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Solan News: कोरोना काल के बाद धूल फांक रहे वेंटीलेटर, मरीजों को कर रहे रेफर
Sat, 31 Oct 2026 12:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:09 AM IST
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क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के बाहर बंद करके रखी मशीनरी। संवाद
केंद्र सरकार ने अस्पतालों में उपलब्ध कराए थे वेंटीलेटर, कई हुए खराब
कोविड के बाद अस्पताल प्रशासन ने नहीं किया कोई भी वेंटीलेटर उपयोग
वेंटीलेटर चलाने के लिए स्टॉफ नहीं, मरीज किए जा रहे शिमला को रेफर
निशिल मेहता
सोलन। कोरोना काल के दौरान जिले के अस्पतालों को उपलब्ध करवाए गए कई वेंटीलेटर अब खराब हो गए है और धूल फांक रहे हैं। रखरखाव और तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को वेंटीलेटर की सुविधा देने के बजाय आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन समेत जिले के कई अस्पतालों में कोरोना काल के बाद से वेंटीलेटर का इस्तेमाल नहीं हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में भी कोरोना काल के दौरान 10 वेंटीलेटर उपलब्ध करवाए गए थे। कोरोना काल के बाद इनका उपयोग ही नहीं हुआ, जिससे इनमें से करीब सात खराब हो गए और बचे धूल फांक रहे हैं। इसके लिए स्टाफ की भी कमी है।
हालात ये हैं कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों और तीमारदारों को भी सिलिंडर मरीजों तक पहुंचाने में परेशानी होती है।
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इनसेट
वेंटीलेटर और ऑक्सीजन सिलिंडर में अंतर
ऑक्सीजन सिलिंडर उन मरीजों के लिए उपयोगी होते हैं, जो स्वयं सांस ले सकते हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वहीं, वेंटीलेटर उन मरीजों को सांस लेने में मदद करता है, जो स्वयं सांस लेने में सक्षम नहीं होते। इसकी पाइप मरीज की सांस की नली से जोड़ी जाती है। मशीन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है।
कोट
विभाग की ओर से खराब मशीनों की जानकारी जुटाई जा रही है। खराब वेंटीलेटर ठीक करवाए जाएंगे। श्वसन संक्रमण बढ़ने की स्थिति में इनका उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा कई बड़े अस्पतालों में नए वेंटीलेटर लगाने की तैयारी भी की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को जल्द यह सुविधा उपलब्ध हो सके। - डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन
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कोविड के बाद अस्पताल प्रशासन ने नहीं किया कोई भी वेंटीलेटर उपयोग
वेंटीलेटर चलाने के लिए स्टॉफ नहीं, मरीज किए जा रहे शिमला को रेफर
निशिल मेहता
सोलन। कोरोना काल के दौरान जिले के अस्पतालों को उपलब्ध करवाए गए कई वेंटीलेटर अब खराब हो गए है और धूल फांक रहे हैं। रखरखाव और तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को वेंटीलेटर की सुविधा देने के बजाय आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन समेत जिले के कई अस्पतालों में कोरोना काल के बाद से वेंटीलेटर का इस्तेमाल नहीं हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में भी कोरोना काल के दौरान 10 वेंटीलेटर उपलब्ध करवाए गए थे। कोरोना काल के बाद इनका उपयोग ही नहीं हुआ, जिससे इनमें से करीब सात खराब हो गए और बचे धूल फांक रहे हैं। इसके लिए स्टाफ की भी कमी है।
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हालात ये हैं कि अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है। सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों और तीमारदारों को भी सिलिंडर मरीजों तक पहुंचाने में परेशानी होती है।
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वेंटीलेटर और ऑक्सीजन सिलिंडर में अंतर
ऑक्सीजन सिलिंडर उन मरीजों के लिए उपयोगी होते हैं, जो स्वयं सांस ले सकते हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। वहीं, वेंटीलेटर उन मरीजों को सांस लेने में मदद करता है, जो स्वयं सांस लेने में सक्षम नहीं होते। इसकी पाइप मरीज की सांस की नली से जोड़ी जाती है। मशीन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है।
कोट
विभाग की ओर से खराब मशीनों की जानकारी जुटाई जा रही है। खराब वेंटीलेटर ठीक करवाए जाएंगे। श्वसन संक्रमण बढ़ने की स्थिति में इनका उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा कई बड़े अस्पतालों में नए वेंटीलेटर लगाने की तैयारी भी की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को जल्द यह सुविधा उपलब्ध हो सके। - डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सोलन

क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के बाहर बंद करके रखी मशीनरी। संवाद