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Solan News: वार्ड बना दिया स्टोर, एक हफ्ते में आंखों के ऑपरेशन की हो रही तैयारी
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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एक साल से बंद है वार्ड
मशीनों को भी आने में भी लग सकता है एक माह से अधिक का समय
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद आंखों के ऑपरेशन दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है, लेकिन वार्ड और आवश्यक मशीनों की कमी इस योजना के सामने बड़ी बाधा बन गई है। अस्पताल प्रशासन ऑपरेशन थियेटर (ओटी) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने के लिए नेत्र वार्ड उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल का नेत्र वार्ड करीब एक वर्ष से बंद पड़ा है। वर्तमान में इस वार्ड का उपयोग स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के पास नेत्र रोगियों के लिए कोई वैकल्पिक वार्ड भी उपलब्ध नहीं है, जिससे ऑपरेशन शुरू होने से पहले मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर ओटी शुरू करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन सफाई के दौरान पता चला कि लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण कई जरूरी मशीनें खराब हो चुकी हैं। इसके बाद सरकार को नई मशीनें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि नई मशीनें आने में एक माह या उससे अधिक समय लग सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन मशीनों के बिना नेत्र रोग संबंधी ऑपरेशन संभव नहीं हैं।
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ऑपरेशन के लिए शिमला और चंडीगढ़ भेजे जा रहे मरीज
अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा बंद होने के कारण मरीजों को आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है। वहां भी ऑपरेशन के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची होने से मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर यह सुविधा शुरू होने से जिले के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
फेको मशीन की भी की मांग
अस्पताल प्रशासन ने सरकार को आधुनिक फेको मशीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी भेजा है। यह मांग काफी समय से लंबित है। नई मशीन मिलने के बाद मोतियाबिंद सहित अन्य नेत्र रोगों के आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों के साथ चिकित्सकों को भी सुविधा मिलेगी।
एक वर्ष से बंद पड़े नेत्र वार्ड में फिलहाल स्टोर का सामान रखा गया है। वार्ड को खाली कर दोबारा मरीजों के लिए तैयार किया जाएगा। ऑपरेशन शुरू करने के लिए आवश्यक मशीनों की मांग सरकार को भेज दी गई है और इनके जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है।
-डॉ. संदीप जैन, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक
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मशीनों को भी आने में भी लग सकता है एक माह से अधिक का समय
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद आंखों के ऑपरेशन दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है, लेकिन वार्ड और आवश्यक मशीनों की कमी इस योजना के सामने बड़ी बाधा बन गई है। अस्पताल प्रशासन ऑपरेशन थियेटर (ओटी) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने के लिए नेत्र वार्ड उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल का नेत्र वार्ड करीब एक वर्ष से बंद पड़ा है। वर्तमान में इस वार्ड का उपयोग स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के पास नेत्र रोगियों के लिए कोई वैकल्पिक वार्ड भी उपलब्ध नहीं है, जिससे ऑपरेशन शुरू होने से पहले मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था करना चुनौती बना हुआ है।
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प्रशासन की ओर से एक सप्ताह के भीतर ओटी शुरू करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन सफाई के दौरान पता चला कि लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण कई जरूरी मशीनें खराब हो चुकी हैं। इसके बाद सरकार को नई मशीनें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि नई मशीनें आने में एक माह या उससे अधिक समय लग सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन मशीनों के बिना नेत्र रोग संबंधी ऑपरेशन संभव नहीं हैं।
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ऑपरेशन के लिए शिमला और चंडीगढ़ भेजे जा रहे मरीज
अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन की सुविधा बंद होने के कारण मरीजों को आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है। वहां भी ऑपरेशन के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची होने से मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर यह सुविधा शुरू होने से जिले के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
फेको मशीन की भी की मांग
अस्पताल प्रशासन ने सरकार को आधुनिक फेको मशीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी भेजा है। यह मांग काफी समय से लंबित है। नई मशीन मिलने के बाद मोतियाबिंद सहित अन्य नेत्र रोगों के आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन किए जा सकेंगे, जिससे मरीजों के साथ चिकित्सकों को भी सुविधा मिलेगी।
एक वर्ष से बंद पड़े नेत्र वार्ड में फिलहाल स्टोर का सामान रखा गया है। वार्ड को खाली कर दोबारा मरीजों के लिए तैयार किया जाएगा। ऑपरेशन शुरू करने के लिए आवश्यक मशीनों की मांग सरकार को भेज दी गई है और इनके जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है।
-डॉ. संदीप जैन, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक