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धर्म की हानि होने पर लेते हैं राम व कृष्ण अवतार : देवकीनंदन
Sun, 01 Nov 2026 01:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 01 Nov 2026 01:05 AM IST
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सोलन शहर के सब्जी मंडी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
सोलन में भागवत कथा संपन्न, देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतारों सहित कई धार्मिक प्रसंग सुनाए। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इस दौरान उन्होंने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सनातन बोर्ड बनाने की मांग भी उठाई।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भावुक होकर देवकीनंदन ठाकुर को विदाई दी। सात दिनों तक चले आयोजन में पंडाल श्रीकृष्ण के जयघोष और भजन-कीर्तन से गूंजता रहा। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्ति का उपयोग सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और जनकल्याण के कार्यों में होना चाहिए। इससे अस्पतालों का निर्माण, जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सुविधाएं और सनातनी बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सकती है।
उन्होंने बच्चों को मोबाइल पर अधिक समय बर्बाद न करने और अच्छी दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। साथ ही सच्ची मित्रता का उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के संबंधों को बताते हुए कहा कि संस्कारवान संतान ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है।
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देवकीनंदन ठाकुर ने देश में सनातन बोर्ड के गठन पर जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से बच्चों और युवाओं को वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया जाना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी में धर्म के प्रति जागरूकता, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होगी। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को बचपन से ही कथा और सत्संग में शामिल करने का आह्वान किया।
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सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतारों सहित कई धार्मिक प्रसंग सुनाए। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इस दौरान उन्होंने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सनातन बोर्ड बनाने की मांग भी उठाई।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भावुक होकर देवकीनंदन ठाकुर को विदाई दी। सात दिनों तक चले आयोजन में पंडाल श्रीकृष्ण के जयघोष और भजन-कीर्तन से गूंजता रहा। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्ति का उपयोग सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और जनकल्याण के कार्यों में होना चाहिए। इससे अस्पतालों का निर्माण, जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सुविधाएं और सनातनी बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सकती है।
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उन्होंने बच्चों को मोबाइल पर अधिक समय बर्बाद न करने और अच्छी दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। साथ ही सच्ची मित्रता का उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के संबंधों को बताते हुए कहा कि संस्कारवान संतान ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है।
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देवकीनंदन ठाकुर ने देश में सनातन बोर्ड के गठन पर जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से बच्चों और युवाओं को वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया जाना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी में धर्म के प्रति जागरूकता, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होगी। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को बचपन से ही कथा और सत्संग में शामिल करने का आह्वान किया।