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Solan News: बद्दी व नालागढ़ के पहाड़ी क्षत्रों में बिना बारिश गेहूं की फसल बर्बाद
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नालागढ़ के मितियां पंचायत में बारिश ने होने से पूरी तरह से सूखी गेंहू की फसल- संवाद
- फोटो : महिला की हत्या के बाद चर्दा सीएचसी पर मौजूद परिजन।
किसानों की मेहनत हुई बेकार, बीज व खाद का भी नुकसान
पशुचारे की भी सताने लगी चिंता
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। बद्दी और नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। किसानों की मेहनत, बीज और खाद का खर्च बर्बाद हो गया है। अब स्थिति यह है कि सूखे के कारण जो फसल उगाई थी, वह पशु चारा भी नहीं बन पाएगी। नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र की पचास पंचायतों में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। नवंबर में, जब जमीन में नमी थी, तब किसानों ने गेहूं की बिजाई की थी, लेकिन यह उम्मीद करके कि सर्दियों में बारिश होगी। हालांकि गेहूं की फसल तो उगी, लेकिन बारिश न होने से उसकी ग्रोथ पूरी नहीं हो पाई। पिछले तीन महीनों से बारिश का इंतजार करते हुए गेहूं की फसल मुरझा गई है। अब तक किसानों को उम्मीद थी कि अगर गेहूं की फसल नहीं हुई तो कम से कम पशुओं के लिए चारा मिल जाएगा, लेकिन अब यह उम्मीद भी खत्म होती नजर आ रही है। सरोर पंचायत के प्रधान धर्मपाल चंदेल ने बताया कि बारिश न होने के कारण किसानों की नकदी फसलें भी चौपट हो गईं, जो सीजन खत्म होने से पहले ही सूख गईं। अब किसानों को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजदूरी करनी पड़ेगी। कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने कहा कि बारिश की कमी के कारण असिचिंत क्षेत्र में फसलें बर्बाद हो गई हैं। यदि अब भी बारिश नहीं होती है, तो यहां के किसानों को पशुचारे की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
70 फीसदी किसानों ने सूखे में ही गेहूं की बिजाई की
मित्तियां पंचायत के नानक चंद चंदेल, भाग सिंह चंदेल, जगदेव चंद, तेजपाल, तमडोह के धर्मपाल, लक्ष्मी सिंह, गरलोह के कमल कुमार शर्मा और मैथल के गुरदास चंदेल ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र के 70 फीसदी किसानों ने सूखे में ही गेहूं की फसल उगाई थी, यह सोचकर कि सर्दियों में बारिश होगी। लेकिन पूरी सर्दी मौसम बिना बारिश के निकल गई। जो गेहूं उगी भी थी, वह भी कोहरे की भेंट चढ़ गई। अब खेत पूरी तरह से खाली हो गए हैं और जिनका मुख्य जीविकोपार्जन कृषि पर निर्भर था, उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
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पशुचारे की भी सताने लगी चिंता
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। बद्दी और नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। किसानों की मेहनत, बीज और खाद का खर्च बर्बाद हो गया है। अब स्थिति यह है कि सूखे के कारण जो फसल उगाई थी, वह पशु चारा भी नहीं बन पाएगी। नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र की पचास पंचायतों में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। नवंबर में, जब जमीन में नमी थी, तब किसानों ने गेहूं की बिजाई की थी, लेकिन यह उम्मीद करके कि सर्दियों में बारिश होगी। हालांकि गेहूं की फसल तो उगी, लेकिन बारिश न होने से उसकी ग्रोथ पूरी नहीं हो पाई। पिछले तीन महीनों से बारिश का इंतजार करते हुए गेहूं की फसल मुरझा गई है। अब तक किसानों को उम्मीद थी कि अगर गेहूं की फसल नहीं हुई तो कम से कम पशुओं के लिए चारा मिल जाएगा, लेकिन अब यह उम्मीद भी खत्म होती नजर आ रही है। सरोर पंचायत के प्रधान धर्मपाल चंदेल ने बताया कि बारिश न होने के कारण किसानों की नकदी फसलें भी चौपट हो गईं, जो सीजन खत्म होने से पहले ही सूख गईं। अब किसानों को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजदूरी करनी पड़ेगी। कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने कहा कि बारिश की कमी के कारण असिचिंत क्षेत्र में फसलें बर्बाद हो गई हैं। यदि अब भी बारिश नहीं होती है, तो यहां के किसानों को पशुचारे की भी गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
70 फीसदी किसानों ने सूखे में ही गेहूं की बिजाई की
मित्तियां पंचायत के नानक चंद चंदेल, भाग सिंह चंदेल, जगदेव चंद, तेजपाल, तमडोह के धर्मपाल, लक्ष्मी सिंह, गरलोह के कमल कुमार शर्मा और मैथल के गुरदास चंदेल ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र के 70 फीसदी किसानों ने सूखे में ही गेहूं की फसल उगाई थी, यह सोचकर कि सर्दियों में बारिश होगी। लेकिन पूरी सर्दी मौसम बिना बारिश के निकल गई। जो गेहूं उगी भी थी, वह भी कोहरे की भेंट चढ़ गई। अब खेत पूरी तरह से खाली हो गए हैं और जिनका मुख्य जीविकोपार्जन कृषि पर निर्भर था, उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।

नालागढ़ के मितियां पंचायत में बारिश ने होने से पूरी तरह से सूखी गेंहू की फसल- संवाद- फोटो : महिला की हत्या के बाद चर्दा सीएचसी पर मौजूद परिजन।
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