{"_id":"65d604eccc36c19a390cc0fb","slug":"walking-among-snow-covered-hills-toy-train-railway-minister-shared-video-solan-news-c-176-1-ssml1042-116803-2024-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच चलती\nटॉय ट्रेन, रेल मंत्री ने किया वीडियो शेयर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच चलती टॉय ट्रेन, रेल मंत्री ने किया वीडियो शेयर
Wed, 21 Feb 2024 07:43 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 21 Feb 2024 07:43 PM IST
विज्ञापन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने फैस्बुक एकाउंट में पोस्ट की वीडीयो। संवाद
-खास खबर-
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में डाला वीडियो
पर्यटक कर रहे लाइक और शेयर, अलग-अलग स्टेशनों में किया गया है शूट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कालका-शिमला विश्व धरोहर रेल लाइन पर बर्फ से ढकी पहाड़ियों बीच गुजरती हुई ट्रेन का वीडियो लोगों और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। इसी वीडियो को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर किया है। जिसे लोग लाइक और शेयर भी कर रहे हैं। इसी के साथ रेल मंत्रालय भारत सरकार ने भी वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो को सोशल मीडिया अकाउंट में डालने के बाद लोग भी कमेंट और लाइक कर रहे हैं।
खास बात यह है कि इस वीडियो को रेल मंत्रालय के द्वारा स्वयं बनाया गया है अलग-अलग स्टेशनों और क्षेत्र से गुजरती हुई इस ट्रेन के दृश्य लोगों के दिल को खूब भा रहे हैं। हसीन वादियों के बीच रेंगते हुए निकल रही है। यह दृश्य फरवरी माह में हुई बर्फबारी के बीच दर्शाए गए हैं। गौर है कि फरवरी माह की शुरुआत में ही प्रदेश में शिमला समेत अन्य ऊपरी क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी हुई थी। इस दौरान सैलानियों की संख्या भी बढ़ गई थी। इसी बीच रेलवे बोर्ड ने बर्फबारी का चलती ट्रेन में वीडियो शूट किया। जिसे पर्यटकों को लुभाने के लिए अब रेलवे बोर्ड ने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किया है।
इनसेट
काफी पुराना है रेलवे का इतिहास
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग का इतिहास काफी पुराना है। 9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 120 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन में आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
विज्ञापन
इनसेट
103 सुरंग मोह लेती है मन
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नेरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है। रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था।
विज्ञापन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में डाला वीडियो
पर्यटक कर रहे लाइक और शेयर, अलग-अलग स्टेशनों में किया गया है शूट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कालका-शिमला विश्व धरोहर रेल लाइन पर बर्फ से ढकी पहाड़ियों बीच गुजरती हुई ट्रेन का वीडियो लोगों और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। इसी वीडियो को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर किया है। जिसे लोग लाइक और शेयर भी कर रहे हैं। इसी के साथ रेल मंत्रालय भारत सरकार ने भी वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो को सोशल मीडिया अकाउंट में डालने के बाद लोग भी कमेंट और लाइक कर रहे हैं।
खास बात यह है कि इस वीडियो को रेल मंत्रालय के द्वारा स्वयं बनाया गया है अलग-अलग स्टेशनों और क्षेत्र से गुजरती हुई इस ट्रेन के दृश्य लोगों के दिल को खूब भा रहे हैं। हसीन वादियों के बीच रेंगते हुए निकल रही है। यह दृश्य फरवरी माह में हुई बर्फबारी के बीच दर्शाए गए हैं। गौर है कि फरवरी माह की शुरुआत में ही प्रदेश में शिमला समेत अन्य ऊपरी क्षेत्रों में बारिश व बर्फबारी हुई थी। इस दौरान सैलानियों की संख्या भी बढ़ गई थी। इसी बीच रेलवे बोर्ड ने बर्फबारी का चलती ट्रेन में वीडियो शूट किया। जिसे पर्यटकों को लुभाने के लिए अब रेलवे बोर्ड ने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किया है।
विज्ञापन
इनसेट
काफी पुराना है रेलवे का इतिहास
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग का इतिहास काफी पुराना है। 9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 120 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन में आता है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
विज्ञापन
इनसेट
103 सुरंग मोह लेती है मन
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नेरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है। रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था।