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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Villagers from Solan and nearby areas offer new crops at feet of Goddess Maa Shoolini during fair ever year

मां शूलिनी के दरबार में छमाही की नई पैदावार अर्पित करते हैं सोलन क्षेत्र के ग्रामीण

Sat, 25 Jun 2022 12:03 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 12:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। मां शूलिनी और उनकी बहन के एक साथ दर्शन का हजारों श्रद्धालुओं को कोविड महामारी के चलते दो साल बाद मौका मिला। शूलिनी मां क्षेत्र की कुल देवी है। राजा दुर्गा सिंह ने मां शूलिनी की प्रतिमा को सोलन में स्थापित किया था।
इसके बाद शूलिनी मेला मनाया जा रहा है। हालांकि अब मेला मनाने की परंपरा में काफी अंतर आ चुका है। स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी मेले में मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मेले का हर वर्ग को इंतजार रहता है। छोटे-बड़े सभी कारोबारियों का इस दौरान अच्छा कारोबार होता है।
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पहले यह मेला माता के मंदिर में ही मनाया जाता था। इसमें गांव के लोग अपनी छमाही की नई पैदावार के दो पाथे यानी चार सेर अनाज मंदिर में चढ़ाते थे। इसके अतिरिक्त मंदिर में दूध-घी तथा श्रद्धा के अनुसार धन भी चढ़ाया जाता था। समय के साथ मेले का स्वरूप भी बदल गया है। मंदिरों के पुजारियों समेत अन्य कल्याणों का मेले में भाग लेना जरूरी है।
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इस दौरान शोभा यात्रा में मां शूलिनी अपनी बड़ी बहन और अपने पुराने निवास स्थान गंज बाजार में एक दिन ठहरती है। पहले इस मेले को सोलनी रा मेला कहा जाता था लेकिन बाद में इसे राज्य स्तरीय मेला घोषित किया गया और इसका नामकरण शूलिनी मेला हो गया। मां शूलिनी की पूजा-अर्चना सनातन विधि से की जाती है। मंदिर में माता को नारियल, मिठाई, दूध, घी, अनाज और धूप आदि चढ़ाया जाता है।

मेले में भंडारे का प्रचलन भी बढ़ा
पहले शूलिनी मेले के दौरान भंडारों का प्रचलन कम था। मां के निवास स्थान गंज बाजार में ही छोटा सा मेला होता था। यहां पर दंगल समेत अन्य खेल होते थे। इसमें सिर्फ प्रसाद वितरण किया जाता था। अब मेले के विकास के साथ इसका विस्तार भी हुआ है। अब शहर के कारोबारी और स्थानीय लोग भंडारे लगा रहे हैं। इस साल पहले दिन ही 50 से अधिक जगह भंडारे लगे जबकि पहले दिन के लिए 80 लोगों ने भंडारे लगाने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी।
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