सरस्वती समूह के साथ रोशनी और एकता स्वयं सहायता समूह ने भी अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। सभी समूह अलग-अलग पारंपरिक व्यंजन और खाद्य उत्पाद बेच रहे हैं। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है और स्थानीय व्यंजनों को भी नई पहचान मिल रही है।